ब्रेकिंग न्यूज़: इजरायल के मंत्री का अल-अक्सा मस्जिद पर धावा, पालिस्तीनियों की तीखी आलोचना
इजरायल के अत्यधिक दाएं राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बिन-गवीर ने अल-अक्सा मस्जिद परिसर में बलात्कारी तरीके से प्रवेश किया, जिसके बाद से पलस्तीनियों में जबरदस्त रोष फैल गया है। बिन-गवीर के इस कदम को न केवल इजरायली सुरक्षा बलों द्वारा संरक्षित किया गया, बल्कि इसे मुस्लिम धार्मिक स्थलों के खिलाफ एक गंभीर उल्लंघन भी माना गया।
धावा और उसकी प्रतिक्रिया
12 अप्रैल 2026 को, बिन-गवीर ने पूर्वी यरुशलम के पुराने शहर में अल-अक्सा मस्जिद परिसर में एक पूजा समारोह आयोजित किया। यह उनकी अल-अक्सा मस्जिद में की गई तीसरी एंट्री थी। उनके साथ कई इजरायली बस्तियों के निवासी थे, जिन्होंने इस संवेदनशील स्थल पर यहूदी प्रार्थनाएँ कीं, जोकि गैर-मुसलमानों के लिए वर्जित है।
इस पर जॉर्डन के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया, जिसमें बिन-गवीर की यात्रा को स्थिति की स्थिति के उल्लंघन और उसके पवित्रता का अपमान बताते हुए निंदा की। उन्होंने इसे एक अक्षम्य उत्तेजना और बढ़ती हुई अशांति का संकेत माना।
पलस्तीनियों की प्रतिक्रिया
पलस्तीन की राष्ट्रपति कार्यालय ने भी बिन-गवीर के इस कदम की कड़ी निंदा की। राष्ट्रपति कार्यालय का कहना है कि इस तरह के हमले धार्मिक स्थलों की ऐतिहासिक और कानूनी स्थिति के खिलाफ हैं। इससे पहले ऐसी घटनाएँ पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ी हैं।
खास बात यह है कि बिन-गवीर ने 2022 में पदभार ग्रहण करने के बाद से कम से कम 16 बार इस मस्जिद परिसर पर धावा बोला है। वे एक ऐसे बस्ति आंदोलन का हिस्सा हैं जो अल-अक्सा मस्जिद पर अधिकार जमाने की कोशिश कर रहा है। बिन-गवीर ने इस स्थल पर एक यहूदी उपासना स्थल बनाने की इच्छा भी जताई है।
ज़मीनी हालात और मानवाधिकार उल्लंघन
इजरायल की सरकार ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ युद्ध का ऐलान करते हुए अल-अक्सा मस्जिद को 40 दिनों के लिए बंद कर दिया था। इस वर्ष ईद-उल-फितर की नमाज़ के दौरान भी इजरायली authorities ने सुधार लागू किए। मस्जिद 9 अप्रैल को फिर से खोली गई, लेकिन उसी दिन इजरायली बस्तियों के निवासियों ने परिसर में घुसकर ताल्मुडी अनुष्ठान किए।
इसके साथ ही, इजरायल के कब्जे वाले पश्चिमी तट पर भी सघन छापे जारी हैं। रविवार को कम से कम 18 पलस्तीनियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें छह लोग डेहिशा शरणार्थी शिविर में हुए एक छापे के दौरान पकड़े गए।
संयुक्त राष्ट्र कार्यालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2023 से अब तक, इजरायल के बलों और बस्तियों के निवासियों द्वारा 1,100 से अधिक पलस्तीनियों को मौत के घाट उतारा गया है, और हजारों को मजबूरन अपने घरों से विस्थापित किया गया है।
इस ताज़ा घटनाक्रम ने एक बार फिर से इजराइल-पलस्तीन संघर्ष की जटिलता को उजागर कर दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता को बढ़ा दिया है।
