"1500 करोड़ का झटका: जीएसटी 2.0 से आम आदमी को राहत, लेकिन छत्तीसगढ़ में संभावित नुकसान!"

ब्रेकिंग न्यूज: छत्तीसगढ़ में जीएसटी में गिरावट, 1500 करोड़ का नुकसान

रायपुर।30 मार्च 2026 – देश में जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद करदाताओं को राहत मिली है, लेकिन छत्तीसगढ़ जैसे उत्पादक-प्रधान राज्यों के लिए नई चुनौतियाँ सामने आई हैं। हाल के आँकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में इस वित्तीय वर्ष में लगभग 1500 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान है। यह स्थिति राज्य सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं पर विपरीत असर डाल सकती है।

जीएसटी कलेक्शन में वृद्धि, लेकिन छत्तीसगढ़ पर दबाव

देश के जीएसटी कलेक्शन में सुधार हो रहा है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इस वृद्धि का कोई फायदा नहीं मिल रहा। इस वर्ष राज्य में जीएसटी कलेक्शन में लगभग 10 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान लगाया जा रहा है। यह स्थिति यह दर्शाती है कि भले ही राष्ट्रीय स्तर पर राजस्व में वृद्धि हो रही हो, राज्य में इसकी कमी हो रही है।

जीएसटी में बदलाव के कारण

जीएसटी एक गंतव्य आधारित कर प्रणाली है, जिसका अर्थ है कि कर का लाभ उसी राज्य को मिलता है, जहाँ वस्तु या सेवा का उपयोग होता है। छत्तीसगढ़ में आयरन, स्टील और कोयला का उत्पादन अधिक है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय की कमी के कारण उपभोग अपेक्षाकृत कम है। यहाँ से माल की पर्याप्त मात्रा दूसरे राज्यों में भेजी जाती है, जिससे कर का बड़ा हिस्सा उन राज्यों को मिल जाता है जहाँ इसका उपयोग हो रहा है।

कोयला क्षेत्र का प्रभाव

कोयला क्षेत्र में जीएसटी की दर में बदलाव ने सीधे तौर पर राज्य के राजस्व को प्रभावित किया है। पहले कोयले पर 5 प्रतिशत जीएसटी था, लेकिन अब यह 18 प्रतिशत हो गया है, जिससे कंपनियों के पास भारी मात्रा में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) जमा हो गया है। इसके चलते राज्य को नकद राजस्व की कमी महसूस हो रही है।

अन्य राज्यों पर भी असर

छत्तीसगढ़ अकेला नहीं है, ओडिशा और झारखंड जैसे अन्य उत्पादन-प्रधान राज्यों में भी इसी प्रकार की स्थिति बन रही है। इन राज्यों में भी राजस्व नुकसान का अनुमान 1000 करोड़ रुपये तक पहुँच रहा है, जिससे छत्तीसगढ़ पर वित्तीय दबाव और बढ़ सकता है।

निष्कर्ष

राजस्व में गिरावट का सीधा असर राज्य की विकास और जनकल्याण योजनाओं पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सुधार 2027-28 से संभव है, लेकिन इसके लिए राज्यों को वर्तमान में वित्तीय दबावों का सामना करना पड़ेगा। इस समस्या के समाधान के लिए आईजीएसटी सेटलमेंट सिस्टम की समीक्षा और क्षतिपूर्ति तंत्र पर विचार आवश्यक है, ताकि सभी राज्यों को जीएसटी का समान लाभ मिल सके।

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