ब्रेकिंग न्यूज: भारतीय सेना ने शुरू किया सिक्किम का पहला सामुदायिक रेडियो स्टेशन
भारतीय सेना ने सिक्किम के सीमावर्ती गांवों के लिए ‘सिक्किम सुंदर’ नामक एक सामुदायिक रेडियो स्टेशन की शुरुआत की है। यह स्टेशन दूरदराज के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में संचार और सूचना के पहुंच को बेहतर बनाने के लिए स्थापित किया गया है।
‘सिक्किम सुंदर’ रेडियो स्टेशन का उद्देश्य
भारतीय सेना के त्रिशक्ति कोर द्वारा शुरू किया गया यह रेडियो स्टेशन स्थानीय समाचार, मौसम की जानकारी, और सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी प्रसारित करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देना और युवाओं की सहभागिता को प्रोत्साहित करना है।
आरंभिक जानकारी के अनुसार, इस रेडियो स्टेशन के माध्यम से स्थानीय युवाओं को संचार कौशल विकसित करने का अवसर भी मिलेगा। एक वरिष्ठ सेना अधिकारी ने बताया, "यह पहल समुदायों को जोड़ने, स्थानीय आवाजों को मजबूत करने, और दूरदराज के क्षेत्रों में विकास को समर्थन देने में सहायक होगी।"
उद्घाटन समारोह में जुटे लोग
रेडियो स्टेशन का उद्घाटन त्रिशक्ति कोर के वरिष्ठ अधिकारियों, स्थानीय नागरिक प्रशासन के प्रतिनिधियों और समुदाय के सदस्यों की मौजूदगी में हुआ। इस आयोजन ने क्षेत्र के लोगों को एक नई आवाज देने का अवसर प्रदान किया है।
इस अवसर पर, लोकल समुदाय के लोगों ने भी अपने विचार साझा किए और रेडियो स्टेशन की आवश्यकता के बारे में बताया। यह स्टेशन न केवल संचार का माध्यम होगा, बल्कि यह स्थानीय मुद्दों को उठाने का भी मंच बनेगा।
तामरचु में भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण
इस बीच, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के अतिरिक्त निदेशक जनरल, जितेंद्र प्रसाद ने उत्तर सिक्किम के तामरचु में भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने मौके पर जाकर स्थिति का निरिक्षण किया और वहां तैनात बीआरओ कर्मियों से भी बातचीत की।
प्रसाद ने नुकसान का आकलन किया और मौजूदा पुनर्स्थापना कार्य की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे मार्ग को जल्द से जल्द पुन: खोलने के प्रयासों को तेज करें। उनकी समझदारी से क्षेत्र में कनेक्टिविटी बनाए रखने और सड़क लिंक के महत्व को दर्शाते हुए, उन्होंने स्थानीय समुदायों के लिए यह सुनिश्चित करने का प्रयत्न किया कि उन्हें सुगम परिवहन उपलब्ध हो।
निष्कर्ष
भारतीय सेना द्वारा स्थापित ‘सिक्किम सुंदर’ रेडियो स्टेशन समुदायों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, जो न केवल स्थानीय सांस्कृतिक धरोहर को बनाए रखेगा, बल्कि युवाओं को सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करेगा। यह कदम सीमावर्ती क्षेत्रों में सूचना के प्रवाह को मजबूत बनाने और समुदायों के विकास में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।
