पूर्वी प्रशांत में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई: दो लोग मारे गए

ब्रेकिंग न्यूज: अमेरिका ने प्रशांत और कैरिबियन में अपने हमले तेज किए! पिछले एक महीने में 170 से अधिक लोगों की हुई हैं मौतें।

अमेरिकी सैन्य हमलों का नया दौर जारी
अमेरिकी सेना ने पूर्वी प्रशांत में एक बार फिर से हमला किया है, जिसमें दो लोग मारे गए हैं। यह हमला उस समय हुआ है जब अमेरिका ने दावा किया है कि ये जहाज लैटिन अमेरिका के ड्रग व्यापार से जुड़े हुए हैं।

अमेरिकी दक्षिणी कमान (SOUTHCOM) ने सोमवार रात को सोशल मीडिया पर इस हमले की पुष्टि की। उन्होंने इसे एक "लक्षित हमला" बताया जिसमें दो "नार्को-आतंकवादियों" को मारा गया, हालांकि इस संबंध में कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।

अमेरिका का उद्देश्य क्या है?

SOUTHCOM के अनुसार, इस हमले की योजना खुफिया रिपोर्ट पर आधारित थी। दावा किया गया कि यह नाव "पूर्वी प्रशांत में ज्ञात नार्को-तस्करी मार्गों" पर यात्रा कर रही थी। इस हमले का आदेश अमेरिकी कमांडर जनरल फ्रैंसिस एल डोनोवन द्वारा दिया गया था।

एक धुंधली वीडियो क्लिप भी जारी की गई है, जिसमें हमले के समय नाव को देखा जा सकता है जिसमें बाहर के इंजन लगे हुए हैं। वीडियो में नाव पर हवाई हमला होता है और वह आग में जलने लगती है।

घातक हमलों की श्रृंखला

यह हमला लगातार दूसरे दिन हुआ है जब SOUTHCOM ने प्रशांत में एक और जहाज पर हमले की घोषणा की। रविवार को, अमेरिकी सेना ने बताया कि उन्होंने पूर्वी प्रशांत में दो नावों को नष्ट किया था, जिसमें पांच लोग मारे गए और एक व्यक्ति घायल हुआ।

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि उस व्यक्ति के साथ क्या हुआ, लेकिन दक्षिणी कमान ने कहा कि अमेरिकी तट रक्षक को सूचित किया गया है।

संख्याओं की बात करें तो, पिछले सितंबर से अब तक, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में कम से कम 170 लोगों की जान जा चुकी है। यह संख्या प्रतिशत के हिसाब से काफी डराने वाली है और इसे लेकर विभिन्न मानवाधिकार समूहों और अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों ने चिंता जताई है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और चिंताएं

अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञ और मानवाधिकार समूह अमेरिका की ट्रंप प्रशासन पर आरोप लगा रहे हैं कि वे अंतरराष्ट्रीय जल में बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के हत्याएं कर रहे हैं। ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसमें यह आरोप है कि आम नागरिक, विशेषकर मछली पकड़ने वाली टीमों को निशाना बनाया गया है, जो अमेरिका के लिए तत्काल खतरा नहीं थे।

ट्रंप प्रशासन इन हमलों को ड्रग तस्करी संगठनों के खिलाफ अपनी लड़ाई का हिस्सा बताता है, लेकिन पिछले एक साल में लक्ष्य बना चुके जहाजों की ड्रग तस्करी में संलिप्तता के ठोस सबूत नहीं दिए गए हैं।

सोशल मीडिया और वैश्विक प्रतिक्रिया में उत्तेजना
इस घटना के बाद से सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से चर्चा हो रही है। लोगों ने अपने विचार साझा किए हैं और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। यह उचित है कि इससे वैश्विक स्तर पर अधिक चिंताओं और बहस का विषय बन रहा है।

हालांकि, अमेरिका की इस कार्रवाई ने न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून को चुनौती दी है, बल्कि मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप भी खड़े किए हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि क्या अमेरिका इस दिशा में कोई बदलाव करेगा या अपनी रणनीति को जारी रखेगा।

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