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महासमुंद में जातीय भेदभाव का आरोप, कोटवार ने सीएम हाउस के सामने आत्मदाह की चेतावनी दी

महासमुंद, 6 जून। जिले के पिथौरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पाटनदादर के कोटवार एवं अनुसूचित जाति (गांडा) समुदाय के सदस्य भागीरथी चौहान ने गांव के कुछ लोगों पर जातिगत भेदभाव, सामाजिक बहिष्कार और धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित ने मामले की शिकायत पुलिस प्रशासन से लेकर राज्य अनुसूचित जाति आयोग तक की है, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया है।

भागीरथी चौहान के अनुसार, जुलाई 2024 में गांव में आयोजित हरिनाम कीर्तन यज्ञ के दौरान उन्होंने धार्मिक आयोजन में सहयोग स्वरूप एक हजार रुपये नकद और पांच किलो चावल देने की इच्छा जताई थी। आरोप है कि गांव के कुछ लोगों ने उनकी जाति का हवाला देते हुए उनका सहयोग लेने से इनकार कर दिया और सार्वजनिक रूप से अपमानित किया।

पीड़ित का दावा है कि उन्हें कथित रूप से कहा गया कि उनकी जाति के व्यक्ति द्वारा दिए गए पैसे और चावल का उपयोग करने से धर्म भ्रष्ट हो जाएगा। विरोध करने पर उन्हें अपनी “औकात में रहने” की बात कही गई। भागीरथी चौहान का आरोप है कि इसके बाद गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों ने उनके परिवार और समाज के लोगों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया।

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सामाजिक बहिष्कार और जुर्माना वसूली का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि गांव में उनके घर आने-जाने, बातचीत करने और मजदूरी करने वालों पर दबाव बनाया गया। उनके समाज के एक व्यक्ति से गांव में पुनः शामिल करने के नाम पर 25 हजार रुपये वसूले जाने का भी आरोप लगाया गया है। वहीं मकान निर्माण कार्य में लगे एक मजदूर पर 1100 रुपये का जुर्माना लगाकर वापस भेजने की बात भी शिकायत में कही गई है।

कई शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं

भागीरथी चौहान का कहना है कि वे पिछले कई महीनों से थाना सांकरा, पुलिस अधीक्षक महासमुंद, पुलिस महानिरीक्षक रायपुर, ऑनलाइन शिकायत पोर्टल और व्हाट्सएप के माध्यम से शिकायत करते आ रहे हैं, लेकिन आरोपियों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।

पीड़ित ने आरोप लगाया कि 5 जून 2026 को पंचायत भवन के सामने उन्हें फिर से धमकाया गया और कोटवार पद से हटवाने की बात कही गई। उन्होंने इसे अपनी सुरक्षा और सम्मान के लिए गंभीर खतरा बताया है।

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अनुसूचित जाति आयोग से लगाई गुहार

मामला अब राज्य अनुसूचित जाति आयोग तक पहुंच चुका है। भागीरथी चौहान ने दोषियों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

आत्मदाह की चेतावनी

पीड़ित ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उन्हें शीघ्र न्याय नहीं मिला और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो वे अपनी पत्नी और बच्चों के साथ मुख्यमंत्री निवास रायपुर के सामने आत्मदाह करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में होने वाली किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित आरोपियों की होगी।

फिलहाल मामले में पुलिस या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिकायत के बाद अब सभी की नजर प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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