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महिलाओं के लिए ऐतिहासिक कानून का प्रस्ताव, संसद में अगले सप्ताह होगी चर्चा

संसद में महिलाओं के आरक्षण बिल पर चर्चा का आगाज़ होने वाला है। यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को भारतीय राजनीति में सही प्रतिनिधित्व प्रदान करना है।

महिलाओं का प्रतिनिधित्व, एक लंबे संघर्ष की कहानी

पिछले 75 वर्षों में, भारत में महिलाओं को राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल सका है। हमारे संविधान निर्माण के समय, कई सुझाव दिए गए थे कि महिलाओं को भी अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की तरह विशेष कोटा दिया जाए। हालांकि, इसे संविधान सभा की प्रमुख महिला सदस्यों ने ठुकरा दिया, जो इस बात की ओर इशारा किया कि महिलाओं को वास्तविक समानता मिलनी चाहिए, न कि कोई सुरक्षा भेदभाव।

हंसा मेहता, जो उस समय बॉम्बे राज्य की प्रमुख सदस्य थीं, ने कहा था, "हमने कभी विशेषाधिकार की मांग नहीं की। हम न्याय, आर्थिक न्याय और राजनीतिक न्याय की मांग कर रहे हैं।" इसी प्रकार, रेणुका राय और दुर्गाबाई देशमुख ने भी इसी दृष्टिकोण को साझा किया, यह कहते हुए कि आरक्षण की मांग करना महिलाओं की सामाजिक स्थिति को कमतर करने जैसा होगा।

राजनीती में महिलाओं का स्थान

महिलाओं ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अपनी क्षमता साबित की है। फिर भी, उन्हें राजनीतिक संरचना में सही स्थान नहीं मिल सका है। विभिन्न सरकारों ने इससे संबंधित कई प्रयास किए हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। 1992 में, 73वीं और 74वीं संविधान संशोधन के माध्यम से पंचायती राज अधिनियम के तहत महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया। इसके चलते, संसद में भी समान प्रावधान की मांग उठी।

विश्वासपूर्वक, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 2023 में प्रस्तुत "नारी शक्ति वंदन अधिनियम" ने संसद में ऐतिहासिक सफलता हासिल की। यह कानून लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करता है, जो अब बहुत जल्द लागू होने जा रहा है।

अब क्या आगे?

प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में इस बिल को अंतिम रूप देने के लिए 16 अप्रैल से 3 दिवसीय विशेष सत्र का आह्वान किया है। उनका मानना है कि महिलाओं का प्रशासन और निर्णय-निर्माण में सहभागिता जरूरी है, जिससे जनसंवाद में विविधता आएगी और शासन की गुणवत्ता में सुधार होगा।

इस बिल का प्रभावी कार्यान्वयन 2029 के बाद होगी, जब सीमांकन की प्रक्रिया पूरी होगी। यह कदम न केवल राजनीति में महिलाओं के बढ़ते प्रतिनिधित्व का संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत विकसित और समावेशी समाज की ओर बढ़ रहा है।

महिलाओं की राजनीति में भागीदारी का यह सफर भारत के भविष्य को नए अवसर प्रदान कर सकता है। अब देखना यह है कि यह बिल किस प्रकार कार्यान्वित होता है और यह महिलाओं की स्थिति को कैसे बदलता है।

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