सम्मेलन में मंत्री डॉ डहरिया ने आगे कहा कि महात्मा गाँधी ने जो ग्रामीण और आत्मनिर्भर भारत का स्वप्न देखा था उसे देश के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी ने आगे बढ़ाया। पंचवर्षीय योजना लागू करने के साथ बड़े उद्योगों की स्थापना, अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में कार्य किया गया। प्रधानमंत्री  राजीव गाँधी ने पंचायती राज व्यवस्था लाकर पंचायतों को कई अधिकार देकर अधिक सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

। इसी तरह मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल के नेतृत्व में ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ छत्तीसगढ़ में पंचायतों को मजबूत और सशक्त बनाने की दिशा में कार्य की जा रही है। पंचायतों के अधिकारों में  कभी कमी नहीं की गई है। मंत्री डॉ डहरिया ने कहा कि सरपंचों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी, उन्हें पंचायती राज अधिनियम के साथ अपने अधिकारों की भी जानकारी होनी चाहिए। गाँव के विकास के साथ गाँव के लोगों के प्रति समर्पित सोच होनी चाहिए तभी हमारा गाँव आत्मनिर्भर और सशक्त बन पाएगा।

मंत्री डॉ डहरिया ने सरपंचों को संबोधित करते हुए कहा कि अपने ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए समय पर कर वसूली कर आमदनी बढ़ाए और जनहित के कार्यों में सबकी सहभागिता हो इसके लिए ग्रामीणों को  जागरूक करें। उन्होंने कहा कि जो सुविधाएं शासन द्वारा दी जा रही है, उसका बेहतर ढंग से उपयोग कर अपने गाँव को आदर्श बनाए। उन्होंने कहा कि विगत ढाई साल में पंचायतों को गाँव के विकास के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध कराई गई है। इसी का परिणाम है कि गाँव-गाँव में सड़क, नाली, सामुदायिक भवन, आंगनबाड़ी केंद्र भवन, स्कूल और उपस्वास्थ्य केंद्र भवन की सुविधाएं मिली है।

मंत्री डॉ डहरिया ने कहा कि पंचायतों को असीमित अधिकार प्राप्त है। उन्हें शासन से प्राप्त राशियों का इस्तेमाल गाँव के विकास की प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने गाँव के विकास के लिए प्राथमिकता के आधार पर प्रस्ताव देने और सरपंचों की माँग पर हर संभव सहयोग करने की बात कही।
कार्यक्रम में सरपंच संघ के अध्यक्ष श्री गोपाल धीवर, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री खिलेश्वर देवांगन,नगर पालिका परिषद अध्यक्ष श्री चंद्रशेखर चंद्राकर सहित अलग-अलग ग्राम पंचायतों के सरपंच उपस्थित थे।