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कर्नाटका कांग्रेस मंत्री पर दावणगेरे साउथ उपचुनाव में SDPI का समर्थन करने का आरोप

कर्नाटक कांग्रेस में नया विवाद: वरिष्ठ नेताओं पर आरोप

कर्नाटक कांग्रेस में एक नया संकट उत्पन्न हो गया है। वरिष्ठ नेताओं द्वारा एक प्रतिकूल उम्मीदवार का समर्थन करने के आरोपों से पार्टी में हड़कंप मच गया है।

आरोप और राजनीतिक उठापटक

राज्य के मंत्री ज़मीर अहमद खान और दो MLCs, नसीर अहमद तथा जब्बार, पर SDPI के उम्मीदवार अफसर कोडलीपेटे को गुपचुप तरीके से समर्थन देने का आरोप लगा है। इन नेताओं पर उनके चुनाव अभियानों को फंडिंग करने का भी संदेह है।

पार्टी के सूत्रों के अनुसार, कर्नाटक इकाई के कई नेताओं ने इस मुद्दे को कांग्रेस उच्च कमान के सामने उठाया है। ऐसे आसार हैं कि अखिल भारतीय कांग्रेस समिति इन नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है।

टिकट आवंटन में विवाद

यह विवाद तब शुरू हुआ जब 9 अप्रैल के उपचुनाव के लिए टिकट आवंटित किए गए। यह उपचुनाव मौजूदा विधायक शमानूर शिवशंकरप्पा के निधन के कारण आयोजित किया गया है। वोटों की गिनती 4 मई को होगी।

कहा जा रहा है कि इन तीनों नेताओं ने मुस्लिम उम्मीदवार के लिए जोर दिया था, क्योंकि इस निर्वाचन क्षेत्र में अल्पसंख्यक जनसंख्या काफी है। लेकिन पार्टी नेतृत्व ने राज्य मंत्री एसएस मल्लीकरjun के बेटे समर्थ मल्लीकरjun को आधिकारिक उम्मीदवार के तौर पर चुना।

कांग्रेस की संभावित मुश्किलें

सूत्र बताते हैं कि असंतुष्ट नेताओं ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ काम करना शुरू कर दिया और SDPI के उम्मीदवार के लिए कथित तौर पर 10 करोड़ रुपये का फंड उपलब्ध कराया। यदि कांग्रेस उच्च कमान खान और अन्य दो विधायकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करती है, तो कर्नाटक में पार्टी को एक बड़ा अपमान झेलना पड़ सकता है।

यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच बढ़ते तनाव के बीच आया है, जो मुख्यमंत्री की स्थिति को लेकर है। विधानसभा चुनावों में दो साल से भी कम समय बचा है, और इस नवीनतम संकट से कांग्रेस की दूसरी बार सत्ता में आने की संभावनाएँ जटिल हो सकती हैं।

इस समय कांग्रेस ने इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। पार्टी की इस आंतरिक कलह ने पूरी राजनीति में चर्चाओं का माहौल बना दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी उच्च कमान किस प्रकार इस संकट का समाधान करेगी।

निष्कर्ष

कर्नाटक कांग्रेस के लिए यह समय बहुत चुनौतीपूर्ण है। यदि पार्टी अपने अंदरूनी विवादों को सुलझाने में विफल रहती है, तो इसका असर न केवल उपचुनाव पर, बल्कि राज्य में कांग्रेस की भविष्य की राजनीति पर भी पड़ सकता है।

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प्रकाशितकर्ता: अप्रमेया राव
प्रकाशित तिथि: 11 अप्रैल, 2026 11:11 IST

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