
बागबाहरा पटपरपाली सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट—डिब्बों में बंद मशीनें, जर्जर भवन और अधूरी व्यवस्था के बीच बच्चों को शुद्ध पानी से वंचित
दिलीप शर्मा, महासमुंद (ग्राउंड रिपोर्ट)। जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए लगाए गए आरओ (RO) फिल्टर की जमीनी स्थिति सवालों के घेरे में है। जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास टिक्वेन्द्र जटवार द्वारा जारी प्रेस नोट में 1106 आंगनबाड़ी केंद्रों में पानी की उपलब्धता एवं आरओ चालू होने का दावा किया गया है, लेकिन बागबाहरा ब्लॉक के पटपरपाली सेक्टर में की गई पड़ताल में तस्वीर अलग नजर आई।
ग्राउंड रिपोर्ट में खुली हकीकत
वेबमोर्चा की टीम ने पटपरपाली सेक्टर के करीब 10 आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया। यहां कई केंद्रों में आरओ केवल शो-पीस बनकर रह गए हैं, तो कुछ जगह मशीनें डिब्बों में बंद मिलीं। अधिकांश केंद्रों में पानी या बिजली की व्यवस्था नहीं होने के कारण आरओ चालू नहीं हो पाए हैं।
‘सक्षम’ केंद्रों की स्थिति भी कमजोर
पटपरपाली सेक्टर के करीब 20 गांवों में से 12 आंगनबाड़ी केंद्रों को “सक्षम आंगनबाड़ी” घोषित कर आरओ उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें से कई केंद्र ऐसे हैं जिनके पास स्वयं का भवन नहीं है, जिससे मशीनों का उपयोग संभव नहीं हो पा रहा है।
कुसमी: इंस्टॉल के बाद भी बंद
कुसमी के स्कूल पारा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में कार्यकर्ता ने बताया कि आरओ सालभर पहले मिला था और मार्च 2026 में इंस्टॉल किया गया, लेकिन पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण अब तक चालू नहीं हो सका। वहीं कुसमी के भांटापारा में बिजली कनेक्शन और पानी की टंकी की व्यवस्था नहीं होने से मशीन उपयोग में नहीं है।
डोंगाखम्हरिया: शो-पीस बना आरओ
डोंगाखम्हरिया केंद्र में आरओ को केवल औपचारिक रूप से लगा दिया गया है, जबकि पानी की टंकी ही नहीं है। ऐसे में बच्चों को आरओ का पानी मिलना संभव नहीं है।
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बैगाखम्हरिया: जर्जर भवन में व्यवस्था ठप
बैगाखम्हरिया में जर्जर भवन में आरओ लगाया गया है, लेकिन पानी नहीं होने से इसका उपयोग नहीं हो रहा। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए यहां अन्य भवन में संचालन किया जा रहा है।
डीहीटेमरी: सालभर से डिब्बे में बंद
डीहीटेमरी में आरओ एक साल से डिब्बे में ही बंद पड़ा है और बच्चों को आयरन युक्त पानी पिलाना पड़ रहा है। कार्यकर्ता के अनुसार, इंस्टालेशन को लेकर कोई पहल नहीं की गई।
अधिकारियों के दावे पर सवाल
बागबाहरा प्रभारी परियोजना अधिकारी भावना गुप्ता ने बताया कि कई केंद्रों में पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण आरओ चालू नहीं हो पाए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 263 केंद्रों में आरओ चालू होने के आंकड़े के बारे में वे स्पष्ट जानकारी नहीं दे सकतीं।
आंकड़ों और हकीकत में अंतर
इस प्रकार विभाग के दावों और जमीनी स्थिति में स्पष्ट अंतर सामने आया है। एक ही सेक्टर के सभी सक्षम केंद्रों में आरओ बंद मिलने से जिले के अन्य क्षेत्रों की स्थिति पर भी सवाल उठने लगे हैं।
लागत पर भी उठे सवाल
मीडिया सूत्रों के अनुसार एक आरओ की कीमत करीब 49 हजार 300 रुपए बताई जा रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। वहीं बाजार में इसी प्रकार के आरओ कम कीमत में उपलब्ध होने की बात भी सामने आ रही है।
योजना के क्रियान्वयन में खामियां
कुल मिलाकर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की योजना का लाभ बच्चों तक नहीं पहुंच पा रहा है। योजना के क्रियान्वयन में खामियां सामने आने के बाद अब इस पूरे मामले की जांच की मांग उठने लगी है।
“इन सभी आंगनबाड़ी केंद्रों की जमीनी हकीकत के वीडियो प्रमाण वेबमोर्चा के पास सुरक्षित हैं, जो दावों और वास्तविकता के अंतर को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।”
नीचे देखे बक्से में एक साल से बंद है आरो





