ब्रेकिंग न्यूज: ईरान ने दी चेतावनी, अमेरिका और इसराइल के हमलों के खिलाफ करेगा retaliatory कार्रवाई!
ईरान में अमेरिका और इसराइल द्वारा किए गए घातक हमलों में कम से कम 34 लोगों की मौत हो गई है, जिनमें 6 बच्चे भी शामिल हैं। इस चौतरफा आक्रमण का मुख्य लक्ष्य तिहान में स्थित एक प्रमुख विश्वविद्यालय और नागरिक क्षेत्र थे।
ईरान के विभिन्न शहरों में हमले
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के बहारस्तान काउंटी में एक हवाई हमले में 23 लोग मारे गए, जिनमें चार लड़कियां और दो लड़के शामिल थे, जिनकी उम्र 10 साल से कम थी। इसके अलावा, क्यूम शहर में एक आवासीय इमारत पर हुए हमले में पांच लोगों की जान गई। बंजार-ए लेंगेह में भी छह लोगों के मारे जाने की खबर है।
सिर्फ ये ही नहीं, बल्कि बंडर अब्बास, अहवाज़, महशहर, शीराज़, इस्फ़हान और करज जैसे 12 से अधिक शहर भी हमलों की चपेट में आए।
शरिफ़ विश्वविद्यालय पर हमला
अमेरिकी-इसराइली हमलों ने शरिफ़ विश्वविद्यालय को भी नहीं बख्शा, जिसे ईरान के प्रमुख वैज्ञानिक विश्वविद्यालयों में से एक माना जाता है। इस विश्वविद्यालय में भीषण नुकसान हुआ है, विशेषकर इसकी मस्जिद और प्रयोगशालाओं को भारी क्षति पहुंची है।
अल जज़ीरा के रिपोर्टर तोहीद असदी ने बताया कि शरिफ़ क्षेत्र में अन्य हमले भी हुए हैं, जिनमें एक गैस संयंत्र पर हमला भी शामिल है। उन्होंने कहा कि ईरान के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने जानकारी दी है कि युद्ध की शुरुआत के बाद से कम से कम 30 विश्वविद्यालयों पर हमले किए गए हैं।
ईरान की प्रतिशोधी कार्रवाई की चेतावनी
इन हमलों के मद्देनज़र, ईरान ने प्रतिशोधी कार्रवाई की आशंका जताई है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने ट्रंप के बयानों को "युद्ध अपराधों के लिए उकसावा" करार दिया और कहा कि ईरान अपनी बुनियादी ढांचे पर किसी भी हमले का जवाब "तद्नुसार" देगा।
उन्होंने कहा कि ईरानी लोग ट्रंप की धमकियों से प्रभावित नहीं हैं और किसी भी अवांछनीय समझौते के लिए मजबूर नहीं होंगे। बघाई ने यह भी चेतावनी दी कि ईरान अपने बुनियादी ढांचे पर हमलों का जवाब देगा और जवाबी हमले करेगा।
इस बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार अली अकबर वेलायती ने कहा कि यदि दोनों देशों में से किसी एक ने भी एक गलती की, तो इससे वैश्विक ऊर्जा प्रवाह और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में गंभीर व्यवधान आ सकता है।
इस परिदृश्य ने देश में तनाव को बढ़ा दिया है और राजनीतिक स्थिति को नाजुक बना दिया है।
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही यह खींचतान वैश्विक स्तर पर चिंता का कारण बन गई है, और दुनिया के नागरिकों को इससे गहन चिंताएँ हैं। ईरान अब देखेगा कि इसकी प्रतिक्रिया क्या होती है, क्योंकि स्थिति दिन प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है।
