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संसद में संविधान संशोधन असफल, ruling पार्टी को बड़ा झटका!

ब्रेकिंग न्यूज़: मोदी सरकार का बड़ा झटका, पहली बार 12 सालों में संसद में हुआ संशोधन असफल
महिला आरक्षण बिल और परिसीमन मुद्दे पर विपक्षी दलों का एकजुट विरोध

नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में पहली बार ऐसा हुआ है कि सरकार द्वारा प्रस्तुत एक संवैधानिक संशोधन संसद में नकारा गया है। यह घटना पिछले 12 सालों में पहली बार हुई है, जब सरकार को इस तरह के बड़े झटके का सामना करना पड़ा।

महिला आरक्षण पर विपक्ष का समर्थन

महिला आरक्षण बिल को सभी प्रमुख विपक्षी दलों का समर्थन मिला है। हालांकि, परिसीमन यानी निर्वाचन सीमाओं का पुनर्गठन एक विवादास्पद मुद्दा बना हुआ है। विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि भाजपा चुनावी लाभ के लिए परिसीमन के लिए एक विशेष योजना बना रही है, जिससे कई राज्य, विशेषकर उत्तरी और मध्य भारत में सीटों की संख्या बढ़ेगी।

मोदी सरकार की रणनीति

कुछ विपक्षी नेताओं का मानना है कि सरकार ने दो बिलों को एक साथ मिलाकर पेश करके एक तीर से दो निशाने साधने की कोशिश की थी। यदि यह बिल पास हो जाता, तो भाजपा को हिंदी हृदय भूमि के राज्यों में काफी लोकप्रियता मिलती। लेकिन अब, इस असफलता के बाद सरकार विपक्ष पर आरोप लगाने का सहारा ले सकती है कि उन्होंने महिला आरक्षण को रोकने का काम किया है, जिसका इस्तेमाल राज्य के चुनावों में किया जा सकता है।

चुनावी महाकुंभ की तैयारी

तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चल रहे राज्य चुनावों के मद्देनजर, भाजपा अपनी रणनीति को बनाए रखने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। विपक्ष के सामने आने वाले इस मुद्दे ने भाजपा को एक अवसर प्रदान किया है कि वह इसे अपनी चुनावी रैली में एक बड़े मुद्दे के रूप में पेश कर सके।

नरेंद्र मोदी सरकार के इस संदर्भ में, संसद में आए इस विवाद ने एक नई स्थिति पैदा की है और अब यह देखना होगा कि अगले कदम के लिए सरकार क्या रणनीति अपनाती है। विपक्ष भी अपनी ताकत को और मजबूत करने के लिए इस मौके का लाभ उठाने के लिए तैयार है।

आने वाले कुछ दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि यह घटना भारतीय राजनीति में किस तरह का बदलाव ला सकती है।

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