महासमुंद। पिथौरा थाना क्षेत्र में आदिवासी भूमि को कथित रूप से फर्जी तरीके से अपने नाम पर दर्ज कराने और धान बेचकर आर्थिक लाभ लेने के मामले में पुलिस ने अपराध दर्ज किया है। मामले में ग्राम डोंगरीपाली कैलाशपुर निवासी जगतराम पटेल सहित अन्य अज्ञात सहयोगियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, आवेदिका जमुना बरिहा ने शिकायत दर्ज कराई थी कि ग्राम डोंगरीपाली स्थित खसरा नंबर 614/1, रकबा 0.4900 हेक्टेयर भूमि मूल रूप से उनके नाम पर दर्ज थी। वर्ष 2014 में उक्त भूमि का वैध विक्रय चेतन नेताम के पक्ष में किया गया था। इसके बाद भी बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया, पंजीयन अथवा सक्षम आदेश के राजस्व अभिलेखों में जगतराम पटेल का नाम दर्ज करा दिया गया।
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प्राथमिक जांच में तहसील कार्यालय, पंजीयन कार्यालय महासमुंद तथा जिला सहकारी केंद्रीय बैंक पिथौरा से प्राप्त दस्तावेजों का परीक्षण किया गया। जांच में पाया गया कि नामांतरण संबंधी कोई वैध रिकॉर्ड तहसील कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कथित रूप से राजस्व कर्मचारियों एवं अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर षड्यंत्रपूर्वक यह एंट्री कराई।
FIR में उल्लेख है कि आरोपी ने वर्ष 2025-26 में उपार्जन केंद्र टेका में विवादित भूमि को अपने ऋण पुस्तिका में शामिल कर लगभग 88 क्विंटल धान का विक्रय किया तथा समर्थन मूल्य और बोनस की राशि अपने बैंक खाते में प्राप्त की। पुलिस का कहना है कि इससे शासन और वास्तविक हकदारों को आर्थिक नुकसान पहुंचा।
पुलिस ने आरोपी जगतराम पटेल एवं अन्य अज्ञात सहयोगियों के खिलाफ धारा 318(4), 61(2) और 3(5) बीएनएस के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है। मामले की जांच उपनिरीक्षक दिलीप ठाकुर द्वारा की जा रही है।
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