एक साल से डिब्बों में बंद पड़ी मशीनें, 23 केंद्रों में बांटी गईं RO मशीनों का अब तक नहीं हुआ इंस्टॉलेशन; कई आंगनबाड़ियों में पेयजल की सुविधा भी अधूरी
महासमुंद। कोमाखान तहसील अंतर्गत उखरा सेक्टर की आंगनबाड़ियों में बच्चों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए की गई सरकारी व्यवस्था सवालों के घेरे में है। सेक्टर की 30 आंगनबाड़ियों में से 23 केंद्रों में करीब एक साल पहले RO मशीनें उपलब्ध कराई गई थीं, लेकिन अब तक किसी भी केंद्र में इन मशीनों का इंस्टॉलेशन नहीं हो पाया है। वहीं, कई आंगनबाड़ी केंद्रों में पेयजल की समुचित व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में बच्चों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाई गई मशीनें डिब्बों में बंद होकर शो-पीस बनी हुई हैं।
एक साल से घर में रखी थी RO मशीन
मामला तब सामने आया जब बनियातोरा आंगनबाड़ी केंद्र में उपलब्ध कराई गई RO मशीन के संबंध में जानकारी ली गई। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मानकी पटेल ने बताया कि करीब एक साल पहले मशीन उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन इसे केंद्र में स्थापित नहीं किया गया। मशीन उनके घर में रखी हुई थी। जानकारी लेने पर उन्होंने अपने घर से मशीन लाकर दिखाई।
कार्यकर्ता के अनुसार, मशीन उपलब्ध कराने के बाद इसे कहां और किस तरह स्थापित करना है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई। मशीन के संचालन के लिए आवश्यक अन्य व्यवस्थाएं भी केंद्र में उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई।
23 आंगनबाड़ियों में दी गई मशीनें, इंस्टॉलेशन के लिए बजट का इंतजार
उखरा सेक्टर की पर्यवेक्षक रूपवती पारेश्वर ने बताया कि सेक्टर की 23 आंगनबाड़ियों में RO मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि अब तक इन मशीनों का इंस्टॉलेशन नहीं हो पाया है।
पर्यवेक्षक के मुताबिक, मशीनों की स्थापना के लिए बजट उपलब्ध नहीं हुआ है। इस संबंध में अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है। मशीनों की कीमत के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।

शौचालय की सुविधा नहीं, भोजन के बाद बच्चों की छुट्टी
बनियातोरा आंगनबाड़ी केंद्र में केवल RO मशीन का मामला ही नहीं, बल्कि बच्चों के लिए बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। केंद्र में शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है अथवा शौचालय उपयोग की स्थिति में नहीं है।
आंगनबाड़ी में बच्चों को दोपहर करीब एक बजे भोजन दिया जाता है। भोजन के बाद छोटे बच्चों को शौचालय जाने की आवश्यकता होती है, लेकिन सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें निर्धारित समय दोपहर दो बजे तक केंद्र में रखने के बजाय भोजन के बाद ही घर भेजना पड़ता है। हालांकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का कहना है कि बच्चों के चले जाने के बाद वह सहायिका के साथ निर्धारित समय तक केंद्र में मौजूद रहती हैं।
मशीनों की कीमत को लेकर भी सवाल
RO मशीनों की खरीद लागत को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एक मशीन की कीमत करीब 49,300 रुपये बताई जा रही है। हालांकि इस कीमत की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में मशीनों की वास्तविक खरीद कीमत, आपूर्ति प्रक्रिया और स्थापना के लिए किए गए प्रावधान की जानकारी संबंधित विभाग से सामने आना जरूरी है।
सवाल यह भी है कि जब कई आंगनबाड़ी केंद्रों में पेयजल और मशीनों की स्थापना के लिए आवश्यक बुनियादी व्यवस्था पूरी नहीं थी, तो करीब एक साल पहले मशीनें उपलब्ध कराने के बाद उन्हें अब तक चालू क्यों नहीं किया गया? मशीनों की खरीद, कीमत, आपूर्ति और इंस्टॉलेशन से संबंधित प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक होने पर ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
बच्चों की सुविधा पर सवाल
आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले छोटे बच्चों के लिए स्वच्छ पेयजल, शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाएं बेहद जरूरी हैं। ऐसे में यदि सरकारी राशि खर्च कर मशीनें उपलब्ध कराने के बावजूद उनका उपयोग नहीं हो रहा है, तो यह व्यवस्था की कार्यप्रणाली और योजना के उद्देश्य पर सवाल खड़े करता है।
अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में कब तक RO मशीनों का इंस्टॉलेशन कराकर उन्हें चालू करता है और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए आवश्यक पेयजल एवं शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराता है।

Recent Comments