ब्रेकिंग न्यूज़: रायगढ़ में साइबर ठगी का भंडाफोड़, 23 लाख की रकम जब्त
रायगढ़, छत्तीसगढ़: रायगढ़ जिले की पुलिस ने दुबई से संचालित एक बड़े साइबर कारनामे का पर्दाफाश किया है। इस मामले में दो आरोपियों को बैंगलूरू से गिरफ्तार किया गया है, जिन्होंने एक रिटायर्ड शिक्षक से 23 लाख रुपये की ठगी की थी। आरोपियों ने खुद को सीबीआई के अधिकारी बताकर कई किश्तों में पैसे ट्रांसफर करवा लिए थे।
मामला क्या है?
11 नवंबर 2025 को, पुसौर थाना क्षेत्र के ग्राम जतरी में एक 72 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक गरुण सिंह पटेल ने साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने बताया कि उसे 10 दिसंबर को तीन अलग-अलग मोबाइल नंबरों से कॉल आया, जिसमें एक व्यक्ति ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताया। आरोपी ने कहा कि उनके नाम से मुंबई में एक खाता खोला गया है और इसे जांचने के लिए उन्हें मदद करनी होगी। धमकी देकर पीड़ित से कहा गया कि अगर सहयोग नहीं किया तो उसे गिरफ्तार किया जाएगा।
ऐसे में पीड़ित ने आरोपी के कहने पर यूपीआई और RTGS के माध्यम से 25 से 29 अक्टूबर 2025 के बीच 12 किस्तों में कुल 23,28,770 रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद भी आरोपी उसे व्हाट्सएप पर धमकाते रहे कि वह मनी लॉंड्रिंग के केस में फंस जाएगा। 30 अक्टूबर को पीड़ित ने अपने बेटे को सारी बात बताई, जिसके बाद पुलिस में शिकायत की गई।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने अपराध संख्या 304/2025 के तहत मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। एसएसपी शशि मोहन सिंह के नेतृत्व में पुसौर पुलिस ने तकनीकी सर्वेक्षण किया, जिसमें संदिग्ध अकाउंट और मोबाइल नंबर की जानकारी जुटाई गई। इसके बाद दोनों आरोपियों, विग्नेश प्रकाश और स्टीफन थॉमस को बैंगलूरू से गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर रायगढ़ लाया गया।
ठगों की वेबसाइट कैसे काम करती थी
पूछताछ में पता चला कि विग्नेश पी एक लेबर एजेंट है, जो दुबई में फिरोज खान उर्फ डॉम्निक से मिला था। फिरोज शोषण के जरिए लोगों से ठगी करने के लिए जाने जाते हैं। वे पूरी देश में डिजिटल अरेस्ट, आधार/सिम लिंकिंग और फर्जी लोन ऐप्स के माध्यम से ठगी के मामलों में शामिल रहे हैं। आरोपियों ने कहा कि उन्हें ठगी किए गए पैसों का कमीशन मिलता था।
निष्कर्ष
इस मामले ने साइबर ठगी की गंभीरता को उजागर किया है। एसएसपी शशि मोहन सिंह ने लोगों से अज्ञात कॉल और लिंक से सावधान रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में अपनी बैंकिंग जानकारी साझा न करें और संदेह होने पर तुरंत पुलिस से संपर्क करें। ऐसे मामलों में सतर्कता बरतने से कई लोगों को ठगी से बचाया जा सकता है।
इस घटना ने सभी को एक बार फिर याद दिलाया है कि डिजिटल युग में सतर्कता कितनी आवश्यक है।
