छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ में एक दुर्लभ वन्यजीव के मंदिर में पहुंचने से लोगों में उत्सुकता फैल गई। राधाकृष्ण मंदिर के छज्जे पर बैठे पाम सिवेट को देखने बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर सावधानी से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और वन्यजीव को सुरक्षित बाहर निकाला।
खैरागढ़ के बख्शी मार्ग स्थित राधाकृष्ण मंदिर में रविवार सुबह उस समय हलचल मच गई, जब मंदिर के ऊपरी छज्जे पर एक दुर्लभ वन्यजीव दिखाई दिया। शुरुआत में लोगों ने उसे सामान्य जंगली जानवर या “कबरबिज्जू” समझा, लेकिन करीब से देखने पर उसकी पहचान पाम सिवेट के रूप में हुई। मंदिर में पूजा की तैयारी कर रहे पुजारी की नजर सबसे पहले उसकी चमकती आंखों पर पड़ी, जिसके बाद देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए।
मंदिर के कोने में दुबका पाम सिवेट लगातार भीड़ और हलचल को देख सहमा हुआ बैठा रहा। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। बाद में वन विभाग ने उसे शहर से दूर जंगल क्षेत्र में छोड़ दिया।

जंगलों के सिमटने से शहरों तक पहुंच रहे वन्यजीव
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि पाम सिवेट का शहरों में दिखना अब धीरे-धीरे बढ़ता हुआ ट्रेंड बनता जा रहा है। जंगलों की कटाई, बढ़ती आबादी और प्राकृतिक आवासों के कम होने के कारण ये जीव भोजन और सुरक्षित ठिकाने की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं। खैरागढ़ के आसपास मौजूद खेत, छोटे जंगल, नाले और पेड़ों की पट्टियां इनके लिए प्राकृतिक रास्तों का काम करती हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि पाम सिवेट निशाचर और बेहद सतर्क जीव होता है। दिन के समय यह शांत और छिपकर रहता है, जबकि रात में भोजन की तलाश में बाहर निकलता है। फल, कीड़े-मकोड़े, छोटे पक्षी और खाने की गंध इसे मानव बस्तियों की ओर आकर्षित करती है। पुराने मंदिर, बंद मकान और कम आवाजाही वाली जगहें इसे सुरक्षित आश्रय जैसी लगती हैं।
पारिस्थितिकी के लिए अहम है पाम सिवेट
पाम सिवेट का वैज्ञानिक नाम Paradoxurus hermaphroditus है। यह दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में पाया जाने वाला दुर्लभ स्तनधारी जीव माना जाता है। इसकी बड़ी आंखें, लंबी पूंछ और पेड़ों पर तेजी से चढ़ने की क्षमता इसे खास बनाती है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक यह जीव जंगलों के पारिस्थितिक संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह फलों के बीजों को फैलाने में मदद करता है, जिससे वनस्पतियों का प्राकृतिक विस्तार होता है। इसी वजह से इसे “फॉरेस्ट गार्डनर” यानी जंगल का प्राकृतिक बीज वाहक भी कहा जाता है।
भीड़ और शोर से बढ़ी परेशानी
मंदिर में वन्यजीव होने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंच गए। भीड़ और शोरगुल के कारण पाम सिवेट काफी देर तक डरा-सहमा रहा। वन विभाग की टीम ने लोगों को दूर हटाकर सावधानी के साथ रेस्क्यू अभियान चलाया।
खैरागढ़ डीएफओ पंकज राजपूत ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वन्यजीव के दिखाई देने पर उसे पकड़ने, घेरने या भगाने की कोशिश न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग को सूचना देना सबसे सुरक्षित तरीका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खैरागढ़ में पाम सिवेट का दिखाई देना केवल एक रेस्क्यू घटना नहीं, बल्कि बदलते पर्यावरण और तेजी से सिमटते जंगलों की चेतावनी भी है।



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