नई दिल्ली। प्रशांत महासागर में अल-नीनो सक्रिय हो गया है और समुद्र का तापमान सामान्य से करीब 2.5 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति और मजबूत होकर “सुपर अल-नीनो” में बदलती है, तो इसका असर भारत समेत पूरे एशिया पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत के लगभग 14.5 करोड़ किसान और एशिया के 4.5 अरब से अधिक लोग इससे प्रभावित हो सकते हैं। अल-नीनो के कारण कहीं सूखा तो कहीं अत्यधिक बारिश की स्थिति बन सकती है, जिससे खेती-किसानी को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है।
क्या होता है अल-नीनो?
अल-नीनो एक मौसमीय घटना है, जो तब होती है जब प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इससे दुनिया भर के मौसम चक्र प्रभावित होते हैं। कई क्षेत्रों में बारिश कम हो जाती है, जबकि कुछ जगहों पर बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है।
फसलों पर कैसे पड़ता है असर?
अत्यधिक गर्मी, सूखी मिट्टी और अचानक होने वाली भारी बारिश फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है। इससे उत्पादन घटने का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पहले भी सुपर अल-नीनो के दौरान भारत में सोयाबीन, थाईलैंड में चावल, वियतनाम में कॉफी और इंडोनेशिया-मलेशिया में पाम ऑयल उत्पादन प्रभावित हुआ था।

खाद्य पदार्थ हो सकते हैं महंगे
यदि अल-नीनो के कारण प्रमुख कृषि उत्पादों का उत्पादन घटता है, तो खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कॉफी, चीनी, कोको और अन्य कृषि उत्पादों के दामों में तेजी देखने को मिल सकती है।
किसानों की चिंता क्यों बढ़ी?
किसान पहले से ही खाद, डीजल और अन्य कृषि सामग्री की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं। ऐसे में यदि मौसम भी प्रतिकूल रहा तो खेती की लागत और बढ़ सकती है तथा उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
सरकार ने शुरू की तैयारी
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों के साथ बैठक कर संभावित अल-नीनो की स्थिति से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की है। कम बारिश वाले क्षेत्रों के लिए पहले से योजना बनाने और नियमित समीक्षा बैठकें करने के निर्देश दिए गए हैं।
राहत की भी उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सिंचाई व्यवस्था, मौसम आधारित खेती और कम पानी वाली फसलों को अपनाकर नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। भारत के पास कई ऐसे कृषि मॉडल और तकनीकें हैं, जो मौसम की चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकती हैं।
हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले महीनों में अल-नीनो की स्थिति पर लगातार नजर रखने की जरूरत होगी, क्योंकि इसका असर केवल खेती ही नहीं बल्कि महंगाई और आम लोगों की जिंदगी पर भी पड़ सकता है।
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