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भारत का यूनीफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) 10 वर्षों के संपूर्ण सफलता की ओर बढ़ा

भारत का यूनीफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) 11 अप्रैल को अपने 10 साल पूरे करेगा, जिन्होंने देश की भुगतान प्रणाली में एक नई क्रांति ला दी है। यह प्लेटफॉर्म तेजी से विकसित होकर भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है।

UPI का विकास और उपयोग

जब UPI की शुरुआत 2017-18 में हुई थी, तभी से इसने अभूतपूर्व विकास दिखाया है। डेटा के अनुसार, वर्ष 2017 में UPI ने लगभग 17.86 मिलियन लेनदेन किए थे, जिनका कुल मूल्य ₹6,952 करोड़ था। अब यह संख्या बढ़कर 218.98 बिलियन लेनदेन और लगभग ₹285 लाख करोड़ के मूल्य तक पहुंच गई है, जो इस प्रणाली की गहरी लोकप्रियता को दर्शाता है।

UPI के शुरुआती वर्षों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखने को मिली। वर्ष 2018 में यह संख्या 915 मिलियन और 2019 में 5.39 बिलियन हो गई। वर्ष 2020 में UPI ने मुख्यधारा में प्रवेश किया, इस वर्ष 12.52 बिलियन लेनदेन हुए थे, जिनका कुल मूल्य ₹21 लाख करोड़ से अधिक था।

कोविड-19 का प्रभाव

कोविड-19 महामारी ने UPI के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित किया। महामारी के दौरान बिना संपर्क के भुगतान की मांग बढ़ी, जिसके परिणामस्वरूप UPI के लेनदेन की मात्रा में तेज वृद्धि हुई। वर्ष 2021 में लेनदेन 22.33 बिलियन तक पहुंचे और वर्ष 2022 में यह संख्या लगभग दोगुनी होकर 45.97 बिलियन हो गई। इसके बाद, वर्ष 2023 में लेनदेन की संख्या 83.75 बिलियन, 2024 में 130.13 बिलियन, और 2025 में 185.87 बिलियन तक पहुंच गई।

UPI के नए मापदंड

UPI अब नए मानदंड स्थापित कर रहा है। मार्च 2026 में, इसने अपने उच्चतम मासिक लेनदेन की संख्या 22.64 बिलियन दर्ज की, जो जनवरी में 21.70 बिलियन और फरवरी में 20.39 बिलियन से अधिक है। वर्ष-दर-वर्ष के आंकड़ों के अनुसार, UPI के लेनदेन की मात्रा में 24 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

वर्ष 2025 में, UPI ने 228.5 बिलियन लेनदेन किए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 33 प्रतिशत अधिक है। लेनदेन का कुल मूल्य ₹299.74 ट्रिलियन तक पहुंच गया है। वर्तमान में, महीने का लेनदेन मूल्य लगभग ₹28 लाख करोड़ है, जो भारत में कुल मुद्रा के 70 प्रतिशत के बराबर है।

इस के साथ-साथ, व्यापारियों द्वारा UPI को स्वीकार करने की संरचना भी तेजी से बढ़ी है। UPI QR कोड्स की संख्या वर्ष 2025 में 15 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 731.38 मिलियन तक पहुंच गई। इसी तरह, पॉइंट-ऑफ-सेल टर्मिनल की संख्या 11.48 मिलियन हो गई है।

इस प्रकार, UPI ने न केवल भुगतान प्रणाली को बेहतर बनाया है, बल्कि इसे हर भारतीय के लिए सरल और सुलभ बना दिया है।

इस 10 वर्षीय यात्रा में UPI ने डिजिटल पैसे के उपयोग में एक नई दिशा दी है, जो आने वाले वर्षों में और भी अधिक बढ़ने की संभावना है।

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