भारतीय ध्वज वाला LPG टैंकर ग्रीन आशा ने होर्मुज जलडमरूमध्य पार किया

बड़ी ख़बर: जलमार्ग के तनाव के बीच भारत का LPG टैंकर हॉर्मुज की जलडमरूमध्य पार कर गया

भारत ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। हिंद महासागर में तनावग्रस्त स्थिति के बावजूद, एक LPG टैंकर ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर लिया है। यह घटना वैश्विक ऊर्जा बाजार में नए संकट की संभावना को बढ़ाने वाली है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य से LPG टैंकर की सफल यात्रा

भारत के झंडे वाला LPG टैंकर ‘ग्रीन आशा’ रविवार को हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर गया। यह टैंकर 15,400 टन LPG लेकर जा रहा है। गौरतलब है कि यह हालिया दिनों में हॉर्मुज से निकलने वाला आठवां LPG टैंकर है। पिछले कुछ समय से, ईरान ने अपने एजेंडे के तहत इस जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर रखा था, जिसके कारण भारत को LPG की आपूर्ति में दिक्कतें आ रही थीं।

पिछले कुछ हफ्तों में ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण, ऊर्जा संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। अमेरिका और इज़राइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था, जिसके बाद भारत के लिए LPG की आपूर्ति में बाधाएँ आ गई थीं।

भारत के 22 जहाजों की सुरक्षा के लिए सरकार सक्रिय

भारत सरकार ने पहले ही संकेत दिए थे कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से 22 जहाजों को निकाले जाने की योजना है। इनमें से 20 जहाज भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ‘ग्रीन आशा’ ने 30 मार्च को संयुक्त अरब अमीरात के अल राम्स बंदरगाह से यात्रा शुरू की थी और यह जहाज ईरान के तट के समीप से होते हुए बढ़ा।

इसके अलावा, ‘ग्रीन सान्वी’ नामक एक अन्य टैंकर, जिसे 46,650 टन LPG के साथ भेजा गया था, ने भी जलडमरूमध्य को पार किया है। इसी दौरान, ‘जग विक्रम’ नामक एक टैंकर भी वहाँ फंसा हुआ है, जिसमें लगभग 20,000 टन LPG है।

भारतीय मछुआरों की सुरक्षित वापसी

सरकारी सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ हफ़्तों में वहाँ रह रहे 345 भारतीय मछुआरों को सुरक्षित लौटाया गया है। भारतीय दूतावास की सहायता से, इन्हें दक्षिण ईरान से आर्मेनिया तक पहुँचाया गया। वहाँ से मछुआरों ने चेन्नई के लिए उड़ान भरी।

सरकार ने ये भी कहा है कि 17 भारतीय-झंडा वाले जहाजों में 460 भारतीय नाविक पश्चिमी फारसी खाड़ी क्षेत्र में हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में किसी भी भारतीय जहाज के साथ कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है।

यह स्थिति भारत को ऊर्जा संकट के बीच एक मौका प्रदान करती है, लेकिन क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच आशंकाओं का भी सामना करना पड़ेगा।

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