ब्रेकिंग न्यूज़: छत्तीसगढ़ में बड़ा बिजली घोटाला उजागर
रायपुर: छत्तीसगढ़ बिजली कंपनी के मुख्यालय ने एक बड़ी अनियमितता का पर्दाफाश किया है। आरोप है कि कुछ अधिकारियों ने ऑनलाइन सिस्टम का दुरुपयोग करते हुए गैर-बीपीएल उपभोक्ताओं को बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) उपभोक्ताओं के लाभ का लाभ दिलाया। इस घोटाले में 2758 गैर-बीपीएल उपभोक्ताओं ने अनधिकृत रूप से बीपीएल श्रेणी में जाने का फायदा उठाया।
2758 उपभोक्ताओं की श्रेणी में हुआ खेल
जांच रिपोर्ट के अनुसार, यह गड़बड़ी बिलासपुर क्षेत्र में हुई है। संबंधित अधिकारियों ने गैर-बीपीएल उपभोक्ताओं को श्रेणी में बदलाव कर बीपीएल श्रेणी में डालकर उन्हें लाभ पहुंचाया। ऐसी स्थिति में, इन उपभोक्ताओं ने उचित बिजली मूल्य में छूट का लाभ लिया और बाद में फिर से गैर-बीपीएल श्रेणी में डाल दिए गए। यह साफ है कि अधिकारियों ने जानबूझकर इस प्रक्रिया को अंजाम दिया।
जांच की प्रक्रिया और सबूत
इस घोटाले की शिकायत उच्च अधिकारियों के पास पहुंची, जिसके बाद प्रमुख अभियंता जेएस नेताम और वीआर मौर्या को जांच के लिए भेजा गया। उनकी जांच रिपोर्ट में 95 आईडी का उपयोग होते हुए विभिन्न उपभोक्ता श्रेणियों में बदलाव का स्पष्ट उल्लेख है। जांच में यह पाया गया कि उन उपभोक्ताओं को बीपीएल श्रेणी में रखा गया था, जो कभी इस श्रेणी में नहीं थे। पूरे प्रकरण में चार करोड़ 41 लाख रुपये का सरकारी खजाने को नुकसान होने का अनुमान है।
उपभोक्ताओं को बकाया राशि के बिल
विभागीय सूत्रों के अनुसार, इन उपभोक्ताओं से बकाया राशि की वसूली की गई है। जबकि दोषी अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, सिर्फ उन्हें नोटिस जारी करने की प्रक्रिया अपनाई गई। यह भी बताया गया है कि उपभोक्ताओं से वसूली के लिए नए बिल जारी किए जा रहे हैं, जिससे स्थिति और भी जटिल हो गई है।
निष्कर्ष
यह घटनाक्रम छत्तीसगढ़ की बिजली कंपनी के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार का स्पष्ट उदाहरण है। अधिकारियों की मिलीभगत से यह उपभोक्ताओं के साथ धोखा है और यह समस्या केवल स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि राज्य स्तर पर गंभीर चिंता का विषय बन गई है। अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हो। सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।
