ब्रेकिंग न्यूज़: भारत में शुरू हुआ इंडिया फार्मा 2026 का 9वां संस्करण, वैश्विक नेतृत्व और नवाचार पर जोर। नई दिल्ली में आयोजित इस महोत्सव का उद्देश्य फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में भारत की स्थिति को और मजबूत करना है।
इंडिया फार्मा 2026: नवाचार और आत्मनिर्भरता पर जोर
नई दिल्ली में फार्मास्यूटिकल्स विभाग के प्रमुख आयोजन इंडिया फार्मा 2026 का उद्घाटन हो गया है। 13 और 14 अप्रैल को आयोजित इस सम्मेलन में भारतीय चেম्बर्स ऑफ कॉमर्स और भारतीय फार्मास्यूटिकल एलायंस ने सहयोग किया है। इस कार्यक्रम में वैश्विक फार्मास्यूटिकल एवं स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों को आमंत्रित किया गया है।
जेपी नड्डा ने उद्घाटन सत्र की आभासी अध्यक्षता करते हुए कहा कि यह आयोजन भारत के फार्मास्यूटिकल क्षेत्र की बढ़ती वैश्विक प्रासंगिकता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि भारत लंबे समय से "दुनिया की फार्मेसी" के रूप में जाना जाता है, जबकि अब उद्योग बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर और विशेष दवाओं की ओर बढ़ रहा है।
नीति परिवर्तन से अनुसंधान और विनिर्माण को मजबूत करना
उन्हें इस बात की खुशी है कि भारत इस परिवर्तनशील परिदृश्य में न केवल अनुकूलित हो रहा है, बल्कि वैश्विक नेतृत्व भी स्थापित कर रहा है। उन्होंने सरकार की नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया और बायोफार्मा शक्ति पहलों की घोषणा की जिसमें ₹10,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा।
इसके साथ, मंत्री ने Pharma MedTech सेक्टर में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने की जरूरत पर भी जोर दिया। इसमें उद्योग और अकादमी के बीच सहयोग को बढ़ाने और नवाचारात्मक उपचारों के विकास को तेज करने की दिशा में सक्रिय कदम उठाए जा रहे हैं।
बायोफार्मा में भारत का उभरता नेतृत्व
अनुप्रिया पटेल ने बताया कि भारत एक वैश्विक जनरिक नेता से बायोफार्मा नवाचार केंद्र में बदल रहा है। वर्तमान में, भारत वैश्विक जनरिक दवाओं का लगभग 20% उत्पादन करता है और वैश्विक वैक्सीन की मांग का 70% पूरा करता है।
उन्होंने कहा कि आगामी वर्षों में बायोसिमिलर्स का बाजार अनुमानित रूप से 75 अरब डॉलर का होने जा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि नवाचारात्मक दवाएं वैश्विक फार्मास्यूटिकल बाजार मूल्य का लगभग 87% हिस्सा बनाती हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत को नवाचार पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।
मानव संसाधन और AI का महत्त्व
इसके अतिरिक्त, उन्होंने दवा खोज और विकास में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की विकसित होती भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मानव संसाधन को मजबूत करना आवश्यक है, जिससे उन्नत अनुसंधान और नवाचार को समर्थन मिल सके।
मनोज जोशी, फार्मास्यूटिकल्स विभाग के सचिव ने इन सभी पहलुओं पर जोर देते हुए कहा कि नवाचार की गति को तेज करने की आवश्यकता है। इसके लिए सरकारी और औद्योगिक सहयोग को बढ़ाना होगा।
इस सम्मेलन में नीति ढांचे, दवा खोज में एआई, नई तकनीकों और जीवन विज्ञान में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने की रणनीतियों पर चर्चा की जाएगी। यह आयोजन भारत के फार्मास्यूटिकल सेक्टर के भविष्य के रोडमैप को आकार देने और वैश्विक स्वास्थ्य सेवा में भारत की स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद जगाता है।