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सवाल उठे तो जागा सिस्टम: डेढ़ साल बाद आंगनबाड़ियों में लगेंगी डिब्बों में बंद RO मशीनें

WebMorcha की खबर के बाद हरकत में आया महिला एवं बाल विकास विभाग; उखरा समेत कई सेक्टरों में RO फिटिंग के लिए जारी हुआ रोस्टर, 21 से 24 अगस्त तक अलग-अलग केंद्रों में होगी स्थापना

महासमुंद। दिलीप शर्मा। WebMorcha
करीब डेढ़ साल से आंगनबाड़ी केंद्रों में डिब्बों में बंद पड़ी RO मशीनों को लेकर WebMorcha में प्रकाशित खबर का असर दिखाई देने लगा है। बच्चों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आंगनबाड़ियों में उपलब्ध कराई गई मशीनों की लंबे समय से फिटिंग नहीं होने का मामला सामने आने के बाद अब विभाग ने RO मशीनों को स्थापित करने की कवायद शुरू कर दी है।

उखरा सेक्टर की पर्यवेक्षक रूपवती पारेश्वर ने WebMorcha के WhatsApp पर RO फिटिंग का रोस्टर साझा
उखरा सेक्टर की पर्यवेक्षक रूपवती पारेश्वर ने WebMorcha के WhatsApp पर RO फिटिंग का रोस्टर साझा

उखरा सेक्टर की पर्यवेक्षक रूपवती पारेश्वर ने WebMorcha के WhatsApp पर RO फिटिंग का रोस्टर साझा करते हुए जानकारी दी है कि उखरा समेत कई सेक्टरों में अब मशीनों की फिटिंग कराई जा रही है। यानी जिन मशीनों को लंबे समय से केंद्रों में पहुंचाकर रख दिया गया था, उन्हें अब जाकर बच्चों के उपयोग के लिए चालू करने की तैयारी शुरू हुई है।

खबर सामने आई तो जारी हुआ फिटिंग का रोस्टर

WebMorcha ने अपनी खबर में सवाल उठाया था कि जब 23 आंगनबाड़ी केंद्रों में करीब एक साल पहले RO मशीनें उपलब्ध करा दी गई थीं, तो आखिर उन्हें अब तक स्थापित क्यों नहीं किया गया? कई जगह मशीनें डिब्बों में बंद थीं और कुछ मामलों में मशीनें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के घरों में रखी मिलीं।

खबर प्रकाशित होने के बाद अब उखरा सेक्टर की पर्यवेक्षक रूपवती पारेश्वर ने स्वयं RO फिटिंग का रोस्टर साझा किया है। रोस्टर के मुताबिक अलग-अलग सेक्टर और आंगनबाड़ी केंद्रों में क्रमवार फिटिंग का काम कराया जाएगा।

21 को घुंचापाली-कसेकेरा, 22 को सिर्री-तेंदुकोना

जारी रोस्टर के अनुसार 21 अगस्त को घुंचापाली और कसेकेरा, जबकि 22 अगस्त को सिर्री और तेंदुकोना में RO फिटिंग का कार्य किया जाना है।

इसके बाद 23 अगस्त को कोमाखान और उखरा तथा 24 अगस्त को पटपरपाली और टुहलु में RO मशीनों की फिटिंग प्रस्तावित है।

वहीं 19 अगस्त को बागबहरा और मुंगासेर में फिटिंग का कार्यक्रम रखा गया है।

पर्यवेक्षक रूपवती पारेश्वर ने यह भी बताया है कि मामाभांजा और खम्हरिया सेक्टर में 16 और 17 अगस्त को RO फिटिंग का कार्य पूरा हो चुका है।

डेढ़ साल बाद याद आई बच्चों की प्यास?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि इन मशीनों का उद्देश्य आंगनबाड़ी में आने वाले छोटे बच्चों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना था, तो इन्हें केंद्रों तक पहुंचाने के बाद डेढ़ साल तक स्थापित क्यों नहीं किया गया?

सरकारी व्यवस्था में मशीन की खरीद और आपूर्ति के बाद उसका उपयोग शुरू होना जरूरी है। लेकिन यहां मशीनें लंबे समय तक डिब्बों में बंद रहीं। इस दौरान बच्चे उन्हीं आंगनबाड़ी केंद्रों में आते रहे, जहां कई जगह पेयजल की व्यवस्था भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं थी।

अब खबर प्रकाशित होने के बाद फिटिंग का रोस्टर सामने आना यह बताता है कि विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है।

सिर्फ फिटिंग नहीं, मशीन चालू भी होनी चाहिए

हालांकि RO मशीनों की फिटिंग का रोस्टर जारी होना राहत की बात है, लेकिन असली परीक्षा मशीनों के चालू होने के बाद होगी।

सवाल यह है कि क्या सभी मशीनों की फिटिंग निर्धारित तारीखों में पूरी होगी? क्या मशीनों के लिए पानी, बिजली और ड्रेनेज जैसी जरूरी व्यवस्थाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी? क्या मशीनों का नियमित रखरखाव होगा? और सबसे महत्वपूर्ण—क्या अब आंगनबाड़ी में आने वाले बच्चों को वास्तव में स्वच्छ पानी मिल पाएगा?

क्योंकि मशीन को दीवार पर लगा देना ही योजना की सफलता नहीं है। उसका नियमित और सुरक्षित संचालन ही बच्चों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचने की असली गारंटी होगी।

WebMorcha की खबर के बाद विभाग की सक्रियता

WebMorcha ने अपनी पिछली खबर में यह मुद्दा उठाया था कि लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी यदि RO मशीनें उपयोग में नहीं आ रही हैं, तो योजना का उद्देश्य ही अधूरा रह जाता है।

ऐसे चलाया गया अभियान देंखें पुरानी खबरें

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