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अधिकमास में क्यों बदल जाते हैं खान-पान के नियम? जानिए धार्मिक मान्यता और विज्ञान क्या कहता है

खान-पान के नियम: धार्मिक दृष्टि से अधिकमास को मन और शरीर की शुद्धि का समय माना जाता है। इसी कारण तला-भुना, ज्यादा मसालेदार और तामसिक भोजन छोड़कर हल्का, सादा और सात्त्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है। लेकिन आधुनिक विज्ञान भी इस सोच को पूरी तरह गलत नहीं मानता।

मौसम बदलने से कमजोर होती है पाचन शक्ति

आयुर्वेद और आधुनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मई-जून के दौरान तेज गर्मी, उमस और बदलते मौसम की वजह से पाचन तंत्र अपेक्षाकृत कमजोर हो जाता है। ऐसे समय भारी, ज्यादा तैलीय और अत्यधिक प्रोटीन वाला भोजन शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि हल्का भोजन:

  • पाचन को आसान बनाता है
  • शरीर में पानी की कमी कम करता है
  • गैस, एसिडिटी और अपच से बचाता है
  • मानसिक थकान कम करने में मदद करता है

किन चीजों से परहेज करने की परंपरा है?

अधिकमास में कई लोग प्याज, लहसुन, बैंगन, उड़द दाल, मांसाहार, शराब और तामसिक भोजन से दूरी बनाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि ये चीजें मन में उत्तेजना और आलस्य बढ़ाती हैं, जिससे ध्यान और साधना में बाधा आती है।

विज्ञान क्या कहता है?

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • ज्यादा मसालेदार भोजन गर्मी में डिहाइड्रेशन बढ़ा सकता है
  • भारी दालें और तला भोजन गैस और पाचन समस्या बढ़ा सकते हैं
  • शराब और प्रोसेस्ड फूड शरीर की ऊर्जा और नींद पर असर डालते हैं
  • मांसाहार गर्म मौसम में जल्दी खराब होने का खतरा रखता है

हालांकि वैज्ञानिक रूप से सभी खाद्य पदार्थों पर पूर्ण प्रतिबंध का कोई ठोस प्रमाण नहीं है। डॉक्टर संतुलित और स्वच्छ भोजन को ज्यादा महत्वपूर्ण मानते हैं।

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अधिकमास में क्या खाना बेहतर माना जाता है?

धार्मिक परंपराओं में इस दौरान गेहूं, चावल, मूंग दाल, जौ, गाय का घी, मौसमी फल और हल्की सब्जियों का सेवन शुभ माना गया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी इन चीजों को फायदेमंद मानते हैं:

  • मूंग दाल: आसानी से पचने वाली प्रोटीन
  • चावल और जौ: शरीर को ऊर्जा देने वाले हल्के अनाज
  • आंवला: विटामिन-C से भरपूर
  • केला और ककड़ी: शरीर को हाइड्रेट रखने में मददगार
  • सेंधा नमक: सामान्य नमक की तुलना में हल्का माना जाता है

क्या सभी नियमों का पालन जरूरी है?

धर्माचार्यों के अनुसार अधिकमास का मुख्य उद्देश्य संयम, आत्मनियंत्रण और सकारात्मक सोच है। इसलिए लोग अपनी श्रद्धा, स्वास्थ्य और क्षमता के अनुसार नियमों का पालन करते हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि:

  • मधुमेह, BP या अन्य बीमारी वाले लोग बिना सलाह लंबा उपवास न करें
  • शरीर की जरूरत के अनुसार संतुलित भोजन लें
  • साफ और ताजा भोजन सबसे ज्यादा जरूरी है

आस्था और स्वास्थ्य का संतुलन

विशेषज्ञ मानते हैं कि अधिकमास केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं बल्कि शरीर और मन को रीसेट करने का अवसर भी हो सकता है। सात्त्विक भोजन, सीमित खान-पान, कम तनाव और नियमित पूजा या ध्यान मानसिक शांति और स्वास्थ्य दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं।

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