ब्रेकिंग न्यूज़: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, गरीब बच्चों के एडमिशन में हो रही देरी पर निराशा
बिलासपुर, 20 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाई कोर्ट ने गरीब बच्चों के एडमिशन में आ रही देरी को गंभीरता से लिया है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह तेजी से कार्यवाही करे ताकि बच्चों का शिक्षा सत्र प्रभावित न हो।
एडमिशन प्रक्रिया में परिणाम
राज्य शासन ने बताया है कि पहले चरण की लॉटरी निकाली जा चुकी है, जिसमें 15,000 छात्रों को सीटें आवंटित की गई हैं। इन छात्रों को 1 मई से 30 मई के बीच एडमिशन लेना अनिवार्य होगा। इसके बाद दूसरे चरण की प्रक्रिया का शुभारंभ होगा। लेकिन हाई कोर्ट ने यह सवाल उठाया कि अगर इतनी देरी हुई, तो बच्चे कब पढ़ाई करेंगे? अदालत ने शिक्षा विभाग से 7 मई तक पूरी प्रक्रिया को पूरा करने की कार्ययोजना मांगी है।
शिक्षा सत्र की धीमी शुरुआत
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में नया शिक्षा सत्र 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है, लेकिन आरटीई के तहत पहली कक्षा में प्रवेश की प्रक्रिया बेहद धीमी चल रही है। 38,438 आवेदनों में से केवल 23,766 (62%) की ही जांच समाप्त हुई है, जबकि 14,000 से अधिक आवेदन अभी भी लंबित हैं। कई जिलों में तो 10% से कम आवेदन की जांच हो पाई है।
सीटों की भारी मांग
राज्य के 6,861 स्कूलों में 21,698 सीटों के लिए 38,438 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसका मतलब है कि औसतन हर सीट पर लगभग 1.77 आवेदन आए हैं। हालाँकि, यह औसत आंकड़ा वास्तविकता को छुपा रहा है, क्योंकि कई जिलों में सीटों से कई गुना अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। जबकि, कुछ जिलों में सीटें खाली रह सकती हैं। इस स्थिति में रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जैसे शहरों में सीट के लिए भारी प्रतिस्पर्धा है, जबकि बस्तर क्षेत्र में सीटें खाली रहने की संभावना है।
निष्कर्ष
इस मुद्दे पर बिलासपुर हाई कोर्ट ने स्पष्ट संदेश दिया है कि बच्चे शिक्षा का अधिकार पाने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। शिक्षा विभाग को तत्परता दिखाते हुए जल्द से जल्द एडमिशन प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो शिक्षा का अधिकार और बच्चों का भविष्य दोनों खतरे में पड़ जाएंगे। अब राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करे।




