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धर्म परिवर्तन के आरोप में सामाजिक बहिष्कार का मामला पहुंचा मानव अधिकार आयोग, पीड़ित ने लगाई न्याय की गुहार

महासमुंद/कोमाखान। महासमुंद जिले के कोमाखान क्षेत्र के एक ग्रामीण ने कथित सामाजिक बहिष्कार और प्रताड़ना का मामला मानव अधिकार आयोग तक पहुंचाया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि धर्म परिवर्तन का आरोप लगाकर पिछले करीब पांच वर्षों से उसे समाज से बहिष्कृत कर दिया गया है। इस कारण वह न केवल सामाजिक गतिविधियों से वंचित है, बल्कि उसके परिवार को भी गंभीर मानसिक, सामाजिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

शिकायतकर्ता चंदन सिंह ध्रुव, निवासी ग्राम डोगाखम्हरिया (पोस्ट साल्हेभाठा), तहसील कोमाखान, जिला महासमुंद ने मानव अधिकार आयोग को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि समाज के कुछ पदाधिकारियों और सदस्यों ने बिना किसी निष्पक्ष सुनवाई के उसे समाज से अलग-थलग कर दिया। इसके चलते उसे सामाजिक आयोजनों में शामिल नहीं किया जाता और सामान्य सामाजिक सुविधाओं से भी वंचित रखा जा रहा है।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि उसकी पैतृक जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर रखा है, जिसका मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। पीड़ित का आरोप है कि जमीन विवाद और सामाजिक बहिष्कार के कारण उसे लगातार प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है।

चंदन सिंह ध्रुव ने यह भी बताया कि समाज से बहिष्कृत किए जाने का सबसे अधिक असर उसके परिवार पर पड़ा है। उसके बेटा और बेटी विवाह योग्य हो चुके हैं, लेकिन सामाजिक बहिष्कार के कारण उनके लिए वैवाहिक रिश्ते तय करने में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। समाज से अलग-थलग किए जाने के कारण परिवार सामाजिक और मानसिक तनाव में जीवन व्यतीत कर रहा है।

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शिकायत में कई लोगों के नामों का उल्लेख करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई करने तथा उनके सामाजिक अधिकारों की बहाली की मांग की गई है। पीड़ित ने मानव अधिकार आयोग से हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की अपील की है।

फिलहाल, यह मामला मानव अधिकार आयोग के समक्ष विचाराधीन है। शिकायत में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता के हैं। जिन व्यक्तियों पर आरोप लगाए गए हैं, उनका पक्ष अभी सामने नहीं आया है। साथ ही, जमीन से जुड़ा विवाद न्यायालय में लंबित है। मामले की वास्तविक स्थिति आयोग की जांच, संबंधित पक्षों के जवाब और न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

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