ब्रेकिंग न्यूज़: भारत ने रूस से कच्चे तेल के आयात में ऐतिहासिक उछाल
मार्च 2023 में भारत ने रूस से प्रतिदिन औसतन 1.98 मिलियन बैरल कच्चे तेल का आयात किया, जो कि जून 2023 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। यह वृद्धि उन हालातों में आई है जब भारतीय रिफाइनर व्हेलिंग विकल्पों की कमी के कारण रूस से कच्चा तेल प्राप्त करने के लिए मजबूर हैं।
घरेलू मांग को प्राथमिकता
हाल के संघर्षों से उत्पन्न स्थिति के बीच, भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसकी प्राथमिकता घरेलू ऊर्जा मांग को पूरा करना है। भारत की तेल मंत्रालय की संयुक्त सचिव, सुजाता शर्मा ने बताया कि, "हमारे लिए मुख्य लक्ष्य अपनी घरेलू मांग को पूरा करना है।" उन्होंने यह भी कहा कि, "हमारा चयन कच्चे तेल की तकनीकी और व्यावासिक संभावनाओं पर आधारित है।"
अमेरिका के प्रतिबंधों का असर
हालांकि अमेरिका ने पिछले महीने भारत को 30 दिनों के लिए रूसी कच्चे तेल की बिक्री की अनुमति दी थी, लेकिन रिफाइनर ऐसे संकेत दे रहे हैं कि अमेरिकी छूट आने वाले समय में फिर से बढ़ सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि रूस से आयात में किसी गिरावट की संभावना नहीं है, भले ही अमेरिकी छूट खत्म हो जाए, क्योंकि 공급 विकल्प सीमित हैं।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल ट्रंप प्रशासन ने भारतीय निर्यात पर 25% ‘दंड’ टैरिफ लगाया था, जिसके चलते रूस के कच्चे तेल का आयात प्रभावित हुआ था। यह सजा इस साल के आरंभ में हटाई गई थी, लेकिन ट्रंप ने कहा था कि अगर नई दिल्ली रूस से फिर से कच्चा तेल आयात करती है, तो यह टैरिफ फिर से लागू हो सकता है।
भारत का रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता
रूसी कच्चे तेल के आयात में बढ़ोतरी से संबंधित एक विशेषज्ञ, वंदना हरी, ने कहा कि "भारत जितना हो सके रूसी कच्चा तेल इकट्ठा कर रहा है।" उन्होंने उम्मीद जताई कि जब तक अमेरिका से तेल की आपूर्ति बाधित रहेगी, तब तक भारत रूस से अधिकतम मात्रा में तेल खरीदता रहेगा।
हालांकि, अप्रैल में भारतीय आयात गिरकर 1.57 मिलियन बैरल प्रति दिन हो गया, जिसका मुख्य कारण नायरा एनर्जी का 400,000 बैरल प्रतिदिन का रिफाइनरी बंद होना था। फिर भी, आपूर्ति के कमी के कारण आयात में संभावित गिरावट नजर नहीं आ रही है।
निष्कर्ष
भारत के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है, लेकिन इसे घरेलू मांग को पूरा करने के लिए एक अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है। वैश्विक तेल बाजार की सूक्ष्मता और अमेरिका-इस्राइल संघर्ष का असर भारतीय रिफाइनर की रणनीतियों पर प्रभाव डाल रहा है। समय के साथ, भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दीर्घकालिक रणनीतियों की आवश्यकता होगी।
