ब्रेकिंग न्यूज़: भारत में कोयला गैसीकरण के लिए विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करेगी सरकार
केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने किया ऐलान, कहा – देश में बड़ा निवेश अवसर मौजूद है।
केंद्र सरकार ने भारतीय कोयला गैसिफिकेशन क्षेत्र में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। केंद्रीय कोयला और खनिज मंत्री जी. किशन रेड्डी ने बुधवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह पहल पारंपरिक खनन के विकल्प के रूप में की जा रही है, जिसका उद्देश्य गहरे कोयला भंडार तक पहुँचना और प्राकृतिक गैस के आयात पर निर्भरता कम करना है।
कोयला गैसीकरण के लिए तकनीकी सहयोग
रेड्डी ने बताया कि विदेशों से आने वाले निवेशकों को वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाएंगे। उन्होंने कहा, "हम उन कंपनियों को प्रोत्साहन देंगे जो भारत में निवेश करने की इच्छा रखती हैं। यह सिर्फ तकनीकी खरीद तक सीमित नहीं होगा, बल्कि निवेश के आधार पर प्रोत्साहन दिए जाएंगे।" इस बात का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कई अन्य मंत्रालयों के साथ संवाद जारी है ताकि प्रोत्साहन पैकेजों को अंतिम रूप दिया जा सके।
विदेशी कंपनियों के लिए मौके
मंत्री ने बताया कि भारत कोयला गैसीकरण में न केवल तकनीकी प्रदाताओं बल्कि निवेशकों के लिए भी एक आकर्षक बाजार बनने की दिशा में कार्य कर रहा है। "भविष्य में कोयला गैसीकरण – चाहे वह भूमिगत हो या सतही – के लिए निवेश की भरपूर संभावनाएँ हैं। विदेशी कंपनियों के लिए भी निवेश के अवसर मिलेंगे," उन्होंने कहा।
कोयला की कीमतों की निगरानी
बढ़ती कीमतों के आरोपों के जवाब में, मंत्री ने कहा कि कोयला मंत्रालय इस विषय पर चौकसी बरत रहा है। उन्होंने बताया कि "हम लगातार कीमतों की निगरानी कर रहे हैं। मैं और सचिव ने राज्यों को पत्र लिखकर कीमतों को नियंत्रित रखने का आग्रह किया है।" उन्होंने यह भी बताया कि हाल के समय में पश्चिम एशिया में बढ़ती तनावों के चलते कोयला की कीमतों में बदलाव आ रहा है।
कुल मिलाकर, भारत में कोयला गैसीकरण के प्रति सरकार का यह कदम न केवल आर्थिक विकास के लिए सहायक होगा, बल्कि ऊर्जा की स्वतंत्रता की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। मंत्री रेड्डी ने कहा कि उनकी सरकार इस क्षेत्र में समर्पित प्रयास करेगी और विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
उम्मीद है कि इससे वैश्विक निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया जा सकेगा, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा में सुधार होगा और स्थानीय उद्योग को भी बल मिलेगा।
