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CSMCL ओवर टाइम घोटाला: शराब घोटाले का खौफनाक कनेक्शन! कमीशन की रकम अनवर ढेबर तक, सिंडिकेट का फंसा जाल!

ब्रेकिंग न्यूज़: छत्तीसगढ़ में घोटालों का नया मामला उजागर

रायपुर, 21 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ में एक बार फिर से बड़े पैमाने पर घोटाले के मामले सामने आए हैं। हाल ही में 3200 रुपये के शराब घोटाले के बाद अब 115 करोड़ रुपये का सीएसएमसीएल ओवरटाइम घोटाला चर्चा में है। यह घोटाला आबकारी विभाग के अधिकारियों और मैनपावर सप्लाई कंपनियों के बीच सरे-सरे किया गया है।

ओवरटाइम भुगतान का घोटाला

राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो ने 2019-20 से 2023-24 के बीच ओवरटाइम के नाम पर मैनपावर एजेंसियों को सरकारी खजाने से 115 करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने की जांच की। यह राशि शराब दुकानों पर काम कर रहे कर्मचारियों के वेतन के लिए मानी जाती थी। लेकिन जांच में यह खुलासा हुआ कि यह रकम कर्मचारियों तक पहुंचने के बजाय कमीशन के रूप में हड़पी जा रही थी।

अभिषेक कुमार सिंह और तिजऊ राम निर्मलकर नामक मैनपावर कंपनियों के अधिकारियों को 19 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने पाया कि यह राशि अनवर ढेबर तक पहुंचाई जा रही थी, जो शराब घोटाले का मास्टर माइंड माना जाता है।

शराब घोटाले का सिद्धांत

पिछले शराब घोटाले की तरह ही, इस ओवरटाइम घोटाले का भी मास्टरमाइंड अनवर ढेबर है। सीएसएमसीएल के अधिकारियों और मैनपावर एजेंसियों के कर्मचारी मिलकर सरकारी खजाने को चूना लगा रहे थे। जांच के दौरान, प्रवर्तन निदेशालय द्वारा पकड़े गए कर्मचारियों से मिली जानकारी के आधार पर यह घोटाला सामने आया।

बेवजह वसूली का नया मामला

घोटालों के बीच छत्तीसगढ़ में शराब लाइसेंस नवीनीकरण के नाम पर बार संचालकों से बेजा वसूली की जा रही है। रायपुर, दुर्ग और भिलाई में संचालकों से लगभग दो से ढाई लाख रुपये तक की वसूली की जा रही है। यह स्थिति बेतरतीब तरीके से बनी हुई है और शिकायतें मुख्यमंत्री तक पहुंच चुकी हैं।

सम्बंधित अधिकारियों पर कार्रवाई का कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिसके कारण यह स्थिति और भी खराब होती जा रही है।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में चल रहे इन घोटालों ने राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती दी है। प्रभावशाली अधिकारी और मैनपावर एजेंसियों की मिलीभगत से हो रहे इन भ्रष्टाचार के मामलों ने जनता में अविश्वास पैदा किया है। राज्य सरकार को इन मामलों की गहन जांच कराकर सही दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि सरकार की "ज़ीरो टॉलरेंस" नीति का भरोसा बहाल किया जा सके।

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