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अमेरिका के पाक झुकाव के बीच, भारत-रूस हथियार तैनाती समझौता प्रभाव में आया

भारत-रूस के साथ ऐतिहासिक रक्षा समझौता लागू, भू-राजनैतिक समीकरणों में बदलाव

भारत और रूस के बीच एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौते ने कार्यान्वयन शुरू कर दिया है। यह समझौता दोनों देशों के लिए अद्वितीय है, जिससे वे एक-दूसरे के क्षेत्र में सैनिकों, युद्धपोतों और सैन्य विमानों को तैनात कर सकते हैं, यहां तक कि संघर्ष की स्थिति में भी।

RELOS समझौता: क्या है इस नए समझौते का महत्त्व?

भारत-रूस के बीच RELOS (पारस्परिक लॉजिस्टिक्स सहायता का आदान-प्रदान) समझौते पर चर्चा 2018 में शुरू हुई थी। इस पर विस्तृत बातचीत बायिलेटरल समिट में हुई, और अंततः यह समझौता 18 फ़रवरी 2025 को मास्को में हस्ताक्षरित हुआ। रूस ने इसे दिसंबर 2025 में अनुमोदित किया और यह समझौता 12 जनवरी 2026 से लागू हुआ।

यह समझौता दोनों देशों को प्राथमिक रूप से 3,000 सैनिक, 5 युद्धपोत, और 10 सैन्य विमानों को एक दूसरे के क्षेत्र में स्थानांतरित करने की अनुमति देता है। इसके साथ ही, यह संविधि युद्धाभ्यास, प्रशिक्षण, और मानवीय सहायता जैसे मिशनों में सैन्य स्थलों, बंदरगाहों और एयरफील्ड्स तक पारस्परिक पहुंच प्रदान करता है।

भारत-रूस समझौते का हित: किस तरह मिलेगा लाभ?

RELOS समझौता भारत और रूस को महत्वपूर्ण परिचालन लाभ प्रदान करता है। यह भारत को दूरस्थ नौसैनिक तैनातियों में गहरी पहुंच देता है, विशेषकर आर्कटिक और प्रशांत क्षेत्र में। इसके अलावा, यह समझौता भारत को रूस के यामल प्रायद्वीप से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के आयात में सहायक होगा।

इस समझौते की एक प्रमुख विशेषता यह है कि यह भारत के रूसी मूल के उपकरणों के लिए आवश्यक पुर्जों की आपूर्ति को भी सरल बनाता है। इससे भारतीय सैन्य क्षमता को बनाए रखने और सुधारने में मदद मिलेगी, विशेषकर उस समय जब अमेरिका द्वारा रूस के प्रति प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है।

अमेरिका का पाकिस्तान की ओर बढ़ता झुकाव: क्या है RELOS का जवाब?

RELOS समझौता लागू होना अमेरिका के लिए एक विशेष संकेत है। अमेरिकी वकील गॉर्डन सी. चांग ने इसे लेकर बताया कि वाशिंगटन का पाकिस्तान की ओर झुकाव भारत को रूस के करीब ला सकता है। भारत और अमेरिका के बीच भी मिलकर काम करने के लिए एक समझौता है जिसे LEMOA कहा जाता है। लेकिन LEMOA की तुलना में, RELOS समझौता सैनिकों के तैनाती की अनुमति देता है।

इस प्रकार, RELOS समझौता न केवल भारत और रूस के लिए रक्षा सहयोग को और मजबूत करता है, बल्कि यह वैश्विक भू-राजनैतिक परिदृश्य में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत-रूस के बीच का यह समझौता देश की रक्षा नीति में एक नई दिशा देने का कार्य करेगा और लंबे समय से चले आ रहे सहयोग को एक नई ऊँचाई पर पहुंचाएगा।


यह समझौता न केवल दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि यह भारत के लिए एक नई अवसर का द्वार खोलने का भी कार्य करेगा, जो वर्तमान के बदलते वैश्विक राजनीति के परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण है।

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