WMO का अलर्ट: सूखा, हीटवेव और कम बारिश का खतरा, सरकार ने राज्यों को किया सतर्क
नई दिल्ली। खेती-किसानी पर मंडराया बड़ा खतरा! देश में एक ओर भीषण गर्मी लोगों का जीना मुश्किल कर रही है, वहीं दूसरी ओर मानसून की धीमी रफ्तार ने चिंता बढ़ा दी है। इस बीच विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की ताजा चेतावनी ने किसानों और सरकार दोनों की चिंता बढ़ा दी है। संगठन के अनुसार प्रशांत महासागर में तेजी से विकसित हो रही अल नीनो (El Nino) की स्थिति आने वाले महीनों में मौसम का संतुलन बिगाड़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अल नीनो मजबूत होता है तो भारत में जून से सितंबर के बीच सामान्य से कम बारिश हो सकती है। इसका सीधा असर खेती, जल संसाधनों और खाद्य कीमतों पर पड़ सकता है।
80 फीसदी तक पहुंची अल नीनो बनने की संभावना
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक WMO ने कहा है कि जून से अगस्त के बीच अल नीनो विकसित होने की संभावना 80 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यही वह अवधि है जब भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून सबसे अधिक सक्रिय रहता है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अल नीनो के प्रभाव से मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ सकती हैं, जिससे कई क्षेत्रों में वर्षा कम होने की आशंका है। पिछले वर्षों में भी अल नीनो ने वैश्विक तापमान को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी।
कमजोर मानसून से प्रभावित हो सकती हैं खरीफ फसलें
देश के करोड़ों किसान धान, मक्का, दाल और गन्ने जैसी खरीफ फसलों के लिए मानसून पर निर्भर हैं। यदि बारिश सामान्य से कम हुई तो बुआई में देरी और उत्पादन में गिरावट की आशंका बढ़ जाएगी।
इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों को जिला स्तर पर कंटीजेंसी प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। कृषि मंत्रालय ने संभावित संकट से निपटने के लिए व्यापक तैयारी शुरू कर दी है।

किसानों को नहीं घबराने की सलाह
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन राज्यों को पूरी तैयारी के साथ काम करना होगा ताकि खरीफ सीजन पर किसी प्रकार का बड़ा असर न पड़े। सरकार कम पानी में तैयार होने वाली फसलों, मोटे अनाज (मिलेट्स), सूखा सहन करने वाली बीज किस्मों और आधुनिक सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है।
जल संकट की आशंका भी बढ़ी
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मानसून कमजोर रहता है तो कई राज्यों में जलाशयों का जलस्तर तेजी से गिर सकता है। हालांकि वर्तमान में देश के प्रमुख जलाशयों में सामान्य से अधिक पानी उपलब्ध है, लेकिन लंबे समय तक कम बारिश रहने पर स्थिति बदल सकती है।
मध्य भारत और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में जल संकट का खतरा अधिक माना जा रहा है।
क्या है अल नीनो?
अल नीनो प्रशांत महासागर के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने की एक प्राकृतिक जलवायु घटना है। इसका असर दुनिया भर के मौसम तंत्र पर पड़ता है। भारत में इसका संबंध आमतौर पर कमजोर मानसून, कम बारिश और बढ़ती गर्मी से जोड़ा जाता है।
जब अल नीनो सक्रिय होता है तो मानसूनी हवाओं की ताकत कम हो जाती है, जिससे वर्षा प्रभावित होती है और सूखे जैसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।
मौसम विभाग का अनुमान
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल में लगभग 4 जून के आसपास पहुंच सकता है। सामान्य परिस्थितियों में मानसून 1 जून तक केरल पहुंच जाता है।
मौसम विभाग ने इस बार सामान्य से कम वर्षा की आशंका जताई है। यदि मानसून अपेक्षा से कमजोर रहा तो देश के कई हिस्सों में कृषि, पेयजल और बिजली उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
बड़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते जलवायु परिदृश्य में किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ जल संरक्षण, मौसम आधारित कृषि सलाह और कम पानी वाली फसलों की ओर भी ध्यान देना होगा। आने वाले कुछ सप्ताह यह तय करेंगे कि इस वर्ष मानसून राहत लेकर आएगा या फिर किसानों की मुश्किलें और बढ़ेंगी।


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