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तीन वर्षों से क्यों जल रहा है मणिपुर? मोदी का सवाल

ब्रेकिंग न्यूज़: मणिपुर में हिंसा का नया दौर, समुदायों के बीच बढ़ती खाईं!
मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में दो बच्चों की बम विस्फोट में मौत के बाद फिर से अशांति का माहौल है। राज्य पिछले तीन वर्षों से जातीय संघर्षों की चपेट में है, और हालिया घटनाक्रम ने एक बार फिर से चिंता बढ़ा दी है।

मणिपुर में क्या हुआ?

7 अप्रैल को, बिष्णुपुर जिले के त्रोंग्लाबी आवंग लेइकाई क्षेत्र में एक बम धमाका हुआ, जिसमें 5 और 6 वर्ष के दो बच्चे मारे गए। वे मेइती समुदाय के थे, जबकि उनकी मां घायल हो गईं। उनके पिता सीमा सुरक्षा बल में तैनात हैं, जो एक भारतीय अर्ध-सैन्य बल है।

इस घटना के बाद मेइती नेताओं ने कुकियों पर आरोप लगाया, लेकिन कुकियों ने अपनी संलिप्तता से इनकार किया। इस बीच, फिर से अशांति भड़क गई। विभिन्न संगठनों ने शहरों में बंद का आह्वान किया, और लोग सड़कों पर उतर आए, पुलिस के साथ उनकी झड़पें हुईं। इस दौरान, प्रदर्शनकारियों ने तेल के टैंकरों में आग लगा दी।

पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में कई लोग घायल हुए हैं। बिष्णुपुर को कुकियों के दबदबे वाले चुराचंदपुर से जोड़ने वाली मुख्य सड़क पिछले दो हफ्तों से बंद है। इस संघर्ष में तीन और लोग मारे गए, जब अर्ध-सैन्य बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई।

मणिपुर में आग क्यों लगी है?

मणिपुर, जो कभी एक रजवाड़ा था, ब्रिटिश शासन के अधीन था और 1947 में स्वतंत्र भारत का हिस्सा बना। ऐतिहासिक रूप से, मेइती समुदाय ने मैदानों पर और कुकि तथा नगा समुदाय ने पहाड़ियों में निवास किया है। आजादी के बाद, भूमि कानून बनाए गए ताकि दोनों समुदायों के बीच संतुलन बना रहे। मेइती समुदाय को पहाड़ियों में भूमि खरीदने से रोका गया, वहीं कुकि-जो समुदाय को अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता मिली।

हाल के वर्षों में, मणिपुर में जातीय संघर्ष बढ़ते गए। 2023 में इस संघर्ष ने एक नया मोड़ लिया जब मणिपुर उच्च न्यायालय ने मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता देने का आदेश दिया। इससे कुकि-जो समुदाय में चिंता फैल गई कि नौकरी और शिक्षा के अवसर मेइती समुदाय के लिए भी खुल जाएंगे।

मुख्यमंत्री नोंगथोंबाम बिरें सिंह ने कुकि-जो समुदाय को “गैरकानूनी प्रवासी” और “नशा आतंकवादी” के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे तनाव और बढ़ा।

मणिपुर में शांति क्यों नहीं स्थापित हो रही है?

राजनीतिक विश्लेषक सम्राट चौधरी के अनुसार, मणिपुर की समस्या एक गहरे नासमझी से भरी हुई है। विभिन्न समूह एक-दूसरे द्वारा दावे किए गए क्षेत्रों पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। चौधरी का कहना है कि मणिपुर की स्थिति एक "फ्रीज्ड कॉन्फ़्लिक्ट" बन चुकी है, जहां सामाजिक विद्वेष हमेशा मौजूद रहता है, भले ही वह तुरंत प्रकट न हो।

पत्रकार प्रदीप फांझौबम के अनुसार, कुछ लोग इस अराजकता से लाभान्वित हो रहे हैं। मणिपुर "गोल्डन ट्राइएंगल" पर स्थित है, जो कि म्यांमार के साथ ड्रग ट्रैफिकिंग का महत्वपूर्ण मार्ग है। यहां की अव्यवस्था एक बड़े पैमाने पर नशा व्यापार को बढ़ावा दे रही है।

दिल्ली में सरकार की ओर से इस संकट को नियंत्रण में रखने का भरोसा व्यक्त किया गया है, लेकिन मणिपुर में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। राज्य अब भी आग में जल रहा है, और इसका भविष्य अनिश्चित है।

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