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17 लाख के ‘गायब’ तालाब मामले में अब जांच बैठी, 21 अगस्त को होगी सुनवाई; निजी जमीन पर निर्माण और कब्जे के आरोपों ने बढ़ाई हलचल

महासमुंद/बागबाहरा। ग्राम पंचायत भलेसर में मनरेगा के तहत स्वीकृत ‘बिछवार नया तालाब निर्माण’ को लेकर उठे गंभीर सवालों के बाद अब प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। तालाब निर्माण के नाम पर सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग, भूमि सत्यापन और मौके पर तालाब का स्वरूप दिखाई नहीं देने संबंधी शिकायत के बाद चार सदस्यीय जांच दल गठित किया गया है।

जांच दल ने ग्राम पंचायत भलेसर के तत्कालीन सरपंच बलराम सिन्हा, सरपंच अरुण चंद्राकर, पंचायत सचिव नाथूराम गायकवाड़, रोजगार सहायक राजू तांडी और संबंधित मेट को 21 अगस्त 2026 को सुबह 11 बजे ग्राम पंचायत भवन भलेसर में उपस्थित होकर साक्ष्य सहित अपना बयान प्रस्तुत करने के लिए कहा है। अनुपस्थित रहने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति को स्वयं जिम्मेदार बताया गया है।

शिकायत के बाद हरकत में आया प्रशासन

जांच आदेश में बताया गया है कि ग्राम पंचायत भलेसर में मनरेगा के अंतर्गत निर्मित ‘बिछवार नया तालाब’ को लेकर शासकीय राशि के दुरुपयोग और भूमि सत्यापन में संभावित अनियमितता की शिकायत सामने आई है। शिकायत में यह आरोप भी है कि स्वीकृत तालाब का मौके पर स्वरूप दिखाई नहीं देता और संबंधित स्थान पर निजी खेती किए जाने की जानकारी सामने आई है।

जांच आदेश में इस मामले की जांच के लिए चार जांच अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। जांच टीम संबंधित पक्षों से दस्तावेज और साक्ष्य लेकर पूरे मामले की पड़ताल करेगी।

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WebMorcha की पड़ताल के बाद उठे थे सवाल

इससे पहले WebMorcha की जमीनी पड़ताल में सामने आया था कि जिस स्थान पर मनरेगा के तहत तालाब निर्माण का रिकॉर्ड बताया जा रहा है, वहां वर्तमान में तालाब का स्वरूप नजर नहीं आता और क्षेत्र में अरबी (कोचई) की खेती की जा रही है।

मौके पर लगे सूचना पटल में तालाब निर्माण का उल्लेख और स्वीकृत राशि का विवरण दर्ज होने की बात सामने आई थी। ऑनलाइन मनरेगा रिकॉर्ड में भी भुगतान दर्ज होने का दावा किया गया था। इसी आधार पर सरकारी धन से निर्मित जल संरचना के वर्तमान स्वरूप को लेकर सवाल उठे थे।

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निजी जमीन होने के दावे ने बढ़ाई जांच की गंभीरता

मामले में एक और महत्वपूर्ण सवाल भूमि के स्वामित्व को लेकर है। पंचायत स्तर से संबंधित भूमि के निजी स्वामित्व की बात सामने आने का दावा किया गया था। वहीं भूमि स्वामी पक्ष की ओर से जमीन खरीदे जाने की बात कही गई थी।

यदि जांच में यह पुष्टि होती है कि जिस भूमि पर सार्वजनिक योजना के तहत तालाब निर्माण स्वीकृत हुआ, वह वास्तव में निजी भूमि थी, तो यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि भूमि का सत्यापन किस स्तर पर हुआ और कार्य को प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति किस आधार पर दी गई।

भुइयां रिकॉर्ड में बैंक बंधक होने का भी दावा

पड़ताल में संबंधित भूमि के राजस्व रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल सामने आए थे। भुइयां रिकॉर्ड में भूमि स्वामित्व और बैंक में बंधक होने की जानकारी होने का दावा किया गया था। ऐसे में जांच में राजस्व रिकॉर्ड, भूमि स्वामित्व, बंधक स्थिति और मनरेगा के दस्तावेजों का मिलान अहम होगा।

जांच के दायरे में कई अधिकारी और पंचायत प्रतिनिधि

अब जांच में यह स्पष्ट होना है कि तालाब निर्माण के लिए जमीन का सत्यापन किसने किया, तकनीकी स्वीकृति किस आधार पर दी गई, कार्य की माप और भुगतान किन दस्तावेजों के आधार पर हुआ तथा मौके पर निर्मित संरचना की वर्तमान स्थिति क्या है।

जांच के लिए संबंधित सरपंच, पंचायत सचिव, रोजगार सहायक, मेट और अन्य संबंधित पक्षों को साक्ष्य के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। शिकायतकर्ता को भी उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराने के लिए कहा गया है। साथ ही संबंधित सचिव को शिकायतकर्ता को नोटिस तामील कराने और संबंधित अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

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21 अगस्त को सामने आएगा क्या है पूरा सच

अब सभी की नजर 21 अगस्त 2026 को होने वाली जांच प्रक्रिया पर है। जांच टीम के सामने संबंधित पक्षों के बयान, मनरेगा के रिकॉर्ड, भूमि संबंधी दस्तावेज, तकनीकी अभिलेख और मौके की वास्तविक स्थिति महत्वपूर्ण साक्ष्य होंगे। अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि तालाब कहां गया, बल्कि यह भी है कि सरकारी योजना के तहत कार्य स्वीकृत करने से लेकर भुगतान और उसके बाद सरकारी जल संरचना की स्थिति तक पूरी प्रक्रिया में कहीं नियमों की अनदेखी तो नहीं हुई। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही इन सवालों का वास्तविक जवाब मिल सकेगा।

रिपोर्ट: दिलीप शर्मा 7879592500

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