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‘मेघ-बसंत’ कॉलोनी में दिवाली पर हास्य के पटाखों और श्रृंगार की फुलझड़ियों की धूम

महासमुंद। गोवर्धन पूजा के अवसर पर स्थानीय ‘मेघ-बसंत’ कॉलोनी में आयोजित भव्य कवि सम्मेलन में हास्य, ओज, श्रृंगार सहित सभी रसों की कविताओं ने श्रोताओं को खूब आनंदित किया। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि चिराग जैन (दिल्ली) ने अपनी रचनाओं से समां बांध दिया, वहीं शालीन हास्य और श्रृंगारिक रचनाओं के लिए प्रसिद्ध कवयित्री मनीषा शुक्ला ने अपनी प्रस्तुति से सभा में चार चांद लगा दिए।

नगर के सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार और गीतकार अशोक शर्मा ने अपनी ग़ज़लों और दोहों से कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए दीपावली की बधाई दी—

“जलें खुशी के दीप सभी घर, आंगन में खुशहाली हो
अंतस भी हरियाया हो और खेतों में हरियाली हो
सबका शुभ हो, सबका मंगल, विघ्न सभी के हरना देवी
मंगलमय हो दीपपर्व ये, हर घर में पग धरना देवी”

✨ हास्य और भावनाओं का संगम

कार्यक्रम का संचालन सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार ईश्वर शर्मा ने अपने विशिष्ट अंदाज में किया।
‘मेघ-बसंत’ कॉलोनी के संचालक धरमचंद, राजेश और ऋषभ श्रीश्रीमाल द्वारा समय-समय पर ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों की श्रृंखला में यह कवि सम्मेलन श्रोताओं के लिए यादगार बन गया।

महासमुंद की ‘मेघ-बसंत’ कॉलोनी
महासमुंद की ‘मेघ-बसंत’ कॉलोनी

चिराग जैन ने अपनी प्रसिद्ध हास्य रचना “जब सब्जी मंडी में प्रेमिका मिली” से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। इसके बाद उन्होंने रामायण के प्रसंगों पर आधारित ‘पुरुषोत्तम’ श्रृंखला की प्रभावशाली कविताएं प्रस्तुत कीं।
‘भरत का परिताप’ शीर्षक रचना में भरत के क्रोध और मां कैकयी के प्रति उनकी भावनाओं को इस प्रकार व्यक्त किया—

“चाहता हूं उसका वध कर दूं मैं, जिसने ये अत्याचार किया
पर राम त्याग देंगे मुझको, यदि मैंने तुझको मार दिया
चल दिये भरत इतना कहकर, इस द्वार न अब आऊंगा मैं
अपराधिन सुन अब मुख तेरा, देख नहीं पाऊंगा मैं”

इन पंक्तियों के साथ सभागार में गहरा भावनात्मक वातावरण छा गया। उनकी ‘मां’ शीर्षक रचना को भी श्रोताओं ने खूब सराहा।

💐 मनीषा शुक्ला की शालीन श्रृंगारिक कविताएं

दिल्ली की कवयित्री मनीषा शुक्ला ने “मैचिंग वाला पति” और “हर पत्नी की पसंद नोटा” जैसी शालीन हास्य रचनाओं से शुरुआत की। फिर अपनी प्रसिद्ध श्रृंगारिक रचना “करोगे क्या तब भी मुझसे प्यार” को सधे हुए तरन्नुम में प्रस्तुत किया—

“झुर्री वाला चांद नहीं जब दर्पण को भायेगा
नैनों के बदले नैनों से जब चश्मा टकरायेगा
जब आंखों से झांकेगा थोड़ा-थोड़ा उजियारा
आंखों की झांई से हारेगा काजल बेचारा”

उनकी कविताओं ने सभागार में मधुरता और भावनाओं का सुंदर वातावरण बना दिया।

महासमुंद की ‘मेघ-बसंत’ कॉलोनी
महासमुंद की ‘मेघ-बसंत’ कॉलोनी

🌟 प्रमुख अतिथि और गणमान्य उपस्थितियां

कार्यक्रम में रायपुर के पूर्व विधायक और महापौर स्वरूप चंद जैन, महासमुंद के पूर्व विधायक और नपाध्यक्ष डॉ. विमल चोपड़ा, निर्मला श्रीश्रीमाल, रंजना जैन, डॉ. मेमन, हुकुम शर्मा, राजू कोमाखान, हबीब समर (बागबाहरा), गुमानचंद जैन, सुरेन्द्र मानिकपुरी, भागवत जगत, उमेश गिरी गोस्वामी, पूर्व पार्षद महेन्द्र जैन, संजय शर्मा, अधिवक्ता प्रलय थिटे, समाजसेवी पारस चोपड़ा, हेमंत मालू, किशोर चोपड़ा, सुरेश झाबक, शरद मालू, मौलाना याकूब कैसर, श्लेष चन्द्राकर, दिलीप चौरड़िया, मांगीलाल, उमेश शर्मा, तथा श्रीश्रीमाल परिवार के देशभर से आए सदस्यों सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्ध श्रोतागण उपस्थित रहे।

🎇 आयोजन को मिली सर्वसम्मत सराहना

लगभग तीन घंटे चले इस कवि सम्मेलन का समापन राजेश श्रीश्रीमाल के आभार प्रदर्शन के साथ हुआ। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे स्तरीय सांस्कृतिक आयोजनों की निरंतरता बनाए रखने की बात कही।
कार्यक्रम को लेकर पूरे शहर में उत्साह और प्रशंसा का माहौल बना हुआ है — सचमुच, ‘मेघ-बसंत’ कॉलोनी में दिवाली इस बार कविताओं की रौशनी में नहाई रही।

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