महासमुंद सफलता की कहानी: गेंदा की खेती ने बदल दी किसान की जिंदगी, राष्ट्रीय बागवानी मिशन से मिली नई पहचान। मेहनत, नई सोच और आधुनिक तकनीक का सही उपयोग किस तरह खेती को लाभकारी बना सकता है, इसका उदाहरण महासमुंद विकासखंड के ग्राम फूलवारी (बावनकेरा) के प्रगतिशील किसान श्री गितेश्वर टण्डन ने पेश किया है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत गेंदा फूल की खेती अपनाकर उन्होंने न सिर्फ अपनी आय बढ़ाई, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं।
पहले श्री टण्डन पारंपरिक धान की खेती करते थे। बढ़ती लागत, मौसम की अनिश्चितता और सीमित मुनाफे के कारण उन्हें अपेक्षित आय नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में उन्होंने खेती में बदलाव लाने का फैसला किया।
वर्ष 2025-26 में उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी मिशन अंतर्गत “पुष्प क्षेत्र विस्तार-गेंदा योजना” का लाभ लिया। उद्यानिकी विभाग से पौध सामग्री मिलने के बाद उन्होंने करीब 2 एकड़ जमीन में आधुनिक तरीके से गेंदा फूल की खेती शुरू की।
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खेती में उन्होंने ड्रिप सिंचाई और यांत्रिकरण तकनीकों का उपयोग किया, जिससे पानी की बचत हुई और मजदूरी लागत कम हुई। आधुनिक तकनीकों के कारण फसल की गुणवत्ता बेहतर हुई और उत्पादन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली।
आज श्री गितेश्वर टण्डन लगभग 50 क्विंटल गेंदा फूल का उत्पादन कर रहे हैं। उनके फूल महासमुंद और रायपुर की मंडियों तक पहुंच रहे हैं, जहां उन्हें अच्छा बाजार मूल्य मिल रहा है।
जहां पहले धान की खेती से उन्हें लगभग 25 हजार रुपये प्रति एकड़ तक का लाभ मिलता था, वहीं अब गेंदा की खेती से उनकी आय बढ़कर करीब 64 हजार रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच गई है।
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सफलता की कहानी: गेंदा की खेती ने बदल दी किसान की जिंदगी, राष्ट्रीय बागवानी मिशन से मिली नई पहचान श्री टण्डन की सफलता केवल आर्थिक उपलब्धि नहीं, बल्कि यह नवाचार और सकारात्मक सोच की प्रेरक कहानी भी है। उनकी सफलता को देखकर अब आसपास के कई किसान भी गेंदा और अन्य उद्यानिकी फसलों की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।



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