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दक्षिण अमेरिकी प्रवासी बोले: डीआरसी में वापसी का दबाव झेल रहे हैं

ब्रेकिंग न्यूज़: अमेरिका द्वारा निर्वासित शरणार्थियों पर दवाब, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की चिंताएँ बढ़ीं

अमेरिका द्वारा लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (DRC) भेजे गए दक्षिण अमेरिकी प्रवासियों और शरणार्थियों को अपने देशों में लौटने के लिए काफी दवाब का सामना करना पड़ रहा है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इसे एक गंभीर चिंता के रूप में देखा है।

प्रवासियों की दयनीय स्थिति

हाल ही में, अमेरिका से निर्वासित 15 दक्षिण अमेरिकी प्रवासी महिलाओं ने बताया है कि उन्हें अपने मूल देशों में लौटने का दवाब दिया जा रहा है, जबकि उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता है। ये महिलाएं कोलंबिया, पेरू और इक्वाडोर से हैं और हाल ही में उन्हें DRC भेजा गया है।

Reuters के अनुसार, एक 29 वर्षीय कोलंबियाई महिला ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि, "हमें अपने देश लौटने के लिए मजबूर किया जा रहा है, चाहे वहां का खतरा कितना भी बड़ा क्यों न हो।" यह स्थिति तब उत्पन्न हुई जब ट्रम्प प्रशासन के अंतर्गत तीसरे देशों में निर्वासन के विवादास्पद समझौते के तहत उन्हें DRC भेजा गया।

ट्रम्प प्रशासन की नीतियाँ और प्रवासन

ट्रम्प प्रशासन ने दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद, अमेरिका में प्रवासन को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। इनमें न केवल अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शामिल है, बल्कि उन प्रवासियों का भी निष्कासन किया जा रहा है, जिनके पास कानूनी स्थिति है।

इस समूह में कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने अपने देशों में उत्पीड़न का सामना करने के बाद अमेरिका में शरण मांगी थी। उदाहरण के लिए, 29 वर्षीय महिला ने 2024 में अपनी शरण के लिए आवेदन में उल्लेख किया था कि उसे एक सशस्त्र समूह द्वारा अपहरण और torture का सामना करना पड़ा था।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की चिंताएँ

मानवाधिकार अधिवक्ताओं का मानना है कि तीसरे देशों में निर्वासन एक ऐसा कदम है जिसका उद्देश्य प्रवासियों को डराना है ताकि वे अमेरिका छोड़ने के लिए सहमत हो जाएं। ऐसे निर्वासन में उन स्थानों पर भेजा जाना शामिल है जिनसे प्रवासियों को कोई परिचित नहीं होता है, और कई स्थलों पर मानवाधिकारों की स्थिति खतरे में है।

एक अमेरिकी वकील आलमा डेविड ने कहा, "उद्देश्य स्पष्ट है: लोगों को ऐसे स्थान पर भेजना जो उन्हें पूरी तरह से अपरिचित लगे, ताकि वे अपने घर लौटने के लिए सहमत हो जाएं, भले ही वहां उन्हें बहुत बड़ा खतरा हो।"

इस स्थिति ने एक बार फिर से वि‍श्व के विभिन्न हिस्सों में प्रवासियों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के मुद्दे को उठाया है। मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि इन निर्वासन कार्यक्रमों का दुरुपयोग किया जा रहा है और यह प्रवासियों के लिए एक गंभीर खतरा बनता जा रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को इस मुद्दे पर ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि प्रवासियों के अधिकारों की रक्षा की जा सके और उन्हें उचित सुरक्षा प्रदान की जा सके।

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