ब्रेकिंग न्यूज़: बिलासपुर हाई कोर्ट का विशेष अवकाश सुनवाई
बिलासपुर। शनिवार को बिलासपुर हाई कोर्ट ने विशेष अवकाश के दिन भी काम किया। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्वत: संज्ञान लेते हुए शिक्षकों के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अंतर्गत गरीब बच्चों के प्रवेश से संबंधित एक जनहित याचिका पर सुनवाई की। अब इस मामले में अगली सुनवाई आठ अप्रैल को होगी।
शिक्षा के अधिकार पर स्थिति चिंताजनक
कोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव को नोटिस जारी किया है और उन्हें शपथ पत्र के माध्यम से जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र की शुरूआत के साथ आरटीई अधिनियम के अंतर्गत कक्षा 1 में प्रवेश प्रक्रिया धीमी पड़ गई है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, 38,438 आवेदनों में से केवल 23,766 (62%) का ही सत्यापन किया गया है। इस कार्य में भी कई जिलों में 10% से कम आवेदन सत्यापित हुए हैं। शिक्षा विभाग ने 16 फरवरी से 31 मार्च तक की समयसीमा निर्धारित की थी, लेकिन यह समयसीमा भी अधूरी रह गई है।
अभिभावकों की समस्याएँ बढ़ रही हैं
डिवीजन बेंच ने इस लापरवाही पर नाराजगी जताई है। प्रवेश प्रक्रिया में देरी के कारण अभिभावकों को बार-बार कोर्ट आना पड़ सकता है। इसके अलावा, स्कूल आवंटन की लॉटरी 13 से 17 अप्रैल के बीच निर्धारित की गई है, लेकिन सत्यापन की धीमी गति के चलते इसमें भी देरी होने की संभावना जताई गई है।
अगली सुनवाई की तिथि
भिलाई निवासी सीवी भगवंत राव ने इस मामले में जनहित याचिका दायर की है। याचिका की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर, उप महाधिवक्ता पीके भादुड़ी और वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए।
डिवीजन बेंच ने यह सुनिश्चित किया कि कोट एकसाथ दोनों याचिकाओं की सुनवाई करेगी।
निष्कर्ष
बिलासपुर हाई कोर्ट द्वारा उठाए गए कदम से आशा की किरण जगी है कि समय पर उचित निर्णय लिया जाएगा। यह छात्रों के भविष्य और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। हमें उम्मीद है कि आगामी सुनवाई में शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
