Gold Silver Price:चांदी 3400 रुपये फिसली; सोना स्थिर, समझें वैश्विक उथल-पुथल के बीच इसके क्या मायने – Gold Rate Today Silver Price Today Mcx Gold Gold Price India Safe-haven Demand

Gold Silver Price:चांदी 3400 रुपये फिसली; सोना स्थिर, समझें वैश्विक उथल-पुथल के बीच इसके क्या मायने – Gold Rate Today Silver Price Today Mcx Gold Gold Price India Safe-haven Demand

आज की ताजा खबर:

डॉलर की मजबूती के कारण चांदी की कीमत में 3,400 रुपये की कमी आई है, और यह 2.68 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुँच गई। वहीं, सोने की कीमत स्थिर बनी रही। सोमवार को दिल्ली में, चांदी की कीमतें 3,400 रुपये घटकर 2,68,300 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई हैं, जबकि सोने का भाव 1,64,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर unchanged रहा। वैश्विक बाजारों की अस्थिरता के चलते अमेरिकी डॉलर की मजबूती से कीमती धातुओं की मांग में कमी आई है।

ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, चांदी की कीमतें लगातार तीसरे दिन गिरावट पर हैं। शुक्रवार को चांदी का भाव 2,71,700 रुपये प्रति किलोग्राम था, जो अब 3,400 रुपये की कमी के साथ 2,68,300 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) हो गया है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी के अनुसार, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण मुद्रास्फीति का दबाव फिर से बढ़ सकता है, जिससे चांदी की कीमतों में गिरावट बनी हुई है।

ऊर्जा की बढ़ती कीमतें वैश्विक मुद्रास्फीति की चिंताओं को बढ़ाते हैं, जिससे फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में कटौती की योजना में देरी हो सकती है। इसके कारण अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड को समर्थन मिला है, जिसने कीमती धातुओं पर दबाव डाला है।

इस बीच, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत में मामूली 200 रुपये की वृद्धि हुई, और यह 1,64,300 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) पर पहुँच गई। पिछले बाजार सत्र में इसका भाव 1,64,100 रुपये था।

वैश्विक स्तर पर, हाजिर सोने की कीमत 65.23 अमेरिकी डॉलर या 1.26 प्रतिशत गिरकर 5,105.89 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर आ गई, जबकि चांदी की कीमत 0.53 प्रतिशत घटकर 83.92 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।

बाज़ार को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक

  1. मध्य-पूर्व में ईरान और इजरायल के घटनाक्रमों के चलते निवेशक सोने और चांदी को सुरक्षित निवेश के रूप में देख रहे हैं।
  2. औद्योगिक मांग: चांदी सिर्फ सुरक्षित निवेश नहीं है, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स और अक्षय ऊर्जा क्षेत्र से भी इसकी मजबूत मांग है।
  3. टैक्स और लोकल फैक्टर: घरेलू खरीदारों को सोने और चांदी पर 3% जीएसटी और आभूषणों के मेकिंग चार्ज भी चुकाने पड़ते हैं।

अब आगे क्या?

विश्लेषकों का मानना है कि सोने और चांदी में वर्तमान में उतार-चढ़ाव जारी है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए डिजिटल गोल्ड या गोल्ड/सिल्वर ईटीएफ के जरिए निवेश करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। जब तक वैश्विक कूटनीतिक हालात और ब्याज दरों की अनिश्चितता बनी रहती है, कीमती धातुओं की कीमतों में मजबूती कायम रह सकती है।

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अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ी तनाव, नाजुक ceasefire खत्म होने वाला है

ब्रेकिंग न्यूज़: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनाव, सीज़फायर की समय सीमा नजदीक
हालिया घटनाक्रम के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच शब्दों की जंग तेज हो गई है। दोनों देशों के बीच सीज़फायर की समय सीमा समाप्त होने से पहले एक-दूसरे को धमकियां दी जा रही हैं।

तनाव का बढ़ता ग्राफ

ईरान के पार्लियामेंट स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालीबाफ ने कहा है कि उनका देश “बिटफील्ड पर नई कलाएँ दिखाने के लिए तैयार है।” यह जानकारी उस समय आयी है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि यदि सीज़फायर का समय समाप्त होता है और कोई समझौता नहीं होता तो उन्हें “ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा जो उन्होंने कभी नहीं देखी।"

विभिन्न समाचार सूत्रों के अनुसार, ये धमकियां उस समय दी गईं हैं जब अमेरिका ने वीकेंड पर हॉर्मूज़ जलडमरूमध्य के पास एक ईरानी-झंडा वाले जहाज को जब्त कर लिया था। इस घटना से ईरानी अधिकारियों में गुस्सा बढ़ गया है और वैश्विक तेल कीमतों में फिर से उछाल आया है।

बातचीत की उम्मीदें

तेहरान से रिपोर्ट करते हुए अल जज़ीरा के तोहीद असदी ने कहा, “यह जानना अभी बाकी है कि क्या ईरान इस हफ्ते इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता में भाग लेगा।” उन्होंने बताया कि ईरान ने हमेशा संवाद के दरवाजे को खुला रखने की कोशिश की है, इसलिए संभवना अभी भी बनी हुई है।

गालीबाफ ने ट्रंप की नीतियों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अमेरिका ने नीति की स्थिति को एक तरह की घेराबंदी बनाकर और सीज़फायर का उल्लंघन किया है। उन्होंने यह भी कहा, “हम धमकियों के साये में वार्ता قبول नहीं करते,” और पिछले दो हफ्तों में ईरान ने युद्ध के मैदान में नई कलाएँ दिखाने के लिए तैयार किया है।

वार्ता में रुकावटें

असदी ने कहा, “ईरान वार्ताओं के लिए तैयार है, लेकिन अमेरिका द्वारा लगाए गए शर्तों के तहत नहीं।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वार्ता आसान नहीं होगी, क्योंकि दोनों पक्षों के पास कई जटिल मुद्दे हैं, जिनमें हॉर्मूज़ जलडमरूमध्य, प्रतिबंध, युद्ध मुआवज़ा, बैलिस्टिक मिसाइल और ईरान के क्षेत्रीय संबंध शामिल हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें विश्वास है कि ईरान वार्ता के लिए आएगा, अन्यथा उन्हें “समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।” उन्होंने कहा कि यदि सीज़फायर खत्म होता है और कोई समझौता नहीं होता है, तो “बहुत सारे बम फटने लगेंगे।”

ट्रंप ने अपने बयान में कहा, “उम्मीद है कि वे एक उचित सौदा करेंगे, और वे अपने देश को फिर से खड़ा करेंगे। लेकिन जब वे ऐसा करेंगे, तो उनके पास परमाणु हथियार नहीं होंगे।”

इन घटनाओं के बीच, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस तनाव को नजदीकी से देख रहा है, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता पर खतरे का एक बड़ा साया मंडरा रहा है। यूं तो बातचीत की संभावना बनी हुई है, परंतु किस तरह से यह संकट समाप्त होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

"पप्पू यादव का विवादित बयान: ‘90% महिलाओं का राजनीतिक करियर बेड से शुरू होता है’ – महिला आरक्षण पर नया बवाल!"

ताजा समाचार: पप्पू यादव का महिलाओं के मुद्दों पर विवादित बयान

बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने हाल ही में महिलाओं के सुरक्षा और आरक्षण के मुद्दे पर एक बड़ा विवादित बयान दिया है। इस बयान के साथ उन्होंने अपनी चिंता जताई है कि देश में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं और उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत बिस्तर से होती है। इसके साथ ही उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा पर भी तीखा हमला किया है।

महिलाओं की सुरक्षा पर चिंता

पूर्णिया के सांसद ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के खिलाफ यौन शोषण के मामलों में नेताओं की बड़ी भूमिका होती है। उन्होंने कहा, "कई सांसदों पर गंभीर आरोप लगे हैं। स्कूल से लेकर कॉलेज और कामकाजी महिलाओं तक, यौन शोषण का सामना करना पड़ता है।" यादव का यह बयान उस समय आया है जब महिला आरक्षण बिल को लेकर राजनीति तेज हो गई है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा नहीं है कि महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे महिलाओं के प्रति संवेदनशील नहीं हैं।

जातिगत जनगणना पर जोर

सांसद यादव ने यह भी कहा कि जातिगत जनगणना आवश्यक है। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण मुद्दों पर बिना व्यापक चर्चा और विशेषज्ञों की राय के निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि "2014 और 2019 में सरकार ने इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाया, लेकिन अब चुनावी लाभ के लिए ऐसा किया जा रहा है।" वे महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन सरकारी नीतियों के प्रति उनकी निराशा भी व्यक्त की है, विशेषकर ओबीसी, ईबीसी, एससी-एसटी और अल्पसंख्यक समुदायों के संदर्भ में।

सम्राट चौधरी का समर्थन

पप्पू यादव ने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाए जाने का समर्थन किया है। उन्होंने इस फैसले को विशेषकर पिछड़े वर्ग के लिए महत्वपूर्ण बताया है। लेकिन भाजपा के भीतर इस कदम को लेकर असंतोष की स्थिति को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई। उनका कहना है कि कुछ पार्टी नेताओं ने सम्राट चौधरी को स्वीकार नहीं किया और अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

निष्कर्ष

पप्पू यादव का यह बयान भारतीय राजनीति में महिलाओं के मुद्दों और जातिगत जनगणना पर गहरी छाप छोड़ सकता है। उनके संबोधन ने न केवल असम के मुख्यमंत्री को निशाना बनाया है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दिया है। ये बयान यह दर्शाते हैं कि समाज में महिलाओं की स्थिति और उनकी सुरक्षा अभी भी एक गंभीर चिंता का विषय है, जिसे लेकर नीतियों का पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।

IPL 2026: भारत की राष्ट्रीय टीम को IPL से मिल रहा है बड़ा लाभ!

ब्रेकिंग न्यूज: भारत की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम को आईपीएल के लाभ मिल रहे हैं। यह लीग देशभर से युवा खिलाड़ियों को आकर्षित कर रही है।

भारत की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम हाल ही में आईपीएल 2023 के सफलता के बाद अपने चयन में नये प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को शामिल कर रही है। इस लीग ने देश के विभिन्न कोनों से क्रिकेट के नये सितारों को सामने लाया है, जो राष्ट्रीय स्तर पर टीम की मजबूती में योगदान दे रहे हैं।

खेल विश्लेषकों का मानना है कि आईपीएल ने न केवल खेल के स्तर को ऊँचा किया है, बल्कि युवा खिलाड़ियों को भी अपनी पहचान बनाने का अवसर प्रदान किया है। घरेलू खिलाड़ियों जैसे यशस्वी जायसवाल, पर्थवी शॉ, और शुभमन गिल ने अपनी शानदार प्रदर्शनों से सभी का ध्यान आकर्षित किया है।

यह कहना गलत नहीं होगा कि आईपीएल की बढ़ती लोकप्रियता ने भारत की क्रिकेट टीम को एक नई दिशा दी है। अब देखना यह है कि ये युवा प्रतिभाएं आगामी अंतरराष्ट्रीय मैचों में किस तरह से प्रदर्शन करती हैं।

समाप्ति: आईपीएल ने भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

जापान ने WWII के बाद की सैन्यवाद नीति से तोड़ा नाता, हथियार निर्यात नियमों में ढील

ब्रेकिंग न्यूज़: जापान ने हथियार निर्यात के लिए नए रास्ते खोले

जापान ने हथियारों के निर्यात को लेकर अपने नियमों में बदलाव किया है। अब जापान 12 से अधिक देशों को हथियार बेचने में सक्षम होगा, जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण कदम है।

निर्यात नीति में बदलाव

जापान की नई हथियार निर्यात नीति का उद्देश्य वैश्विक सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देना है। यह घोषणा जापान के सरकारी सूत्रों द्वारा की गई, जिसमें कहा गया कि अब जापान अधिक देशों को अपने हथियारों की बिक्री की अनुमति देगा। इससे विभिन्न देशों के साथ सुरक्षा साझेदारी को मजबूत किया जाएगा।

इस नीति का उद्देश्य जापान की रक्षा क्षमता को बढ़ाना और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है। जापान पहले से ही अमेरिका और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। इसके तहत वह उन देशों को भी हथियार बेच सकता है, जिनके साथ पहले से साझेदारी की गई थी।

नई संभावनाएं और चुनौतियाँ

जापान का यह कदम अंतरराष्ट्रीय हथियार बाजार में नई संभावनाएं खोलेगा। लेकिन इसके साथ ही कुछ चुनौतियाँ भी सामने आएंगी। जापान को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके हथियारों का उपयोग सही तरीके से हो रहा है और ये किसी युद्ध या आतंकवाद में नहीं लगेंगे।

इसके अलावा, जापान की नई नीति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी छवि को भी प्रभावित करेगी। कुछ देशों में इसे लेकर चिंता हो सकती है। हालांकि, जापान सरकार का कहना है कि यह नीति शांति और स्थिरता में मददगार साबित होगी।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

इस नई नीति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। कुछ देश इसे समर्थन दे रहे हैं, जबकि अन्य इसे लेकर चिंतित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जापान का कदम क्षेत्रीय सुरक्षा को और मजबूत करेगा।

जापान की इस नई नीतिगत घोषणा से अन्य देशों को भी संभावित रूप से हथियारों की खरीद में दिलचस्पी बढ़ सकती है। इसके अलावा, सैन्य तकनीक के क्षेत्र में सहयोग भी बढ़ सकता है। जापान का यह कदम न केवल उसकी रक्षा नीतियों को बल्कि वैश्विक सुरक्षा संबंधों को भी प्रभावित करेगा।

जापान ने यह सुनिश्चित किया है कि सभी निर्यात कानूनी और शांति के सिद्धांतों के अधीन होंगे। इस बदलाव के तहत, जापान अपने सैन्य उत्पादों की बिक्री को बेहतर तरीके से नियंत्रित करेगा।

इस नए दिशा-निर्देश के अनुसार, जापान सरकार ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर एक ऐसा ढांचा तैयार किया है, जिसमें हथियारों का निर्यात पूरी पारदर्शिता और ज़िम्मेदारी के साथ किया जाएगा।

इस प्रकार, जापान का निर्णय न केवल उसकी सुरक्षा नीतियों को सुधारने का है, बल्कि वैश्विक सुरक्षा संतुलन को भी राह देने का है।

उम्मीद की जा रही है कि जापान के इस कदम से अन्य देशों के साथ सहयोग में वृद्धि होगी और वैश्विक सुरक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएँ पैदा होंगी।

बिलासपुर जोन में खेल का मेला! समर स्पेशल में देशभर में केवल 10 ट्रेन, जानें किस जोन को मिली सबसे ज्यादा ट्रेनें!

बिलासपुर रेलवे जोन की उपेक्षा पर उठी सवाल उठाने की आवाजें

बिलासपुर, 21 अप्रैल 2026। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर जोन की लंबे समय से उपेक्षा होती आ रही है। यह जोन हर साल माल लोडिंग के जरिए सबसे अधिक राजस्व अर्जित करता है, लेकिन सुविधाएं देने के मामले में इसे हमेशा ही प्राथमिकता में सबसे नीचे रखा गया है। इस मुद्दे पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि भी चुप्पी साधे हुए हैं, जबकि यहां के सांसद तोखन साहू और उपमुख्यमंत्री अरुण साव जैसे महत्वपूर्ण नेता भी हैं।

यात्रियों की बढ़ती कठिनाइयाँ और रेलवे की स्थिति

गर्मियों की छुट्टियों में यात्रियों का दबाव बढ़ने पर रेलवे आमतौर पर विशेष ट्रेनों का संचालन करता है। इस बार भी रेलवे ने अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन करने का वादा किया है, लेकिन बिलासपुर जोन की स्थितियां बेहद चिंताजनक नजर आ रही हैं। यात्रियों की समस्या यह है कि अब वेटिंग टिकट पर यात्रा करने की अनुमति नहीं दी जा रही है, जिससे यात्रियों को फिर से यात्रा निरस्त करने पर विवश होना पड़ता है।

यहां तक कि दक्षिण भारत के शहरों जैसे हैदराबाद और बेंगलुरु के लिए भी बिलासपुर से सीधी ट्रेनें बेहद कम हैं। कई यात्रियों को नागपुर जाकर कनेक्टिंग ट्रेन मात्र के लिए यात्रा करनी पड़ती है। राजधानी चेन्नई के लिए भी केवल एक ट्रेन सप्ताह में है।

अन्य जोनों की तुलना में बिलासपुर जोन की दयनीय स्थिति

रेलवे द्वारा हाल ही में जारी समर स्पेशल ट्रेनों की सूची में यह साफ दिखता है कि बिलासपुर जोन को बहुत कम ट्रेनों की मंजूरी मिली है। अन्य जोनों की तुलना में यहां की स्थिति अत्यंत निराशाजनक है।

  • दक्षिण मध्य रेलवे: 124 ट्रेनों (1,184 ट्रिप) को मंजूरी
  • पश्चिमी रेलवे: 106 ट्रेनों (2,078 ट्रिप) को मंजूरी
  • उत्तर पश्चिमी रेलवे: 76 ट्रेनों (2,245 ट्रिप) को मंजूरी
  • सेंट्रल रेलवे: 74 ट्रेनों (3,082 ट्रिप) को मंजूरी
  • दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (बिलासपुर): केवल 10 ट्रेनों (122 ट्रिप) को मंजूरी

इससे साफ है कि बिलासपुर जोन को अन्य जोनों की तुलना में बहुत कम ट्रेनों का संचालन करने की अनुमति दी गई है, जो कि यात्रियों के लिए एक बड़ा निराशाजनक पहलू है।

निष्कर्ष: यात्रियों की समस्याओं का समाधान आवश्यक

बिलासपुर रेलवे जोन की सुविधाओं में कमी और यात्रियों की बढ़ती कठिनाइयाँ रेलवे प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गई हैं। अधिक ट्रेनों की आवश्यकता को देखते हुए, जनप्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों को इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान करना होगा। यदि ये मुद्दे आगे नहीं बढ़ाए गए, तो इससे यात्रियों की सुविधा पर लंबे समय तक नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। रेलवे को इस प्रारंभिक समस्या का समाधान कर बुनियादी सेवाओं को प्रदान करना चाहिए ताकि यात्रियों की परेशानियाँ दूर हों और वे सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा कर सकें।

फ्रेंच ओपन: कार्लॉस अल्कारेज़ का कलाई चोट पर ‘महत्वपूर्ण’ परीक्षण!

ब्रेकिंग न्यूज़:
प्रत defending चैंपियन कार्लोस अल्कराज ने कहा है कि उनकी घायल कलाई के टेस्ट के परिणाम "महत्वपूर्ण" होंगे, यह निर्धारित करने के लिए कि क्या वह फ्रेंच ओपन में खेलेंगे।

कार्लोस अल्कराज, जो इस समय दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी हैं, ने अपनी कलाई की चोट के बारे में जानकारी दी। वह फ्रेंच ओपन 2023 में भाग लेना चाहते हैं, लेकिन हालिया टेस्ट के नतीजे उनके फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

खेल प्रेमियों के लिए यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है कि क्या अल्कराज इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में अपनी प्रतिभा दिखा पाएंगे या नहीं।

निष्कर्ष:
कार्लोस अल्कराज की चोट का परीक्षण परिणाम आगामी फ्रेंच ओपन में उनकी उपस्थिति पर निर्णायक प्रभाव डाल सकता है।

Gold-Silver Price: इस साल में अब तक सोने 17 हजार तो चांदी1.25 लाख तक सस्ता, जानिए आज किमतों में कितनी कमी? – Living India – gold silver prices so far this year gold has become cheaper by %e2%82%b917000

Gold-Silver Price: इस साल में अब तक सोने 17 हजार तो चांदी1.25 लाख तक सस्ता, जानिए आज किमतों में कितनी कमी? – Living India – gold silver prices so far this year gold has become cheaper by %e2%82%b917000

आज की ताजा खबर:

आज सोने और चांदी की कीमतों में कमी आई है। बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, लेकिन निवेशकों में सुरक्षित निवेश की रुचि बनी हुई है। साल की शुरुआत से सोने में तेजी देखने को मिली है, जबकि चांदी की कीमतें स्थिर हैं। आइए विस्तार से जानते हैं।

सोना 17,566 रुपये सस्ता

31 दिसंबर 2025 को सोने का भाव 1.33 लाख रुपये था। 29 जनवरी को यह 1.76 लाख रुपये तक पहुंच गया था। अब सोना 17,566 रुपये सस्ता हो चुका है। वहीं, चांदी की कीमतें 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपये थीं, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपये के अपने उच्चतम स्तर पर थीं। अब चांदी की कीमत में 1,25,982 रुपये की कमी आई है।

आज भी गिरावट

आज (शुक्रवार) को सोना और चांदी की कीमतों में फिर से गिरावट आई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) की आधिकारिक वेबसाइट ibjarates.com के अनुसार, भारतीय सर्राफा बाजार में 13 मार्च 2026 को सोने की कीमत 158,555 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है। वहीं, 999 शुद्धता वाली चांदी की कीमत अब 2 लाख 60 हजार रुपये तक नीचे आ गई है।

अन्य खबरें जानें-

US Air Force Aircraft Crash: इराक में अमेरिकी वायुसेना का विमान KC-135 क्रैश

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ट्रम्प ने कहा, ‘ईरान से समझौते तक हार्मूज नाकेबंदी जारी रहेगी’

ब्रेकिंग न्यूज़: अमेरिका के राष्ट्रपति ने ईरान के पाकिस्तान में शांति वार्ता में शामिल होने पर जताई चिंता।

अमेरिकी राष्ट्रपति की हालिया टिप्पणी के बाद, ईरान के पाकिस्तान में होने वाली शांति वार्ता में शामिल होने की संभावना पर अनिश्चितता बढ़ गई है। इस संबंध में अधिकारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है।

वार्ता की तैयारी पर उठे सवाल

पाकिस्तान में शांति वार्ता को लेकर कई देशों ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। मगर, ईरान का इस वार्ता में शामिल होना अभी तक स्पष्ट नहीं है। राष्ट्रपति की टिप्पणियां इस संदर्भ में महत्वपूर्ण हो गई हैं, जिससे ईरान की संभावित भागीदारी को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

अमेरिका की चिंताएँ

राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान की सहभागिता न केवल शांति प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है, बल्कि इससे क्षेत्रीय स्थिरता पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। उनका मानना है कि यदि ईरान वार्ता में भाग नहीं लेता है, तो इससे शांति प्रयासों की प्रगति में बाधा आ सकती है। यही नहीं, अमेरिका ने ईरान के पिछले व्यवहार पर भी चिंता व्यक्त की है, जिसने वार्ता की संभावनाओं को और अधिक जटिल बना दिया है।

क्षेत्रीय युद्ध एवं शांति का संतुलन

पाकिस्तान, जो इस वार्ता का आयोजन कर रहा है, ने सभी पक्षों से शांति की दिशा में कदम बढ़ाने की अपील की है। इस वार्ता का उद्देश्य क्षेत्रीय संघर्षों को समाप्त करना और स्थायी शांति स्थापित करना है। हालांकि, ईरान की भागीदारी पर संकट के चलते पूरी प्रक्रिया की प्रगति में अवरोध उत्पन्न हो सकता है।

अमेरिका का मानना है कि ईरान को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए, ताकि वह वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत कर सके। इराक, सीरिया और यमन जैसे देशों में तनावपूर्ण स्थितियों को देखते हुए, शांति वार्ता महत्वपूर्ण हो गई है।

हालात को गंभीरता से लेना जरूरी

विश्लेषकों का मानना है कि ईरान का पाकिस्तान में शांति वार्ता में शामिल न होना एक गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। इससे न केवल क्षेत्र के अन्य देशों में चिंता बढ़ेगी, बल्कि शांति प्रयासों को भी और अधिक चुनौती मिलेगी। ऐसे में, सभी देशों को इस मुद्दे पर एकजुट होकर काम करने की जरूरत है।

अंततः, सभी दृष्टिकोणों से यह स्पष्ट है कि ईरान की भूमिका को संजीदगी से लेना होगा। अगर वार्ता में ईरान सहयोग नहीं करता है, तो न केवल पाकिस्तान, बल्कि सम्पूर्ण क्षेत्र में स्थिरता को खतरा हो सकता है।

समाचार एजेंसियों के अनुसार, सभी आंखें अब इस वार्ता पर टिकी हुई हैं। सभी देशों को उम्मीद है कि ईरान इस महत्वपूर्ण अवसर को न चुकाएगा और शांति की दिशा में एक सकारात्मक कदम बढ़ाएगा।

CSMCL ओवर टाइम घोटाला: शराब घोटाले का खौफनाक कनेक्शन! कमीशन की रकम अनवर ढेबर तक, सिंडिकेट का फंसा जाल!

ब्रेकिंग न्यूज़: छत्तीसगढ़ में घोटालों का नया मामला उजागर

रायपुर, 21 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ में एक बार फिर से बड़े पैमाने पर घोटाले के मामले सामने आए हैं। हाल ही में 3200 रुपये के शराब घोटाले के बाद अब 115 करोड़ रुपये का सीएसएमसीएल ओवरटाइम घोटाला चर्चा में है। यह घोटाला आबकारी विभाग के अधिकारियों और मैनपावर सप्लाई कंपनियों के बीच सरे-सरे किया गया है।

ओवरटाइम भुगतान का घोटाला

राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो ने 2019-20 से 2023-24 के बीच ओवरटाइम के नाम पर मैनपावर एजेंसियों को सरकारी खजाने से 115 करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने की जांच की। यह राशि शराब दुकानों पर काम कर रहे कर्मचारियों के वेतन के लिए मानी जाती थी। लेकिन जांच में यह खुलासा हुआ कि यह रकम कर्मचारियों तक पहुंचने के बजाय कमीशन के रूप में हड़पी जा रही थी।

अभिषेक कुमार सिंह और तिजऊ राम निर्मलकर नामक मैनपावर कंपनियों के अधिकारियों को 19 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने पाया कि यह राशि अनवर ढेबर तक पहुंचाई जा रही थी, जो शराब घोटाले का मास्टर माइंड माना जाता है।

शराब घोटाले का सिद्धांत

पिछले शराब घोटाले की तरह ही, इस ओवरटाइम घोटाले का भी मास्टरमाइंड अनवर ढेबर है। सीएसएमसीएल के अधिकारियों और मैनपावर एजेंसियों के कर्मचारी मिलकर सरकारी खजाने को चूना लगा रहे थे। जांच के दौरान, प्रवर्तन निदेशालय द्वारा पकड़े गए कर्मचारियों से मिली जानकारी के आधार पर यह घोटाला सामने आया।

बेवजह वसूली का नया मामला

घोटालों के बीच छत्तीसगढ़ में शराब लाइसेंस नवीनीकरण के नाम पर बार संचालकों से बेजा वसूली की जा रही है। रायपुर, दुर्ग और भिलाई में संचालकों से लगभग दो से ढाई लाख रुपये तक की वसूली की जा रही है। यह स्थिति बेतरतीब तरीके से बनी हुई है और शिकायतें मुख्यमंत्री तक पहुंच चुकी हैं।

सम्बंधित अधिकारियों पर कार्रवाई का कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिसके कारण यह स्थिति और भी खराब होती जा रही है।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में चल रहे इन घोटालों ने राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती दी है। प्रभावशाली अधिकारी और मैनपावर एजेंसियों की मिलीभगत से हो रहे इन भ्रष्टाचार के मामलों ने जनता में अविश्वास पैदा किया है। राज्य सरकार को इन मामलों की गहन जांच कराकर सही दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि सरकार की "ज़ीरो टॉलरेंस" नीति का भरोसा बहाल किया जा सके।