ब्रेकिंग न्यूज़: चीन और रूस के बीच रणनीतिक बातचीत
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रूस के विदेश मंत्री सेग़ेई लावरोव के साथ महत्वपूर्ण वार्ता की है। इस बैठक में ईरान युद्ध और अन्य गंभीर मुद्दों पर चर्चा हुई।
चीन और रूस की रणनीतिक समन्वय की आवश्यकता
बीजिंग में होने वाली यह मुलाकात चीन की सरकारी मीडिया के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग और विदेश मंत्री लावरोव के बीच हुई। शी ने इस दौरान कहा कि बीजिंग और मॉस्को के बीच "गहरे और मजबूत रणनीतिक समन्वय" की आवश्यकता है। उन्होंने दोनों देशों द्वारा अपने वैध हितों की रक्षा करते हुए वैश्विक दक्षिण के देशों की एकता को बनाए रखने पर जोर दिया।
शी जिनपिंग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में स्थिरता और चीन-रूस संबंधों की निश्चितता अत्यधिक मूल्यवान है। यह टिप्पणी उस समय आई है जब विश्व में लगातार बदलाव और अराजकता देखी जा रही है।
ईरान युद्ध का प्रभाव और वैश्विक खाद्य संकट
हालांकि, शी के बयानों में अमेरिका-इज़राइल युद्ध का सीधा उल्लेख नहीं था, फिर भी उनके शब्दों ने यह संकेत दिया कि होर्मुज़ जलडमरुमध्य का बंद होना न केवल ईरान के लिए, बल्कि वैश्विक खाद्य संकट के लिए भी चिंताजनक हो सकता है। इस जलडमरुमध्य से 20 प्रतिशत से अधिक वैश्विक तेल और गैस निर्यात होता है।
लावरोव ने बताया कि मॉस्को, चीन के ऊर्जा संकट को "पूर्णता" से संभालने के लिए तैयार है, विशेषकर तब जब जलडमरुमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित हो चुकी है।
वैश्विक भू-राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा
लावरोव ने शी जिनपिंग से मिलने से पहले मंगलवार को चीनी समकक्ष वांग यी से भी वार्ता की। इस चर्चा में मध्य पूर्व के संघर्ष, यूक्रेन युद्ध और अन्य भू-राजनीतिक मुद्दों पर विचार किया गया।
चीन और रूस औपचारिक सैन्य सहयोगी नहीं हैं, फिर भी इन दोनों के बीच आर्थिक और राजनीतिक रिश्ते बेहद मजबूत हैं। 2022 में, शी ने राष्ट्रपति व्लादимир पुतिन के साथ "बिना सीमा" की रणनीतिक साझेदारी पर हस्ताक्षर किए थे।
इस सप्ताह बीजिंग का दौरा करने वाले लावरोव ने स्पेनिश प्रधान मंत्री पेड्रो सांचेज, अबू धाबी के क्राउन प्रिन्स मोहम्मद बिन जायद अल नाह्यान, और वियतनामी नेता टो लाम के साथ भी बातचीत की।
शी जिनपिंग ने सांचेज के साथ वार्ता में चेतावनी दी कि विश्व में "अराजकता और उथल-पुथल" है। उन्होंने सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं, वियतनामी नेता के साथ बैठक में कई सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
इस तरह की महत्वपूर्ण वार्ताओं से यह स्पष्ट हो रहा है कि चीन और रूस वैश्विक स्थिरता और शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए एकजुट हैं।
यह मुलाकात वैश्विक भू-राजनीति में नए मोड़ लाने की क्षमता रखती है, विशेषकर उस समय जब अंतरराष्ट्रीय संबंधों में तनाव बढ़ता जा रहा है।
