ब्रेकिंग न्यूज़: एसीबी-ईओडब्ल्यू ने 26 साल पुराने आवास ऋण घोटाले में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया
रायपुर में घोटाले की जांच का पदार्फाश
छत्तीसगढ़ राज्य में एसीबी-ईओडब्ल्यू (आपराधिक जांच ब्यूरो-आर्थिक अपराध शाखा) ने अब तक के सबसे बड़े आवास ऋण गबन घोटाले का पर्दाफाश किया है। इस मामले में प्रदीप कुमार निखरा नामक व्यक्ति को 26 साल बाद गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि निखरा ने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर 1995 से 1998 के बीच जरूरतमंद व्यक्तियों के लिए चल रही सरकारी आवासीय योजना का दुरुपयोग किया। इस घोटाले के तहत 186 व्यक्तियों के नाम पर 1-1 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कराया गया, जिससे कुल 1.86 करोड़ रुपये की धनराशि गबन की गई।
अवैध गतिविधियों का खुलासा
जांच में यह पाया गया है कि जिन स्थलों को दर्शाया गया था, वहाँ न तो मकान बने थे और न ही संबंधित ऋणधारी वहां मौजूद थे। आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से ऋण राशि का गबन किया। इस मामले में अपराध क्रमांक 19/2000 के तहत धारा 120B, 406, 409, 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी लागू की गई हैं।
सहयोगियों का नेटवर्क
जांच में खुलासा हुआ है कि आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति के तत्कालीन अध्यक्ष थावरदास माधवानी, सहकारी आवास संघ मर्यादित रायपुर के पूर्व पर्यवेक्षक बसंत कुमार साहू और सहकारी आवास संघ मर्यादित भोपाल के पूर्व प्रबंधक प्रदीप कुमार निखरा ने मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया। इन सब ने मिलकर कथित रूप से आवास संघ की धनराशि का बंटवारा किया।
न्यायिक प्रक्रिया की शुरुआत
4 अप्रैल को, प्रदीप कुमार निखरा को गिरफ्तार कर लिया गया और उसे न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय ने आरोपी को 7 अप्रैल तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। एसीबी-ईओडब्ल्यू की टीम अब अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और मामले की गहन जांच में जुटी है।
निष्कर्ष
इस घोटाले की जांच से साबित होता है कि सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग करने वाले व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्राधिकृत अंगों की तत्परता से जनहित की रक्षा करने में मदद मिलेगी। सभी नागरिकों को चाहिए कि वे ऐसे मामलों की सूचना दें और चेज प्रधानों की जवाबदेही सुनिश्चित करें। सुनिश्चित करें कि सरकारी योजनाएँ वास्तव में जरूरतमंद लोगों तक पहुँचें।
