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सरकार ने पीएम मोदी का मजाक उड़ाने वाले वीडियो रील्स पर लगाई रोक

ब्रेकिंग न्यूज़: डिजिटल सेंसरशिप की बढ़ती समस्या, सोशल मीडिया पर निगरानी की नई पहल

भारत में हाल ही में एक चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। 18 मार्च को स्टैंड-अप कॉमेडियन पुलकित मणि, जिन्हें @hunnywhoisfunny के नाम से जाना जाता है, द्वारा बनाए गए एक पैरोडी वीडियो को अचानक भारत में ब्लॉक कर दिया गया। इस वीडियो ने मात्र कुछ ही समय में 16 मिलियन व्यूज हासिल किए थे।

पैरोडी वीडियो पर रोक

इस वीडियो में मणि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेशी मेहमानों के साथ बर्ताव का मजाक उड़ाया। उन्होंने मोदी द्वारा विदेशी नेताओं को गले लगाने, उनकी हंसी-ठठा और बेतुकी बातें करने को नकल किया। इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियां बटोरीं। इसके बाद, इंस्टाग्राम ने आधिकारिक नोटिस जारी करके कहा कि यह "कानूनी मांग" के आधार पर ब्लॉक किया गया है।

इसी दिन कई अन्य पैरोडी और सटायर अकाउंट्स को भी ब्लॉक किया गया। इनमें @Nehr_who, @DrNimoYadav और @DuckKiBaat जैसे लोकप्रिय हैंडल शामिल हैं। इन अकाउंट्स ने मोदी की शैक्षिक योग्यता और देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की दुर्दशा जैसे मुद्दों को लेकर तीखी टिप्पणियां की थीं।

इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन की प्रतिक्रिया

इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) ने इस मामले पर बयान जारी करते हुए कहा कि सोशल मीडिया सेंसरशिप में तेजी आई है और इस ताजा घटनाक्रम से लोकतांत्रिक मूल्यों पर खतरा बढ़ा है। उन्होंने कहा कि इन ब्लॉकिंग आदेशों में "थोड़ा या कोई स्पष्टीकरण" नहीं दिया गया। IFF ने सरकार से पारदर्शिता की अपील की और कहा कि उन्हें "समय पर नोटिस" और "स्पष्ट कारण" प्रदान करने चाहिए।

एक संपादकीय में, हिंदू समाचार पत्र ने सरकार की कार्रवाई की निंदा की और इसे डिजिटल निर्वासन के समान बताया। संपादकीय में कहा गया, "यह एक सख्त सरकार की पहचान है, न कि एक उदार लोकतंत्र की।"

सरकार की संवेदनशीलता और विपक्ष की प्रतिक्रिया

मोदी सरकार को डिजिटल सेंसरशिप के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए, विभिन्न विपक्षी दलों ने इसका कड़ा विरोध किया है। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रिनाते ने मोदी को "कायर प्रधानमंत्री" कहकर उनकी आलोचना की। यद्यपि मोदी ने पहले कहा था कि आलोचना से लोकतंत्र मजबूत होता है, मौजूदा परिस्थितियों ने यह दर्शा दिया कि उनकी सरकार किसी भी आलोचना को सहन नहीं कर रही।

ध्यान देने वाली बात यह है कि हाल ही में सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट हटाने की समयसीमा को तीन घंटे में घटा दिया है, जो कि किसी भी सरकार द्वारा दी गई सबसे कम समयसीमा है।

निष्कर्ष

इस तरह की सेंसरशिप और जानकारी पर अंकुश लगाने की प्रवृत्ति भारत में लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के लिए एक गंभीर खतरा है। यह स्थिति स्पष्ट रूप से यह दर्शाती है कि मौजूदा सरकार आलोचना के प्रति कितनी संवेदनशील है। इसे देखते हुए, यह आवश्यक है कि नागरिक अपने अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूक रहें और स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए आवाज उठाते रहें।

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