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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: छत्तीसगढ़ के न्यायालयीन कर्मचारी को LLB तृतीय वर्ष की परीक्षा में बैठने की मिली अंतरिम अनुमति!

ब्रेकिंग न्यूज़: सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

दिल्ली। 21 अप्रैल 2026 | सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के एक न्यायालयीन कर्मचारी को एलएलबी तीसरे वर्ष की परीक्षा में शामिल होने का अंतरिम आदेश जारी किया है। यह निर्णय मंत्रालय की नियुक्ति और हाई कोर्ट के द्वारा पारित किए गए निर्णय के खिलाफ आया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की डिवीजन बेंच ने इस मामले को गम्भीरता से लेते हुए यह आदेश दिया।

मामला क्या है?

याचिकाकर्ता को सितंबर 2022 में छत्तीसगढ़ के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय में सहायक ग्रेड-III के पद पर नियुक्त किया गया था। नियुक्ति के अनुसार, उन्हें पहले वर्ष में उच्च शिक्षा के लिए कार्यालय प्रमुख की अनुमति प्राप्त करनी थी। उन्होंने एलएलबी के पहले और दूसरे वर्ष की पढ़ाई की अनुमति ली, लेकिन तीसरे वर्ष की परीक्षा के लिए आवेदन करते समय उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

नियमों का अहसास

छत्तीसगढ़ जिला न्यायपालिका के कर्मचारी नियम, 2023 के तहत, 6 अक्टूबर 2023 से कर्मचारियों को नियमित छात्र के रूप में परीक्षा देने पर रोक लगा दी गई थी। केवल निजी या पत्राचार माध्यम से अध्ययन की अनुमति दी गई थी। जब याचिकाकर्ता ने तीसरे वर्ष की परीक्षा के लिए आवेदन किया, तो उनके आवेदन को नकार दिया गया। इस मामले में छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई, जहां सिंगल बेंच ने याचिकाकर्ता को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी। लेकिन बाद में डिवीजन बेंच ने इस निर्णय को पलट दिया।

सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

चूंकि हाई कोर्ट का निर्णय याचिकाकर्ता के अनुरूप नहीं था, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट ने आज याचिका की सुनवाई के बाद अंतरिम आदेश पारित किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को एलएलबी तीसरे वर्ष की शेष परीक्षाओं में Participating allowed होगा, जबकि एक विशेष विषय के लिए बाद में आदेश दिया जाएगा।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय न केवल याचिकाकर्ता के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि यह न्यायपालिका के कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा भी करता है। यह मामला उन कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करता है जो अपनी शैक्षिक उपलब्धियों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर रहेंगी कि याचिकाकर्ता शेष परीक्षाओं में कैसा प्रदर्शन करते हैं और क्या अदालत पिछले विषय पर अगला आदेश पारित करती है।

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