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महासमुंद अपडेट (25 अप्रैल 2026): जनगणना, रोजगार योजना, खेती में सफलता और एग्रीस्टैक पंजीयन पर फोकस

महासमुंद अपडेट (25 अप्रैल 2026): महासमुंद जिले में आज प्रशासनिक गतिविधियों से लेकर रोजगार, कृषि और डिजिटल पहल तक कई अहम खबरें सामने आई हैं। एक ओर जहां जनगणना 2027 को लेकर गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत युवाओं और उद्यमियों के लिए नए अवसर खोले गए हैं। इसी बीच आधुनिक खेती अपनाकर किसानों की आय बढ़ाने की प्रेरक कहानी भी सामने आई है, जबकि कृषि विभाग ने एग्रीस्टैक पंजीयन को लेकर किसानों से सक्रिय भागीदारी की अपील की है। कुल मिलाकर, जिले में विकास और जागरूकता के विभिन्न आयामों पर तेजी से काम होता नजर आ रहा

🟠 जनगणना 2027: सरायपाली में विशेष ग्राम सभाओं के जरिए जागरूकता अभियान

महासमुंद जिले में जनगणना 2027 के प्रथम चरण (मकान सूचीकरण) को लेकर जागरूकता अभियान तेज किया गया है। सरायपाली तहसील के सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा आयोजित कर ग्रामीणों को स्वगणना प्रक्रिया और 1 मई से शुरू होने वाले मकान सूचीकरण कार्य की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने 33 प्रश्नों वाले सर्वे के बारे में विस्तार से बताया और सही जानकारी देने की अपील की।


🟠 PMFME योजना 2026-27: खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू

जिले में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत इच्छुक व्यक्तियों से आवेदन मांगे गए हैं। इस योजना के तहत राइस मिल, दाल मिल, मसाला, बेकरी, डेयरी, अचार, जूस सहित कई प्रकार के उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं। पात्र हितग्राहियों को परियोजना लागत का 35% (अधिकतम 10 लाख रुपए) तक अनुदान मिलेगा।


🟠 सफलता की कहानी: ग्राफ्टेड टमाटर की खेती से दुबेलाल कोसरे को लाखों का मुनाफा

ग्राम बम्बुरडीह के किसान दुबेलाल कोसरे ने आधुनिक तकनीक अपनाकर ग्राफ्टेड टमाटर की खेती से बड़ी सफलता हासिल की है। ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक के उपयोग से उन्हें प्रति एकड़ 16-18 टन उत्पादन मिला और करीब 3 लाख रुपए से अधिक का लाभ हुआ। उनकी इस सफलता से अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं।


🟠 एग्रीस्टैक पंजीयन अनिवार्य: किसानों से जल्द रजिस्ट्रेशन कराने की अपील

कृषि विभाग ने किसानों से एग्रीस्टैक पोर्टल में पंजीयन कराने की अपील की है। जिले में अब तक 1.67 लाख से अधिक किसान पंजीयन कर चुके हैं, जबकि 23 हजार से ज्यादा किसान अभी शेष हैं। शासन की योजनाओं का लाभ लेने के लिए यह पंजीयन अनिवार्य बताया गया है।

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