ताज़ा समाचार: छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग में अनुशासनात्मक कार्यवाही में सुधार की आवश्यकता
रायपुर। 21 अप्रैल 2026 | छत्तीसगढ़ लोक शिक्षण संचालनालय ने शिक्षा विभाग में अनुशासनात्मक कार्यवाहियों और विभागीय जांचों में हो रही देरी पर गंभीर चिंता जताई है। निदेशक के द्वारा जारी निर्देशों में सभी संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि जांच प्रक्रिया में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संचालनालय ने स्पष्ट समय सीमा भी निर्धारित की है ताकि जांच प्रक्रियाओं को समय पर पूरा किया जा सके।
अधूरी रिपोर्ट और निरीक्षण की अनदेखी पर चिंता
संचालनालय द्वारा की गई जांच में यह पाया गया है कि लोक सेवकों के खिलाफ भेजी जाने वाली अनुशासनात्मक कार्यवाही के प्रस्ताव अक्सर अधूरे और नियमों के उल्लंघन में होते हैं। इससे विधि सम्मत निर्णय लेने में रुकावट आ रही है और दोषी कर्मचारियों को अप्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है। कई मामलों में, प्रक्रियात्मक त्रुटियों के कारण कर्मचारी हाई कोर्ट में चुनौती दे रहे हैं, जिससे विभाग की छवि पर भी असर पड़ रहा है।
नेताओं के लिए नई समय-सीमा का निर्देश
डीपीआई के नए निर्देशों के अनुसार, विभागीय जांच अब निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी करनी होगी – मुख्य सजा (Major Penalty) के लिए अधिकतम 6 महीने और लघु सजा (Minor Penalty) के लिए अधिकतम 3 महीने का समय दिया गया है। अनुशासनात्मक कार्यवाही के प्रस्ताव में आरोपों का अभिकथन, साक्ष्य सूची और गवाहों की सूची स्पष्ट रूप से होना अनिवार्य है।
जांच अधिकारियों को नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा
डीपीआई ने जांच अधिकारियों को ‘छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम, 1966’ के नियम-14 और 16 का पालन करने का निर्देश दिया है। यदि अपचारी लोक सेवक सुनवाई में उपस्थित नहीं होता है, तो उसकी अनुपस्थिति दर्ज कर जांच पूरी की जानी चाहिए। इसके अलावा, वित्तीय अनियमितता और गबन के मामलों में सभी प्रमाणिक अभिलेखों की स्पष्ट प्रतियां भी भेजना आवश्यक है।
निष्कर्ष
डीपीआई के निर्देशों का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में अनुशासनात्मक कार्यवाहियों को प्रभावी बनाना है। सभी संबंधित अधिकारियों को इन निर्देशों का पालन करते हुए कार्यवाही करनी होगी ताकि विभाग की छवि में सुधार हो सके और न्यायपूर्ण निर्णयों की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए ये कदम बेहद आवश्यक हैं।




