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तालाब पर कब्जे के मामले में नया मोड़: पूर्व सरपंच बोले- ग्रामसभा, पटवारी के सत्यापन और जनपद की स्वीकृति के बाद हुआ था निर्माण

पूर्व सरपंच ने जताई राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी की आशंका; विद्याबाई बोलीं- राजस्व सीमांकन में जमीन मेरी निकली, तभी किया कब्जा; ग्रामीणों ने एफआईआर और कब्जा हटाने की मांग उठाई

महासमुंद/बागबाहरा। ग्राम पंचायत भलेसर में मनरेगा के तहत निर्मित डबरी (तालाब) पर कथित निजी कब्जे का मामला अब नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। वेबमोर्चा की ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान एक ओर जहां पूर्व सरपंच बलराम सिन्हा ने दावा किया कि तालाब निर्माण पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन करते हुए कराया गया था, वहीं दूसरी ओर विद्याबाई पति राधेश्याम चंद्राकर ने कहा कि उन्होंने अपनी भूमि का राजस्व विभाग से सीमांकन कराया है और सीमांकन के दौरान संबंधित भूमि उनकी बताई गई। इसी आधार पर उन्होंने उस तालाब पर कब्जा किया।

पूर्व सरपंच बलराम सिन्हा ने बताया कि गांव में रोजगार की मांग को देखते हुए ग्रामसभा में प्रस्ताव पारित किया गया। इसके बाद हल्का पटवारी, ग्राम प्रमुखों एवं पंचायत प्रतिनिधियों ने स्थल निरीक्षण कर खसरा नंबर-16 को डबरी निर्माण के लिए प्रस्तावित किया। पंचायत प्रस्ताव, नक्शा और खसरा दस्तावेजों के साथ पूरा प्रकरण जनपद पंचायत भेजा गया, जहां से प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति मिलने के बाद मनरेगा के तहत निर्माण कराया गया।

उन्होंने बताया कि लगातार दो सीजन तक मजदूरों ने मनरेगा के तहत इस डबरी में कार्य किया, लेकिन उस दौरान विद्याबाई पति राधेश्याम चंद्राकर अथवा किसी अन्य व्यक्ति ने भूमि पर निजी स्वामित्व का दावा करते हुए कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई।

“जनपद से निकल सकते हैं पूरे दस्तावेज”

पूर्व सरपंच बलराम सिन्हा ने कहा कि यदि आज संबंधित भूमि को निजी बताया जा रहा है, तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि जनपद पंचायत से स्वीकृति फाइल, पंचायत प्रस्ताव, नक्शा, खसरा, तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका (एमबी), लेवल बुक, जियो-टैग फोटो तथा भुगतान संबंधी समस्त अभिलेख निकाले जाएं। इन दस्तावेजों से स्पष्ट हो जाएगा कि तालाब किस आधार पर स्वीकृत हुआ और निर्माण की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई।

उन्होंने यह भी आशंका जताई कि यदि वर्तमान में भूमि निजी बताई जा रही है तो राजस्व अभिलेखों में किसी स्तर पर गड़बड़ी या फेरबदल की भी जांच होनी चाहिए। यह पूर्व सरपंच का आरोप है, जिसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

20 एकड़ से अधिक शासकीय भूमि होने का दावा

पूर्व सरपंच का दावा है कि खसरा नंबर-16 का कुल रकबा 20 एकड़ से अधिक है और यह शासकीय भूमि है। उनका आरोप है कि इसके बड़े हिस्से पर पहले से अतिक्रमण किया जा चुका है। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित परिवार ने वर्षों के दौरान भू-आवंटन की कई एकड़ भूमि खरीदी और बाद में सीमांकन कराकर विवाद की स्थिति उत्पन्न की।

ग्रामीणों ने एफआईआर और कब्जा हटाने की मांग की

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि यदि जांच में तालाब शासकीय भूमि पर निर्मित पाया जाता है, तो तत्काल अतिक्रमण हटाकर सरकारी तालाब को कब्जामुक्त कराया जाए। साथ ही, यदि किसी व्यक्ति द्वारा शासकीय संपत्ति पर अवैध कब्जा किया गया हो तो उसके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई

अब इस पूरे मामले में दो अलग-अलग दावे सामने हैं। एक ओर पूर्व सरपंच का कहना है कि तालाब का निर्माण ग्रामसभा के प्रस्ताव, पटवारी के सत्यापन और जनपद पंचायत की स्वीकृति के बाद शासकीय भूमि पर हुआ था, वहीं दूसरी ओर विद्याबाई पति राधेश्याम चंद्राकर का कहना है कि राजस्व सीमांकन में भूमि उनके स्वामित्व की पाई गई, जिसके आधार पर उन्होंने कब्जा किया। ऐसे में वास्तविक स्थिति अब राजस्व अभिलेखों, मनरेगा की मूल फाइल, माप पुस्तिका (एमबी), तकनीकी स्वीकृति, जियो-टैग रिकॉर्ड, सीमांकन अभिलेख और सक्षम प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

(क्रमशः… अगले भाग में पढ़िए— मनरेगा से बने अन्य तालाबों में बड़ा खुलासा।)

🎥 देखिए ग्राउंड रिपोर्ट, पूर्व सरपंच का ऑन-कैमरा बयान और ग्रामीणों के आरोप।

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