Homeज्योतिषआज से शुरू हुआ पुरुषोत्तम मास: 15 जून तक बंद रहेंगे विवाह...

आज से शुरू हुआ पुरुषोत्तम मास: 15 जून तक बंद रहेंगे विवाह और सभी मांगलिक कार्य

17 मई 2026 से पुरुषोत्तम मास यानी मलमास की शुरुआत हो गई है, जो 15 जून तक रहेगा। हिंदू धर्म में इस माह को अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दौरान विवाह, मुंडन, उपनयन संस्कार और अन्य मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है। धार्मिक मान्यता है कि यह पूरा महीना भगवान विष्णु की आराधना और आध्यात्मिक साधना के लिए समर्पित होता है।

क्या होता है पुरुषोत्तम मास?

पुरुषोत्तम मास को अधिक मास या मलमास भी कहा जाता है। हिंदू पंचांग में यह अतिरिक्त महीना हर तीसरे वर्ष जोड़ा जाता है ताकि चंद्र वर्ष और सौर वर्ष के बीच बने समय के अंतर को संतुलित किया जा सके।

दरअसल, चंद्र वर्ष और सौर वर्ष के बीच हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है। यदि इस अंतर को ठीक नहीं किया जाए तो कुछ वर्षों बाद त्योहारों और ऋतुओं का तालमेल बिगड़ सकता है। इसी कारण हर तीसरे साल पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है।

कैसे तय होता है अधिक मास?

हिंदू ज्योतिष में जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है तो उसे संक्रांति कहा जाता है। जिस चंद्र मास में सूर्य की कोई संक्रांति नहीं होती, वही महीना अधिक मास घोषित किया जाता है। इसी व्यवस्था की वजह से दीपावली, दशहरा और अन्य त्योहार हमेशा अपनी निश्चित ऋतु में ही आते हैं।

क्यों कहा जाता है पुरुषोत्तम मास?

पौराणिक कथाओं के अनुसार इस अतिरिक्त महीने का कोई स्वामी देवता नहीं था, इसलिए इसे मलमास यानी अशुभ महीना माना जाता था। बाद में भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम “पुरुषोत्तम” प्रदान किया और इसे अपना प्रिय मास घोषित किया। तभी से इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाने लगा। मान्यता है कि इस महीने में किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल कई गुना अधिक मिलता है।

17 मई रविवार राशिफल: दांपत्य, धन, सेहत और करियर में कैसा रहेगा आपका दिन

मलमास में क्या करें?

इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है। प्रतिदिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करना शुभ माना गया है। इसके अलावा दीपदान, अन्नदान, वस्त्र दान और विशेष रूप से मालपुए का दान पुण्यदायी माना जाता है।

भागवत पुराण और रामायण का पाठ या श्रवण करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है। यदि संभव हो तो पवित्र नदी में स्नान करें, अन्यथा घर में स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी शुभ माना जाता है। इस दौरान सात्विक भोजन और शुद्ध आचरण अपनाने की सलाह दी जाती है।

मलमास में क्या न करें?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में विवाह, मुंडन, उपनयन संस्कार और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। नई गाड़ी, मकान या जमीन खरीदने से भी बचने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा नए व्यापार की शुरुआत या बड़ा निवेश करने को भी शुभ नहीं माना जाता। तामसिक भोजन और अशुद्ध आचरण से दूर रहने की सलाह दी जाती है।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments