ब्रेकिंग न्यूज: महासमुंद में रिश्वतखोर सरपंच गिरफ्तार
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) ने एक सरपंच को 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी सरपंच ने भूमि निर्माण के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) देने के नाम पर 4 लाख रुपये की मांग की थी, जिसमें से वह पहले ही 50 हजार रुपये ले चुका था।
शिकायत का विवरण
यह मामला तब सामने आया जब प्रार्थी सूरज राम रात्रे ने एंटी करप्शन ब्यूरो, रायपुर में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि उनकी पत्नी के नियंत्रण में स्थित ग्राम बेमचा, इन्द्रा कॉलोनी में एक भूखंड है, जिसमें निर्माण कार्य करवाने के लिए पूर्व सरपंच ने अनापत्ति प्रमाणपत्र भी जारी किया था। लेकिन वर्तमान सरपंच देवेन्द्र चंद्राकर ने बिना किसी कारण के उस अनुमति को निरस्त कर दी और 4 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की।
प्रार्थी ने साफ बताया कि वह रिश्वत नहीं देना चाहता था, बल्कि आरोपी सरपंच को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़वाना चाहता था। एसीबी ने शिकायत की जांच की और पाया कि शिकायत सही है। सत्यापन के दौरान आरोपी ने 3.80 लाख रुपये लेने के लिए सहमति दी, जिसमें से पहले ही 50,000 रुपये ले लिए गए थे।
गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई
16 अप्रैल 2026 को एसीबी ने एक ट्रेप आयोजित किया, जिसमें प्रार्थी ने सरपंच देवेन्द्र चंद्राकर को कुल रकम की अगली किश्त 1 लाख रुपये देते पकड़ा। एसीबी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सरपंच को गिरफ्तार कर लिया। मामले में उचित धाराओं के तहत अग्रिम कार्रवाई की जा रही है। आरोपी पर धारा 7 पीसी एक्ट 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है।
निष्कर्ष
महासमुंद में हुई इस घटना ने रिश्वतखोरी के खिलाफ प्रशासन की गंभीरता को उजागर किया है। यह गिरफ्तारी न केवल स्थानीय निवासियों के लिए आशा की किरण है, बल्कि यह चेतावनी भी है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। अभी देखना है कि क्या इस प्रकार की घटनाएं भविष्य में कम होंगी और लोगों का प्रशासन पर विश्वास बढ़ेगा। एसीबी की निरंतर निगरानी और तत्परता से ऐसे मामलों में उचित न्याय मिलने की उम्मीद जगती है।
