CG: करोड़ों की कीमत – छत्तीसगढ़ की सड़कों पर एक हजार से अधिक बच्चे मांग रहे भीख!

ब्रेकिंग न्यूज: बच्चों का पुनर्वास, भीख मांगने की समस्या बनी चुनौती

रायपुर: भारत में घूमंतु बच्चों के पुनर्वास के लिए केंद्र और राज्य सरकारें कई योजनाएं चला रही हैं, लेकिन भीख मांगने वाले बच्चों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है। यह चिंताजनक आंकड़े हाल ही में भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा प्रस्तुत किए गए हैं, जिन्हें राज्यसभा में साझा किया गया। छत्तीसगढ़ जैसे प्रदेशों में भी स्थिति अधिक चिंताजनक है, जहां आधिकारिक आंकड़े भले ही लगभग एक हजार के आसपास हैं, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है।

बच्चों की संख्या और उनके हालात

केंद्र सरकार की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, सड़कों पर भीख मांगते बच्चों की संख्या चिंताजनक है। बचे हुए केवल 2653 बच्चों का ही पुनर्वास संभव हो पाया है। इनमें से 1507 बच्चों को उनके परिवारों के पास वापस भेज दिया गया है। अन्य बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों और बाल कल्याण समितियों के हवाले किया गया है, जहां उन्हें आवास और शिक्षा देने की व्यवस्था की जा रही है।

बाल कल्याण समितियों में बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ रहने की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। सरकार ने यह भी बताया कि भीख मांगने वाले बच्चों को स्कूलों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिसके तहत 635 बच्चों को विद्यालयों में दाखिला दिलवाने का काम किया गया है।

राज्यों में बंटा हुआ दृश्य

हैरान करने वाली बात यह है कि भीख मांगने वाले बच्चों की संख्या देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग है। उत्तर प्रदेश में 10,167 बच्चे भीख मांगते पाए गए हैं, जबकि राजस्थान में यह संख्या 7,167 और बिहार में 3,396 है। पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में भी लगभग तीन हजार बच्चे इसी समस्या का सामना कर रहे हैं। दूसरी ओर, सिक्किम और लक्षद्वीप में केवल एक-एक बच्चा भीख मांगते मिला, जबकि दादर नगर हवेली, अंडमान निकोबार द्वीप समूह और पुडुचेरी में एक भी बच्चा नहीं पाया गया।

निष्कर्ष

भीख मांग रहे बच्चों के पुनर्वास के प्रयासों की प्रभावशीलता पर निरंतर प्रश्न उठाए जा रहे हैं। केंद्र सरकार का नई केंद्रीय क्षेत्रीय योजना लाने का कदम, इस गंभीर समस्या के समाधान हेतु एक सकारात्मक प्रयास माना जा रहा है। यदि इसे सफलतापूर्वक लागू किया जाए, तो उम्मीद की जा सकती है कि बच्चों के पुनर्वास की प्रक्रिया में तेजी आएगी और वे एक बेहतर जीवन का सामना कर सकेंगे। बच्चों का भविष्य बेहतर बनाना हमारी जिम्मेदारी है, और इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।

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