शपथ तक नहीं पढ़ पाए सम्राट चौधरी! विपक्ष ने वायरल वीडियो से उठाई बड़ी सवाल, ‘कैसे चलाएंगे बिहार?’

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बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का शपथ ग्रहण समारोह विवादों में घिर गया है। शपथ ग्रहण किए कुछ ही घंटे बाद से विपक्ष ने उन्हें अपने निशाने पर ले लिया है। तेजस्वी यादव से लेकर कांग्रेस तक, सभी ने सम्राट चौधरी की शपथ पढ़ने में हुई कथित चूक पर सवाल उठाए हैं।

शपथ पत्र पढ़ने में हुई चूक

सम्राट चौधरी का शपथ लेते समय का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें वे हिंदी के बुनियादी शब्दों को ठीक से नहीं पढ़ पा रहे हैं। राजद ने इस वीडियो को साझा कर सम्राट चौधरी के लिए आलोचनात्मक टिप्पणियाँ दी हैं। राजद ने आरोप लगाया है कि चौधरी अक्षुण्ण, सम्यक, और संसूचित जैसे शब्दों को सही से नहीं पढ़ सके। उन्होंने ट्विटर पर लिखा है कि "बिहार के नए मुख्यमंत्री सही ढंग से शपथ नहीं पढ़ पाए।" यह स्थिति उस वक्त और भी चौंकाने वाली हो गई जब एक राजनीतिक दल ने उन पर उत्तरदायित्व का ठीकरा फोड़ा है, जो खुद दूसरों की गलतियों पर तंज कसते हैं।

कांग्रेस ने उठाए सवाल

बिहार कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर सम्राट चौधरी की कार्यक्षमता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने ट्वीटर पर लिखा, "शपथ पढ़ने में ये हाल, कैसे चलेगा बिहार?" उनका तर्क है कि जो व्यक्ति शपथ पत्र के शब्दों को सही नहीं पढ़ सकता, वह जटिल प्रशासनिक फाइलों और नीतियों को कैसे समझेगा? कांग्रेस की यह पूछताछ बिहार के राजनीतिक माहौल में नई बहस को जन्म देने का काम कर रही है।

तेजस्वी यादव का तंज

राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी इस अवसर पर सम्राट को "सेलेक्टेड मुख्यमंत्री" करार देते हुए तंज कसा है। उन्होंने कहा, "सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार को गद्दी से हटाने की प्रतिज्ञा पूरी कर ली है, लेकिन अब वह खुद सेलेक्टेड मुख्यमंत्री हैं।" उनके इस बयान ने बिहार की राजनीति में नया मोड़ पैदा कर दिया है।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएँ

सोशल मीडिया पर यूजर्स भी सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण वीडियो को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। कुछ यूजर्स ने उनकी योग्यता पर संदेह जताया है, तो कुछ ने मजाक में लिखा है कि "अनपढ़ भैंस को मुख्यमंत्री बनाया गया है।" यहां तक की कुछ यूजर्स ने सम्राट चौधरी की शिक्षा को लेकर भी चुटकी ली है।

निष्कर्ष

सम्राट चौधरी का शपथ ग्रहण समारोह, जो कि एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना थी, अब विपक्ष के लिए एक मौका बन गया है। विपक्ष के आलोचनात्मक रुख से यह स्पष्ट होता है कि बिहार की राजनीति में एक बार फिर से तात्कालिकता और व्यवधान है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सम्राट चौधरी इस विवाद को अपने पक्ष में मोड़ने में सफल होते हैं या नहीं।

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