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“₹74 लाख की जल योजना अधूरी: 30 माह बाद भी गांव प्यासा, टंकी बनी ‘शोपीस’

📍 महासमुंद/बागबाहरा | दिलीप शर्मा

गांव प्यासा: प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना में महासमुंद जिले के बागबाहरा ब्लॉक से लापरवाही और अव्यवस्था के गंभीर मामले सामने आ रहे हैं। करोड़ों की लागत से बन रही योजनाएं जमीनी स्तर पर अधूरी पड़ी हैं, जिससे ग्रामीणों को अब तक शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा है।


⚠️ 30 माह बाद भी अधूरा काम

ग्राम पंचायत पटपरपाली में SVS पटपरपाली जल योजना जून 2023 में शुरू हुई थी। तय समयसीमा के अनुसार यह कार्य 9 माह में पूरा होना था, लेकिन लगभग 30 माह बाद भी योजना अधूरी है।

👉 जमीनी स्थिति:

  • पानी टंकी का निर्माण हो चुका है
  • लेकिन पानी सप्लाई शुरू नहीं हुई
  • गांव में पाइपलाइन बिछाने का काम अधूरा
  • कई घरों में प्लेटफॉर्म भी तैयार नहीं

👉 ठेकेदार का दावा:
“काम पूरा है, लेकिन बोरिंग नहीं हुई”

👉 हकीकत:
बोरिंग न होने से टंकी में पानी ही नहीं, इसलिए सप्लाई ठप है।


महासमुंद में जल जीवन मिशन पर बड़ा खुलासा, 84.68% कवरेज के दावे पर सवाल, ठेकेदारों पर कार्रवाई की तैयारी

📊 ताजा सरकारी आंकड़े क्या कहते हैं

सरकारी पोर्टल के अनुसार:

  • कुल स्वीकृत लागत: ₹74.99 लाख
  • अब तक खर्च: ₹49.65 लाख
  • बाकी राशि: ₹25.34 लाख
  • कुल घर: 186
  • नल कनेक्शन दिए गए: 51
  • बाकी घर: 135

👉 यानी आधे से ज्यादा पैसा खर्च होने के बाद भी सिर्फ 27% घरों तक ही कनेक्शन पहुंच पाया है।


💧 पानी के लिए तरस रहे ग्रामीण

गांव में हालात यह हैं कि:

  • एकमात्र हैंडपंप भी सही से काम नहीं कर रहा
  • 38 सेकंड तक चलाने पर भी पानी नहीं निकल रहा
  • भीषण गर्मी में पेयजल संकट गहराया

ग्रामीणों का कहना है कि:

“टंकी बना दी, लेकिन पानी नहीं है। पाइप अधूरा है, हैंडपंप खराब है… हम लोग परेशान हैं।”


😡 ‘शोपीस’ बनी योजना, जिम्मेदार कौन?

ग्रामीणों का आरोप है कि:

  • ठेकेदार और विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं
  • PHED (लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग) ने भी हैंडपंप सुधार में रुचि नहीं दिखाई
  • योजना का लाभ जमीन पर नहीं दिख रहा

🏚️ अन्य गांवों में भी यही हाल

बागबाहरा ब्लॉक के कई गांवों में:

  • पानी टंकियां लीक हो रही हैं
  • कहीं टंकी बनकर बेकार पड़ी है
  • कहीं पाइपलाइन अधूरी है

📌 सवाल

सरकार “हर घर नल जल” का लक्ष्य लेकर चल रही है, लेकिन पटपरपाली जैसे गांवों में अधूरा काम, खर्च की गई राशि और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर नजर आ रहा है।

अब सवाल यह है कि:
👉 क्या प्रशासन इस पर संज्ञान लेगा?
👉 या करोड़ों की योजना यूं ही ‘शोपीस’ बनकर रह जाएगी?

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