महासमुंद। सीतापुर के भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो और तहसील प्रशासन के बीच हुए विवाद को लेकर पूर्व विधायक डॉ. विमल चोपड़ा ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि यह घटना प्रशासनिक तानाशाही और जनता के प्रति लापरवाही का उदाहरण है।
डॉ. चोपड़ा ने कहा कि सरकारी कार्यालयों में कार्यों के निराकरण में हो रही देरी और अधिकारियों की कार्यशैली के कारण आम जनता परेशान है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्व विभाग में लंबे समय से लंबित मामलों और प्रशासनिक उदासीनता के कारण लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
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उन्होंने सीतापुर की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि विधायक रामकुमार टोप्पो की बहन सीमा धनकी को अपने कार्य के लिए कई दिनों तक तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने पड़े। उनके अनुसार, समय पर कार्य नहीं होने के कारण विवाद की स्थिति बनी। डॉ. चोपड़ा ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि पूरे घटनाक्रम के कारणों की गहराई से पड़ताल की जानी चाहिए।
पूर्व विधायक ने यह भी कहा कि केवल निलंबन की कार्रवाई स्थायी समाधान नहीं है। जो अधिकारी निर्धारित समय-सीमा के भीतर जनता के कार्यों का निराकरण नहीं करते, उनके खिलाफ जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदारी तय करने के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता बताई।
महासमुंद के राजस्व मामलों का भी उठाया मुद्दा
डॉ. चोपड़ा ने दावा किया कि महासमुंद जिले में भी किसानों और ग्रामीणों से जुड़े कई राजस्व प्रकरण वर्षों से लंबित हैं। उन्होंने कहा कि दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले लोगों को कार्यालयों में पर्याप्त जानकारी नहीं मिलती, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि डिजिटल युग में पक्षकारों को मोबाइल के माध्यम से सुनवाई और अधिकारियों की उपलब्धता संबंधी जानकारी दी जानी चाहिए। इससे अनावश्यक परेशानी और बार-बार कार्यालय आने की समस्या कम हो सकती है। डॉ. चोपड़ा ने प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने और जनता के कार्यों के त्वरित निराकरण के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की है।


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