भारतीय हीरा पॉलिश उद्योग का राजस्व 2026-27 के दौरान छह-सात प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद: रिपोर्ट |

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मुंबई, 13 मार्च (भाषा) भारतीय हीरा पॉलिश उद्योग के राजस्व में वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान सालाना आधार पर छह-सात प्रतिशत वृद्धि होने की संभावना है। शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया।
क्रिसिल रेटिंग्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अमेरिकी आयात शुल्क में कटौती होने और घरेलू मांग में स्थिरता के चलते इस उद्योग की आय 15.0-15.5 अरब डॉलर तक हो सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में शुल्क में कटौती और स्थिर घरेलू मांग से भारतीय हीरा पॉलिश उद्योग को वित्त वर्ष 2026-27 में छह-सात प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करने में मदद मिलेगी। यह वृद्धि मुख्य रूप से अमेरिका को होने वाले निर्यात में बढ़ोतरी पर टिकी होगी।

भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते पर सहमति बनने के बाद भारतीय रत्नों और हीरों पर 25 प्रतिशत के जवाबी शुल्क को खत्म कर दिया गया है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पश्चिम एशिया में बढ़ता संघर्ष हीरा पॉलिश उद्योग को इस स्थिति का पूरा लाभ उठाने से रोक सकता है।

लगातार तीन वर्षों की गिरावट के बाद आय में यह उछाल आने की उम्मीद है। मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 में राजस्व में फिर से गिरावट की आशंका है।
चालू वित्त वर्ष में उद्योग का राजस्व 14.0-14.8 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जो शुल्कों में उतार-चढ़ाव और प्रयोगशाला में बने हीरे (एलजीडी) से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण सालाना आधार पर 8-10 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। हालांकि, यह अगस्त 2025 के अनुमान से बेहतर है।
भारतीय हीरा पॉलिश उद्योग अपने राजस्व का 80 प्रतिशत निर्यात से प्राप्त करता है। पिछले वित्त वर्ष में शुल्कों में बड़े बदलावों के कारण हीरा व्यापारियों के लिए समय काफी उथल-पुथल भरा रहा है।

भाषा पाण्डेय प्रेम
प्रेम

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Quds Day || Iranian Ambassador Speech

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Quds Day Iranian Ambassador Speech: नई दिल्ली: आज ईरान और दुनियाभर में फैले ईरानी मूल के लोगों के द्वारा कुद्स दिवस मनाया गया। यह दिन आमतौर पर रामज़ान के अंतिम शुक्रवार को मनाया जाता है। वैसे तो यह मुख्य रूप से ईरान में मनाया जाता है, लेकिन दुनिया के कई देशों में समर्थक रैलियाँ और कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इसका मकसद इजरायली दमन और फलीस्तीन पर हिंसा के खिलाफ आवाम को एकजुट करना होता है।
याद आये सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह ख़ामेनेई
इसी कड़ी में भारत में स्थित ईरानी दूतावास में क़ुद्स दिवस इस बार गमगीन माहौल में मनाया गया। इस मौके पर भारत में मौजूद ईरानी राजदूत मोहम्मद फैथली ने ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह ख़ामेनेई की शहादत को याद करते हुए ईरानियों के लिए उनके मकसद को याद किया।
राजदूत फैथली ने इस मौके पर इजरायल और अमेरिका की जमकर मजम्मत की और उन्हें ‘हत्यारा’ करार दिया। फैथली ने कहा कि, आज क़ुद्स दिवस वे ऐसे समय में मना रहे हैं जब ईरान और उसके प्रभाव क्षेत्र में आने वाले सभी देशों की स्थिति अत्यंत जटिल और बेहद चिंताजनक है।

क्या कहा ईरानी राजदूत ने?
Quds Day Iranian Ambassador Speech: ईरानी राजदूत मोहम्मद फैथली ने कहा, “वह व्यक्ति जिसने अपने जीवन की अंतिम सांस तक यह घोषित किया कि फिलिस्तीन के उत्पीड़ित लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा होना ही उसके जीवन का परम उद्देश्य है और इस मार्ग पर वह अपने अंतिम क्षण तक अडिग रहा। कुद्स दिवस केवल एक राजनीतिक कथा नहीं है; यह जीवित मनुष्यों की जीवंतता और अस्तित्व का प्रमाण है। आज हम कुद्स दिवस ऐसे समय में मना रहे हैं जब ईरान और उसके प्रभाव क्षेत्र में आने वाले सभी देशों की स्थिति अत्यंत जटिल और बेहद चिंताजनक है।”

स्कूल पर हुए हमले के लिए बताया जिम्मेदार
मोहम्मद फैथली ने आगे जिक्र किया कि, “यह आक्रमण तब शुरू हुआ जब संयुक्त राज्य अमेरिका के समर्थन से इजरायल ने हमारे राष्ट्र पर एक हिंसक आक्रमण किया। इसका दुखद परिणाम न केवल क्रांति के एक नेता की शहादत थी, बल्कि देश के कई प्रमुख राजनीतिक, सैन्य और रक्षा नेताओं का भी नुकसान था, जिन्होंने शहादत का गौरव प्राप्त किया। युद्ध के इन सभी भयावह वृत्तांतों के बीच, एक विशेष रूप से दुखद और हृदयविदारक घटना सामने आती है।”
Quds Day Iranian Ambassador Speech: फैथली ने कहा कि, “इन उत्पीड़कों द्वारा ईरान के एक स्कूल पर किया गया हमला, जिसमें 160 से अधिक छात्राओं की हत्या कर दी गई। ये निर्दोष बच्चियां छात्राएं थीं जो बेहतर भविष्य बनाने की उम्मीद में पढ़ने आई थीं, लेकिन वे सत्ता हथियाने वाले ज़ायोनी शासन और संयुक्त राज्य अमेरिका की हिंसा और क्रूरता का शिकार हो गईं। इन बच्चियों के हत्यारे वही लोग हैं जिन्होंने फ़िलिस्तीन की धरती पर गाज़ा में 75,000 निर्दोष महिलाओं और बच्चों को शहीद कर दिया है।”

#WATCH | Delhi: Iran’s Ambassador to India, Mohammad Fathali, says, “He who, until the very last breaths of his life, declared that standing in solidarity with the oppressed people of Palestine was the absolute purpose of his existence—and upon this path, he remained steadfast… pic.twitter.com/l8JMTJZmqJ
— ANI (@ANI) March 13, 2026

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Aditi Hundia Latest Viral Image

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Aditi Hundia Latest Image: नई दिल्ली: सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, एंटरप्रेन्योर और मॉडल अदिति हुंडई पिछले कुछ दिनों से अपने रिलेशनशिप को लेकर चर्चा में बनी हुई है। ऐसा इसलिए क्योंकि, अदिति किसी और को नहीं बल्कि भारतीय क्रिकेटर ईशान किशन को डेट कर रही है। हाल ही में अहमदाबाद में टी20 वर्ल्ड कप का फ़ाइनल मुकाबला खेला गया। इस मुकाबले में टीम इंडिया ने शानदार जीत दर्ज करते हुए लगातार दूसरी बार वर्ल्ड कप की ट्रॉफी अपने नाम की।
चर्चा में हैं अदिति हुंडई?
वहीं टी20 वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में ईशान और टीम इंडिया को चीयर करने के लिए नरेंद्र मोदी स्टेडियम पहुंची थी। मैदान से ईशान और अदिति की केमिस्ट्री इनके प्यार की गवाही दे रही थी। ईशान किशन संग नाम जुड़ने के बाद हर किसी नजरें अदिति पर हैं। फैन्स उनके पल-पल की खबर जानना चाह रहे हैं। वहीं अदिति भी अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपनी तस्वीरें शेयर कर रही है। इन तस्वीरों के जरिए उन्होंने लाइफ के अनस्क्रिप्टेड पलों की झलक शेयर की है।
अदिति ने शेयर की तस्वीरें
एक तस्वीर में अदिति व्हाइट टॉप और ब्लैक पोल्का डॉट स्लिम फिट स्कर्ट में वाशरूम से सेल्फी लेती दिख रही हैं। दूसरी फोटो में वो बेड पर हाथों में वर्ल्ड कप ट्रॉफी पकड़े हुए दिख रही हैं, जिससे साफ जाहिर है कि ईशान ने जीत की खुशी गर्लफ्रेंड के साथ शेयर की है। अदिति की तस्वीरों से साफ जाहिर है कि उन्हें उनके बॉयफ्रेंड ईशान पर गर्व पर है। ईशान ने T20 वर्ल्डकप फाइनल में शानदार परफॉर्मेंस देकर जनता का दिल जीत लिया था। चर्चा है कि ईशान और अदिति जल्द ही शादी के बंधन में बंधने वाले हैं। पर ईशान के दादा-दादी का कहना है कि ईशान अभी अपने करियर पर फोकस कर रहे हैं।

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निशानेबाज सम्राट और सुरुचि,धावक गुलवीर और पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी प्रमोद टॉप्स कोर समूह में शामिल

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नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) उभरते पिस्टल निशानेबाज सम्राट राणा और सुरुचि सिंह, एशियाई स्वर्ण पदक विजेता लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह और विश्व चैंपियन पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी प्रमोद भगत उन आठ खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्हें हाल में प्रदर्शन के आकलन के बाद ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम’ (टीओपीएस) के कोर ग्रुप में शामिल किया गया है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, बैडमिंटन स्टार एच एस प्रणय, पूर्व एशियाई स्वर्ण पदक विजेता राइफल निशानेबाज दिव्यांश सिंह पंवार और पहलवान दीपक पूनिया जैसे प्रमुख खिलाड़ियों को ‘प्रदर्शन के अपेक्षित मापदंडों’ को पूरा नहीं कर पाने के कारण कोर समूह से हटा दिया गया है।
‘टॉप्स’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एन. एस. जोहल की अध्यक्षता में ‘मिशन ओलंपिक सेल’ (एमओसी) की 169वीं बैठक में सूची में फेरबदल किया गया।

सम्राट ने जहां पिछले साल 10 मीटर एयर पिस्टल की व्यक्तिगत और टीम स्पर्धाओं में विश्व चैंपियन का खिताब जीता, वहीं सुरुचि ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार चार विश्व कप स्वर्ण पदक अपने नाम किए।

ओलंपिक के पूर्व स्वर्ण पदक विजेता प्रमोद ने इस साल की शुरुआत में अपना छठा विश्व खिताब जीता। पोलियो के कारण बाएं पैर में विकार की दिव्यांगता का शिकार यह 37 वर्षीय खिलाड़ी लगातार तीन डोपिंग परीक्षणों में अनुपस्थित रहने के उल्लंघन के लिए तीन साल के निलंबन के बाद पिछले साल प्रतियोगिता में लौटा है।
इस सूची में शामिल होने वाले एक अन्य खिलाड़ी इस वर्ष के एशियाई रजत पदक विजेता राइफल निशानेबाज नीरज कुमार हैं। हालांकि, पूर्व एशियाई स्वर्ण पदक विजेता शिव नरवाल को सूची में हुए कुछ बदलावों और नए नामों के शामिल होने के बाद 56 सदस्यीय मुख्य समूह से बाहर कर दिया गया है।
पिछले साल गुलवीर के शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें विकास स्तर (डेवलपमेंटल लेवल) से मुख्य स्तर पर पदोन्नत किया जाना बिल्कुल उचित था। वे 5000 मीटर और 10,000 मीटर दोनों स्पर्धाओं में राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक भी हैं।
उन्होंने पिछले साल एशियाई चैंपियनशिप में दोनों स्पर्धाओं में शीर्ष स्थान हासिल कर इतिहास रच दिया था।
इसके साथ ही बैडमिंटन मिश्रित युगल जोड़ी तनीशा क्रास्टो और ध्रुव कपिला तथा पिछले साल विश्व चैंपियनशिप में 57 किलोग्राम फेदरवेट वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाली मुक्केबाज जैस्मीन लंबोरिया को भी विकासात्मक स्तर से मुख्य स्तर पर पदोन्नत किया गया है।
टॉप्स कोर समूह के खिलाड़ियों को 50,000 रुपये का मासिक भत्ता मिलता है। इसके साथ ही उन्हें विदेशों में प्रशिक्षण और प्रतियोगिता के दौरान प्रतिदिन 25 डॉलर भी मिलते हैं।
टॉप्स की विकास समूह सूची में 22 मुक्केबाजों को शामिल किया गया है, जिनमें 14 महिलाएं हैं। इनमें विश्व कप स्वर्ण पदक विजेता परवीन (महिला 60 किलोग्राम), अरुंधति (महिला 70 किलोग्राम) और हितेश गुलिया (पुरुष 70 किलोग्राम) सहित अन्य मुक्केबाज शामिल हैं।
सूत्र ने बताया, ‘‘इसका उद्देश्य भविष्य के ओलंपिक खेलों के लिए मुक्केबाजों की एक मजबूत टीम तैयार करना है, और विकास समूह में बड़ी संख्या में मुक्केबाजों को शामिल करना एक महत्वपूर्ण कदम होगा।’’
वर्तमान में 130 खिलाड़ियों की विकास सूची में 13 निशानेबाजों को भी शामिल किया गया है।
विकास समूह के खिलाड़ियों को 25,000 रुपये का भत्ता और विदेश में प्रशिक्षण तथा प्रतियोगिताओं के दौरान अतिरिक्त 25 डॉलर दिए जाते हैं।
कोर और विकास समूह दोनों के खिलाड़ियों का मूल्यांकन कम से कम छमाही आधार पर किया जाता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनका प्रदर्शन, फिटनेस और स्तर निर्धारित मानदंडों को पूरा करते हैं।
भाषा आनन्द नमिता
नमिता

Chhattisgarh Afim Cultivation Update || छत्तीसगढ़ मे अफीम की खेती

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सस्पेंड
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Chhattisgarh Afim Cultivation Update: दुर्ग: जिले के समोदा में सामने आए अफीम की अवैध खेती के मामले में जिला कलेक्टर अभिजीत सिंह की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। इस मामले में जिला कलेक्टर ने कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू को सस्पेंड कर दिया है। इस कार्रवाई से पहले एकता साहू, फसल सर्वेयर शशिकांत साहू और ग्राम समोदा की पटवारी अनिता साहू से 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया था।
जारी किया था शोकॉज नोटिस
दरअसल जिस खेत में अफीम की फसल लहलहा रही थी, उसे कृषि विभाग के अधिकारी लगातार मक्का की फसल बताकर रिपोर्ट करते रहे। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अभिजीत सिंह ने तीन अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
सामने आया बड़ा फर्जीवाड़ा
Chhattisgarh Afim Cultivation Update: जांच के दौरान सबसे बड़ी गड़बड़ी कृषि विस्तार अधिकारी के स्तर पर सामने आई थी। दस्तावेजों की जांच में पता चला कि विनायक ताम्रकार के भाई विमल ताम्रकार के जिस खेत को कृषि विस्तार अधिकारी ने मक्का फसल का प्रदर्शन प्लॉट बताया था, वहां वास्तव में धान की खेती हो रही थी। इससे यह संकेत मिलता है कि शासन को गुमराह करते हुए जानबूझकर खेत का स्थान बदला गया। इतना ही नहीं, प्रदर्शन प्लॉट के नाम पर राज्य शासन से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि भी जारी कर दी गई।

मक्के के नाम पर अफीम की खेती
नियम के अनुसार, प्रदर्शन प्लॉट की फोटो उसी किसान के साथ ली जानी चाहिए जिसे सरकारी लाभ मिलना है। लेकिन रिपोर्ट में धान की जगह मक्का के खेत के पास एक अन्य किसान को खड़ा कर फोटो खींचकर अपलोड कर दी गई। जांच में यह भी सामने आया कि जिस खेत की मक्का की फोटो लगाई गई उसके ठीक पीछे अफीम की खेती की जा रही थी।

डिजिटल सर्वे में भी सामने आई गड़बड़ी
Chhattisgarh Afim Cultivation Update: फसलों के सर्वे के लिए नियुक्त फसल सर्वेयर शशिकांत साहू ने सितंबर 2025 में खेत का डिजिटल सर्वे किया था। इसके बाद उसने फोटो गिरदावरी सॉफ्टवेयर में जानकारी अपलोड की। इसमें उसने खसरा नंबर 309 को पड़ती भूमि और खसरा नंबर 310 में धान की फसल होने की जानकारी दर्ज की, जबकि जांच में पाया गया कि इन्हीं दोनों खसरा नंबरों पर अफीम की खेती की जा रही थी।

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CG Govt School Teacher News

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रायपुर: CG Govt School Teacher News: छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है। राज्य में कई स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात के नियम का पालन नहीं हो पा रहा है। इस बात को स्वयं शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने विधानसभा में स्वीकार किया है।
स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात का नियम पूरा नहीं (Chhattisgarh teacher student ratio)
Chhattisgarh Govt Teacher Shortage: विधानसभा में ध्यानाकर्षण के दौरान मंत्री ने बताया कि नियम के अनुसार हर 30 छात्रों पर एक शिक्षक होना जरूरी है, लेकिन प्रदेश के सभी स्कूलों में यह व्यवस्था फिलहाल पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है। यह जानकारी कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह के सवाल के जवाब में दी गई। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या राज्य के हर स्कूल में शिक्षक-छात्र अनुपात के नियम का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में मानी कमी (teacher shortage Chhattisgarh schools)
CG Govt School Teacher News: राघवेंद्र सिंह ने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार इस संबंध में कोई आदेश जारी करेगी और शिक्षकों की नई भर्ती की जाएगी ताकि सभी स्कूलों में निर्धारित अनुपात लागू किया जा सके। मंत्री ने जवाब में स्वीकार किया कि फिलहाल सभी स्कूलों में यह मानक पूरा नहीं हो पाया है। हालांकि सरकार इस दिशा में स्थिति सुधारने के लिए प्रयास कर रही है।

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Rajiv Shukla Speech

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देश-दुनिया राज्य की खबरे बिहार विधानसभा चुनाव 2025

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नई दिल्ली: Rajiv Shukla Speech कांग्रेस के राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला ने शुक्रवार को राज्यसभा में किसानों से जुड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि ‘मैं सदन में देश के महत्वपूर्ण विषय पर ध्याकार्षित करना चाहता हूं। कृषि बीमा योजना या फसल बीमा योजना से का नाम आप सब लोगों ने सुना होगा। लेकिन आजकल बीमा योजना के जो हाल हुए हैं। उसमें सरकार को जरूर ध्यान देना चाहिए। किसानों को कुछ नहीं मिल रहा है। ये योजना बड़े ही उद्देश्य के साथ शुरू की गई थी। उन्होंने कहा कि बीमा कंपनियां किसानों को सही तरीके से व पूरा मुआवजा नहीं दे रही हैं। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है, जो देश के करोड़ों किसानों से जुड़ा है।
Rajiv Shukla Speech in Rajya Sabha उन्होंने कहा कि ‘कई राज्यों से जो उदाहरण सामने आए हैं, वे इस योजना की गंभीर खामियों को उजागर करते हैं। महाराष्ट्र में किसानों की फसल खराब हुई और जब मुआवजा आया तो किसी के खाते में 21 रुपये, किसी के खाते में 8 रुपये और कुछ किसानों के खाते में तो केवल 3 रुपये ही आए।’
उन्होंने राज्यसभा में कहा कि ‘वह यह पूछना चाहते हैं कि 3 रुपये से किसान क्या करेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का नाम तो हम सबने सुना है। इसे बड़े उद्देश्य के साथ शुरू किया गया था। कहा गया था कि किसान कम प्रीमियम देकर सूखा, बाढ़, ओला-बारिश, कीट-रोग जैसी प्राकृतिक आपदाओं से अपनी फसल को सुरक्षित कर सकेंगे। संकट की घड़ी में उन्हें आर्थिक सहारा मिलेगा और उनकी आय स्थिर रहेगी।’

सांसद ने कहा कि ‘इसी तरह उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में आई बाढ़ में धान की फसल डूब गई। किसानों ने बीमा का दावा किया, मुआवजे के नाम पर किसी के खाते में 3 रुपए 76 पैसे और किसी के खाते में 2 रुपए 72 पैसे आए।’

उन्होंने कहा कि ‘वह सरकार से पूछना चाहते हैं कि क्या किसान 5 रुपए में नई फसल बो पाएगा। क्या 3 रुपए में डीजल आएगा। क्या पौने 3 रुपए में कीटनाशक मिलेगा। या फिर किसान उन पैसों को फ्रेम करवाकर रख ले कि यह उसका बीमा सुरक्षा कवच है।’
राजीव शुक्ला ने कहा कि ‘बीमा का अर्थ होता है संकट के समय सहारा। लेकिन यहां स्थिति ऐसी है कि किसान सोचता होगा कि इतने पैसों में तो मोबाइल रिचार्ज भी नहीं होता, फसल कैसे होगी। समस्या केवल रकम की नहीं है। कई जगह फसल का फिजिकल वेरिफिकेशन भी समय पर नहीं होता। अधिकारी खेतों में तब पहुंचते हैं जब फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी होती है और दोबारा बुआई का समय आ जाता है। कई बार पोर्टल बंद हो जाता है, सर्वर डाउन हो जाता है और किसान चक्कर लगाते-लगाते चप्पल घिस देता है, लेकिन उतना मुआवजा भी उसे नहीं मिलता। ऊपर से एरिया एप्रोच के नाम पर औसत निकाल दिया जाता है। अगर पूरे क्षेत्र का औसत ठीक बता दिया गया, जिस किसान की फसल पूरी तरह चौपट हो गई, उसे भी कह दिया जाता है कि आपके इलाके में तो सब सामान्य है।’
‘किसान डेढ़ से दो प्रतिशत प्रीमियम देता है और बाकी पैसा सरकार देती है, यानी जनता का पैसा। इस तरह बीमा कंपनियों को हजारों करोड़ रुपए का प्रीमियम मिलता है। जो साल सामान्य होता है तब दावे भी कम आते हैं और कंपनियों का लाभ बढ़ता रहता है। लेकिन जब किसान की बारी आती है, तो उसके हिस्से में 3 रुपये, 5 रुपये जैसे मुआवजे आते हैं। कभी-कभी तो किसानों के खातों से बिना स्पष्ट जानकारी के प्रीमियम भी कट जाता है। यानी जोखिम किसान और सरकार उठाएं लेकिन लाभ कोई और ले जाए, यह व्यवस्था न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि बीमा दावों के निपटान और भुगतान की स्पष्ट समयसीमा तय की जाए। फसल नुकसान का समय पर और पारदर्शी सर्वेक्षण सुनिश्चित किया जाए।’

देश में कृषि बीमा योजना और प्रधानमंत्री बीमा योजना से किसानों को कोई सहारा नहीं मिल रहा है। तमाम ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां किसानों को मुआवजे में 2 रुपए, 3 रुपए, 8 रुपए और 21 रुपए मिले।
सवाल है-
• किसान इस रकम का क्या करें?• क्या किसान इसका फोटो फ्रेम कराकर रख लें?
ऐसे… pic.twitter.com/39BfWGLnmr
— Congress (@INCIndia) March 13, 2026

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Samosa Kachori Price

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Samosa Kachori Price: राजधानी में महंगा हुआ स्ट्रीट फूड, कमर्शियल सिलेंडर की स्पलाई बाधित होने पर दिखा असर, जानिए अब कितने एक प्लेट समोसा और कचौरी के लिए कितना देना होगा? Image: AI Generated
भोपाल: Samosa Kachori Price मिडिल ईस्ट-एशिया में युद्ध की स्थितियों के चलते कई देशों में पेट्रोल-डीजल और गैस की संकट की स्थिति बन गई है। वहीं, भारत में भी गैस सिलेंडर की किल्लत देखने को मिल रही है। सरकार ने कर्मिशयल सिलेंडर की सप्लाई को कम कर घरेलू सिलेंडर की सप्लाई में तेजी लाने का फैसला किया है, जिसके चलते कई शहरों में रेस्टॉरेंट और होटल बंद होने की कगार पर आ गए हैं। इसी बीच खबर आ रही है कि राजधानी भोपाल में स्ट्रीट फूड के दाम में दुकानदारों ने बढ़ोतरी कर दी है।
स्ट्रीट फूड के दाम में पांच रुपए की बढ़ोतरी
Samosa Kachori Price मिली जानकारी के अनुसार कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई बाधित होने के चलते बाजार में अब असर दिखने लगा है। स्ट्रीट फूड वेंडर्स ने खाने-पीने की चीजों के दाम में बढ़ोतरी कर दी है। बताया जा रहा है कि कचौड़ी, समोसा और अन्य स्ट्रीट फूड के दामों में इज़ाफ़ा किया गया है। फास्ट फूड आइटम्स जैसे चाउमीन, बर्गर और अन्य स्नैक्स की कीमतों में भी करीब 5 रुपए तक की बढ़ोतरी कर दी गई है।
दुकानदारों ने कहा और बढ़ेंगे दाम
दुकानदारों की मानें तो उन्हें सिलेंडर महंगे दामों में खरीदना पड़ रहा है, जिसकी वजह से लागत बढ़ गई है। ऐसे में घाटे से बचने के लिए मजबूरी में खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ाने पड़े हैं। अगर कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में स्ट्रीट फूड के दामों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

घरेलू रसोई गैस की कोई कमी नहीं: सीएम मोहन यादव
दूसरी ओर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वर्तमान में मिडिल ईस्ट-एशिया में युद्ध की स्थितियों के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मंत्रीगण सजग हैं। नागरिकों को चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है, केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर कालाबाजारी रोकने के लिए पूरे प्रबंधन किए गए हैं। नागरिकों को रसोई गैस संबंधी परेशानी नहीं होगी। प्रदेश में घरेलू रसोई गैस सहित पीएनजी और सीएनजी की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

एलपीजी उत्पादन में 25 प्रतिशत की वृद्धि
उन्होंने आगे कहा कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक गतिविधियों के कारण से पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस के संबंध में वर्तमान स्थितियों में अभी तक अधिकांश कच्चे तेल की आपूर्ति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होती थी, जिसे परिवर्तित कर अन्य स्थानों से भी कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। साथ ही देश की रिफाइनरी उच्च क्षमता पर कार्य कर रही है। प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिये वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता के माध्यम से खरीदी प्रक्रिया जारी है। घरेलू पीएनजी और सीएनजी की आपूर्ति बिना कटौती के हो रही है। रिफाइनरी को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे वर्तमान में एलपीजी उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि भी हुई है।
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ईरान-अमेरिका संघर्ष लंबे समय तक संघर्ष में बदल गया

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ईरान के नए नेता अयातुल्ला सैय्यद मोजतबा खामेनेई (फाइल फोटो)

ईरान के नए नेता अयातुल्ला सैय्यद मोजतबा खामेनेई के गुरुवार को पहले सार्वजनिक संदेश में आश्चर्यजनक संदेश यह है कि “होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रहना चाहिए।” सात शब्दों में, उन्होंने सभी उम्मीदों को झुठलाते हुए राष्ट्रपति ट्रम्प पर चुनौती दी कि वह नीति में निरंतरता का विकल्प चुनेंगे। न केवल ट्रम्प युद्ध के लिए कोई समयसीमा तय करने की स्थिति में नहीं हैं, बल्कि मोजतबा ने प्रभावी ढंग से अगले चरण की घोषणा की है – क्षरण का युद्ध। उन्होंने कहा, “लोगों की इच्छा प्रभावी रक्षा जारी रखने की है।”

अमेरिकियों के सूचना आहार को निर्देशित करने की ट्रम्प की शैली के बिल्कुल विपरीत, मोजतबा के बयान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ईरानी लोगों की केंद्रीय भूमिका के लिए समर्पित था। ईरान के लिए यह युद्ध कोई “भ्रमण” नहीं है; न ही “जीत” को खेल की तरह कॉफी चम्मच से मापा जाता है, जहां स्कोर एक समयरेखा में विजेता की घोषणा करता है।

सीएनएन के निक वॉल्श ने आज अपने शानदार निबंध की शुरुआत इन शब्दों के साथ की: “अमेरिकी सरकार की बहादुरी और गेमर-शैली के वीडियो… एक कठिन क्षण की असाधारण गंभीरता को झुठलाते हैं: अमेरिकियों को कितनी दूर तक जाना है, न केवल ‘हम जीत गए’ घोषित करने के लिए, जैसा कि ट्रम्प ने बुधवार को किया था,… बल्कि ईरान को ऐसा व्यवहार करने के लिए मजबूर करना जैसे कि उसे हार का सामना करना पड़ा हो?

“ट्रम्प अब आधुनिक युद्ध के सबसे पुराने जाल में फंस गए हैं – उनका मानना ​​​​है कि एक तेज, सर्जिकल सैन्य अभियान से त्वरित, स्थायी राजनीतिक दोष निकलेंगे… सेना शुरू में जो भी बल लागू करने में विफल रहती है या सफल होती है, जिन लोगों पर वह हमला कर रही है, उनमें अपनी भूमि और सम्मान की रक्षा करने की अधिक प्रतिबद्धता होती है।”

वास्तव में, दुनिया इस पर ध्यान दे रही है – जिसमें भारत के प्रधान मंत्री भी शामिल हैं। ईरान पर हमले से तीन दिन पहले तेल अवीव में प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ बातचीत करने और नेसेट में एक घमंडी भाषण के दौरान, राजनीतिक इस्लाम के साथ उनके हमेशा के युद्धों में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का वादा करने के बाद, मोदी को एक कठोर जागृति हुई और उन्होंने कल राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान को फोन करके शांति का आग्रह किया, यहां तक ​​​​कि ईरानी मिसाइलों ने इज़राइल राज्य के दिल को भेद दिया और नेतन्याहू छिप गए।

मोजतबा के बयान से, प्रतिरोध की धुरी, आईआरजीसी के साथ उनके मजबूत संबंध और हिजबुल्लाह के साथ उनके विशेष रूप से करीबी रिश्ते से पता चलता है कि उनका आगे बढ़ना एक महत्वपूर्ण क्षण का संकेत देता है, जो टकराव को क्षीणन के चरण में प्रवेश करने का संकेत देता है, अस्थायी सैन्य वृद्धि से संचालन, निरोध और सहनशक्ति के निरंतर पैटर्न में स्थानांतरित हो रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का मोजतबा का इशारा अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के नए चरण की प्रमुखता है जहां यह सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। लेकिन उन्होंने आगे कहा, “मुझे एक बात पर जोर देना चाहिए कि, किसी भी स्थिति में, हम दुश्मन से मुआवजा प्राप्त करेंगे। यदि वह इनकार करता है, तो हम उसकी संपत्ति से उस सीमा तक ले लेंगे, जितना हम उचित समझेंगे, और यदि यह संभव नहीं है, तो हम उसी सीमा तक उसकी संपत्ति को नष्ट कर देंगे।”

न्याय और प्रतिरोध की अवधारणा जिसने 1979 की ईरानी इस्लामी क्रांति को आधार दिया, वह फिर से केंद्र में आ रही है। मोजतबा का दृष्टिकोण पारंपरिक शिया आख्यानों, साम्राज्यवाद-विरोधी आख्यानों और जमीनी स्तर की लामबंदी को जोड़ता है। प्रतिरोध के तीन केंद्रीय सिद्धांत “साम्राज्यवादी अहंकार”, सांस्कृतिक प्रतिरोध और स्वायत्तता के खिलाफ संघर्ष हैं।

कहीं हम भूल न जाएं, मोजतबा ने राष्ट्रपति (2005-2013) के रूप में महमूद अहमदियाद के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिन्होंने न केवल एक रूढ़िवादी, लोकलुभावन “सिद्धांतवादी” एजेंडे का समर्थन किया, जिसने इस्लामी मूल्यों पर जोर दिया, बल्कि आक्रामक रूप से देश के परमाणु कार्यक्रम का बचाव किया। कोई गलती न करें, अगर धक्का-मुक्की हुई तो मोजतबा की निगरानी में ईरान परमाणु बम की ओर बढ़ने में संकोच नहीं करेगा।

धोखे से युक्त समझौते की ट्रम्प की कला स्पष्ट रूप से पुरानी हो गई है। बड़ा सवाल यह है कि क्या मोजतबा जिनेवा में हुए समझौते के सभी ढांचे को विरासत में लेना चाहेगा, जिसमें तेहरान ने समझौते का अविश्वसनीय रवैया दिखाया था।

आइए हम जिनेवा में हुए समझौते पर अच्छी तरह अमल करें। ओमान के विदेश मंत्री बद्र बिन हमद अल बुसैदी ने बाद में सीबीएस न्यूज के साथ एक ऐतिहासिक साक्षात्कार में कहा। राष्ट्र का सामना करें मॉडरेटर मार्गरेट ब्रेनन ने इसका खुलासा किया सफलता की रूपरेखा जिनेवा तक पहुंची:

  • ईरान के पास कभी भी ऐसी परमाणु सामग्री नहीं होगी जिससे बम बनाया जा सके – शून्य भंडारण पर आधारित प्रतिज्ञा, संवर्धन तर्क को अप्रासंगिक बना देती है;
  • ईरान की शून्य संचय, शून्य भंडारण और आईएईए द्वारा पूर्ण और व्यापक सत्यापन पर सहमत होने की इच्छा;
  • समझौता कि किसी भी संवर्धित यूरेनियम को न्यूनतम संभव स्तर तक मिश्रित किया जाएगा, एक तटस्थ स्तर, एक प्राकृतिक स्तर तक, जिसका अर्थ है ईंधन में परिवर्तित किया जाएगा – और वह ईंधन अपरिवर्तनीय होगा; और,
  • इस्फ़हान जैसे संवेदनशील स्थलों तक IAEA की पूर्ण पहुंच, जिसमें प्रक्रिया के कुछ बिंदु पर अमेरिकी निरीक्षक भी शामिल हैं।

मंत्री अल्बुसैदी के आकलन में, “बड़ी तस्वीर यह है कि एक सौदा हमारे हाथ में है”, यदि केवल वार्ताकारों को आईएईए के प्रमुख के साथ अगले सप्ताह वियना के लिए निर्धारित तकनीकी वार्ता के लिए आगे बढ़ने की अनुमति दी जाती है; “यहां वास्तव में, वास्तव में, एक वास्तविक मौका है, वास्तव में इस मुद्दे को कूटनीतिक रूप से सुलझाने का एक बहुत ही ऐतिहासिक अवसर।”

लेकिन इतिहास ने खुद को दोहराया. ओमानी मंत्री द्वारा सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का सिर काटने की बात कहने के अगले दिन अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त रूप से ईरान के खिलाफ आक्रामक अभियान शुरू किया। मोजतबा, जिसने एक ही हमले में अपने पिता, मां, पत्नी, बहन, भतीजी और बहनोई को खो दिया था – लेकिन चोटों के बाद मौत से बच गया – संभवतः कैसे भूल सकता है और माफ कर सकता है?

निस्संदेह, ट्रम्प ने ईरान को नष्ट करने और मध्य पूर्व की भू-राजनीति से उसे मिटाने की नेतन्याहू की तीव्र इच्छा के सामने घोर आत्मसमर्पण करके इसे उड़ा दिया।क्षरण का युद्ध वह आखिरी चीज़ है जिसकी ट्रम्प को उम्मीद थी। जैसे-जैसे दिन हफ्तों में बदल रहे हैं और अमेरिका ने अधिक विमान खो दिए हैं, जैसे-जैसे खरबों डॉलर की सैन्य संपत्ति का विनाश हो रहा है, और सैनिकों के शव ताबूतों में और भी अधिक संख्या में वापस आ रहे हैं, ट्रम्प को अपने राष्ट्रपति पद को बचाने के लिए कुछ बहुत कठिन सवालों का जवाब देना होगा।

और, निश्चित रूप से, नेतन्याहू को प्रतिशोध के निरंतर भय में भी रहना होगा। मोजतबा ने प्रतिज्ञा की कि ईरान शहीदों के खून के लिए न्याय की अपनी खोज को कभी नहीं छोड़ेगा, और “बदला क्रांतिकारी नेता की शहादत तक सीमित नहीं है” – उनके पिता।

मोजतबा ने नए मोर्चे खोलने की संभावना का संकेत दिया. उनके शब्दों में, “नए मोर्चे खोलने के संबंध में भी अध्ययन हुए हैं जहां दुश्मन के पास सीमित अनुभव है और वह बेहद कमजोर है। इन मोर्चों को सक्रिय करना मौजूदा युद्ध की स्थिति और देश के हितों पर निर्भर करेगा।”

एक उद्दंड संदेश में मोजतबा ने कहा, “हम प्रतिरोध मोर्चे के देशों को अपना सबसे अच्छा दोस्त मानते हैं। प्रतिरोध का कारण इस्लामी क्रांति के मूल्यों का एक अविभाज्य हिस्सा है। इन देशों की एकजुटता ज़ायोनी साजिश को तोड़ने का रास्ता छोटा कर देती है।”

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